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ओलावृष्टि से रवाईं घाटी में बर्बाद हुई फसलें
Updated Fri, 11 May 2018 10:48 PM IST
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नौगांव (उत्तरकाशी)। बुधवार देर शाम हुई ओलावृष्टि से रर्वाइं घाटी में सेब, नाशपाती, गेहूं, टमाटर, पुलम आदि नकदी फसल बर्बाद हो गई है। काश्तकारों ने प्रशासन से क्षति का आंकलन कर मुआवजे की मांग की है।
ओलावृष्टि से स्योरी फल पट्टी सहित सुनारा, छानी, भाटिया, कृष्णा, बगासु, तुनाल्का, रस्टाड़ी, कंडाऊं, कफनौल, धारी, कलोगी, हिमरौल आदि गांवों के फसलें बर्बाद हो गई। स्योरी फल पट्टी में सेब की फसल को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। वहीं अन्य स्थानों पर नाशपाती, गेहूं, टमाटर, पुलम आदि नकदी फसलें बर्बाद हुई है। पीड़ित काश्तकारों का कहना है कि उन्होंने सेब आदि नकदी फसलों के लिए बैंक व सहकारी समितियों से ऋण लिया है, जिसका भुगतान फसल बेचकर किया जाना था। लेकिन मौसम की मार के कारण ऋण चुकाना अब मुश्किल हो गया है। रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद, प्रेम सिंह राणा, दीवान सिंह असवाल, विशाल डिमरी आदि काश्तकारों ने स्थानीय प्रशासन से नुकसान का आंकलन कर पीड़ित काश्तकारों को मुआवजा देने की मांग की है।
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ओलावृष्टि से स्योरी फल पट्टी सहित सुनारा, छानी, भाटिया, कृष्णा, बगासु, तुनाल्का, रस्टाड़ी, कंडाऊं, कफनौल, धारी, कलोगी, हिमरौल आदि गांवों के फसलें बर्बाद हो गई। स्योरी फल पट्टी में सेब की फसल को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। वहीं अन्य स्थानों पर नाशपाती, गेहूं, टमाटर, पुलम आदि नकदी फसलें बर्बाद हुई है। पीड़ित काश्तकारों का कहना है कि उन्होंने सेब आदि नकदी फसलों के लिए बैंक व सहकारी समितियों से ऋण लिया है, जिसका भुगतान फसल बेचकर किया जाना था। लेकिन मौसम की मार के कारण ऋण चुकाना अब मुश्किल हो गया है। रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद, प्रेम सिंह राणा, दीवान सिंह असवाल, विशाल डिमरी आदि काश्तकारों ने स्थानीय प्रशासन से नुकसान का आंकलन कर पीड़ित काश्तकारों को मुआवजा देने की मांग की है।
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