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शिक्षक पति की मौत के बाद पेंशन के लिए भटक रही भीमा देवी
Updated Tue, 27 Feb 2018 11:08 PM IST
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उत्तरकाशी। चिन्यालीसौड़ के टिपरी गांव की वयोवृद्ध भीमा देवी शिक्षक पति की मौत के बाद से पेंशन को भटक रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमों का हवाला देते हुए पेंशन स्वीकृत करने से इनकार कर रहे हैं।
बनगांव मॉडल स्कूल से वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त हुए टिपरी गांव के शिक्षक सबल सिंह रावत का वर्ष 2014 में निधन हो गया था। सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने सबल सिंह को पेंशन दी, लेकिन उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को पेंशन देने से इनकार कर दिया। वहीं विभाग सबल सिंह की पहली पत्नी को कागजातों में नॉमिनी बनाने की बात कहकर पेंशन देने से इनकार कर रहा है। सबल सिंह की पहली पत्नी का भी निधन हो गया है। ऐसे में पेंशन के लिए बुजुर्ग विभाग के चक्कर काटने को मजबूर है। वृद्धा ने ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अक्तूबर 2015 में हाईकोर्ट ने भी भीमा देवी के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद भी अधिकारियों ने पेंशन स्वीकृत नहीं की।
बुजुर्ग भीमा देवी के बेटे विरेंद्र रावत ने बताया कि उनकी मां की उम्र अब करीब सत्तर साल हो चुकी है। पिता की पहली पत्नी की मौत पिता से भी पहले ही हो चुकी थी और उन्हें भी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिला। इस आधार पर कोर्ट ने उनकी मां को पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया, लेकिन अधिकारी सुन नहीं रहे हैं। वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य का कहना है कि कर्मचारी के निधन के बाद उसके आश्रित को पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया जाता है। प्रकरण में शिक्षक ने अपने दस्तावेजों में पहली पत्नी को नॉमिनी बनाया है। इस वजह से किसी दूसरे को पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
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बनगांव मॉडल स्कूल से वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त हुए टिपरी गांव के शिक्षक सबल सिंह रावत का वर्ष 2014 में निधन हो गया था। सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने सबल सिंह को पेंशन दी, लेकिन उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को पेंशन देने से इनकार कर दिया। वहीं विभाग सबल सिंह की पहली पत्नी को कागजातों में नॉमिनी बनाने की बात कहकर पेंशन देने से इनकार कर रहा है। सबल सिंह की पहली पत्नी का भी निधन हो गया है। ऐसे में पेंशन के लिए बुजुर्ग विभाग के चक्कर काटने को मजबूर है। वृद्धा ने ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अक्तूबर 2015 में हाईकोर्ट ने भी भीमा देवी के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद भी अधिकारियों ने पेंशन स्वीकृत नहीं की।
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बुजुर्ग भीमा देवी के बेटे विरेंद्र रावत ने बताया कि उनकी मां की उम्र अब करीब सत्तर साल हो चुकी है। पिता की पहली पत्नी की मौत पिता से भी पहले ही हो चुकी थी और उन्हें भी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिला। इस आधार पर कोर्ट ने उनकी मां को पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया, लेकिन अधिकारी सुन नहीं रहे हैं। वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य का कहना है कि कर्मचारी के निधन के बाद उसके आश्रित को पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया जाता है। प्रकरण में शिक्षक ने अपने दस्तावेजों में पहली पत्नी को नॉमिनी बनाया है। इस वजह से किसी दूसरे को पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
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