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अब बिना परमिट के नहीं जा सकते डोडीताल, दयारा और नचिकेताताल
Updated Tue, 27 Feb 2018 11:08 PM IST
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उत्तरकाशी। डोडीताल, दयारा बुग्याल एवं नचिकेता ताल में घूमने की चाह रखने वाले पर्यटकों को अब बिना परमिट के एंट्री नहीं मिलेगी। उत्तरकाशी वन प्रभाग ने इन तीनों स्थलों के लिए परमिट की व्यवस्था लागू कर दी है। पहले यह व्यवस्था सिर्फ नेशनल पार्क क्षेत्र के लिए थी। अब पर्यटकों को अनुमति के लिए वन विभाग के चक्कर काटने पड़ेंगे। स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों ने इस व्यवस्था का विरोध किया है।
बर्फबारी के बाद खुशगवार हुए मौसम में पर्यटन स्थलों का नजारा करने के लिए पर्यटक उत्तरकाशी पहुंच रहे हैं। यहां पहुंचने पर पर्यटकों को पता लगा कि अब वन विभाग ने डोडीताल, दयारा और नचिकेताताल ट्रैक पर जाने के लिए परमिट व्यवस्था लागू कर दी है। नए नियम के अनुसार इन पर्यटन स्थलों पर कूड़ा प्रबंधन के लिए पर्यटकों से पांच हजार रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करायी जा रही है। इसके लिए पर्यटक को शपथ पत्र भरकर डाकघर में रुपये जमा कराने पड़ रहे हैं।
मान सिंह पंवार, मुकेश पंवार आदि ट्रैकिंग व्यवसायियों का कहना है कि परमिट व्यवस्था पहले सिर्फ नेशनल पार्क क्षेत्र में ही थी। एक ओर तो सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर परमिट व्यवस्था की आड़ में पर्यटकों को परेशान किया जा रहा है। ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा का कहना है कि परमिट के लिए पर्यटकों को वन विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एवं राजस्व के लिहाज से नियम जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए ट्रैक रूट पर ही परमिट काउंटर खोले जाने चाहिए और नियमों को सरल बनाया जाना चाहिए।
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पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए ही परमिट का नियम बनाया गया है। कूड़ा प्रबंधन के लिए बने नियम को लेकर कुछ आपत्तियां आयी हैं। इसमें सुधार पर विचार किया जाएगा। परमिट के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
रविंद्र पुंडीर, वन क्षेत्राधिकारी बाड़ाहाट रेंज।
बर्फबारी के बाद खुशगवार हुए मौसम में पर्यटन स्थलों का नजारा करने के लिए पर्यटक उत्तरकाशी पहुंच रहे हैं। यहां पहुंचने पर पर्यटकों को पता लगा कि अब वन विभाग ने डोडीताल, दयारा और नचिकेताताल ट्रैक पर जाने के लिए परमिट व्यवस्था लागू कर दी है। नए नियम के अनुसार इन पर्यटन स्थलों पर कूड़ा प्रबंधन के लिए पर्यटकों से पांच हजार रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करायी जा रही है। इसके लिए पर्यटक को शपथ पत्र भरकर डाकघर में रुपये जमा कराने पड़ रहे हैं।
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मान सिंह पंवार, मुकेश पंवार आदि ट्रैकिंग व्यवसायियों का कहना है कि परमिट व्यवस्था पहले सिर्फ नेशनल पार्क क्षेत्र में ही थी। एक ओर तो सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर परमिट व्यवस्था की आड़ में पर्यटकों को परेशान किया जा रहा है। ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा का कहना है कि परमिट के लिए पर्यटकों को वन विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एवं राजस्व के लिहाज से नियम जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए ट्रैक रूट पर ही परमिट काउंटर खोले जाने चाहिए और नियमों को सरल बनाया जाना चाहिए।
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पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए ही परमिट का नियम बनाया गया है। कूड़ा प्रबंधन के लिए बने नियम को लेकर कुछ आपत्तियां आयी हैं। इसमें सुधार पर विचार किया जाएगा। परमिट के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
रविंद्र पुंडीर, वन क्षेत्राधिकारी बाड़ाहाट रेंज।