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वर्षपर्यंत पर्यटन की संभावनाओं को पंख लगाने की जरूरत
Updated Sat, 10 Feb 2018 10:20 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगा भागीरथी ईको सेंसिटिव जोन के लिए कुल्लू मनाली की तर्ज पर रीवर राफ्टिंग, साहसिक पर्यटन एवं होम स्टे की योजना बने, तो यमुनोत्री, गंगोत्री की तीर्थयात्रा के अलावा गंगोत्री घाटी वर्षभर पर्यटकों से गुलजार रहेगी।
मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर, पर्यटन अधिकारी रितेश पटियाल की मानें तो बीते साल उनके यहां जनवरी से मार्च तक ही पौने सात लाख व वर्षभर में 39 लाख देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचे। चिन्यालीसाड़ में टिहरी बांध की झील, जोशियाड़ा एवं मनेरी की बैराज झील, जांगला से झाला तक गंगा भागीरथी के 14 किमी रोमांचक प्रवाह पथ के अलावा बार्सू गांव व भरनाला की झीलें जलक्रीड़ा की संभावनाओं की ओर इशारा करती हैं। इसके अलावा यमुनोत्री गंगोत्री की तीर्थयात्रा के साथ ही गंगा भागीरथी के उद्गम का धार्मिक आध्यात्मिक रुतबा और जाड़ों में मां गंगा के शीतकालीन पड़ाव मुखबा में गंगा के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की व्यवस्था हिमाचल से बेहतर परिणाम देने की ओर इशारा करती है।
होटल कारोबारी धराली के जयभगवान सिंह, महेश पंवार, हर्षिल के डा. नागेंद्र रावत का कहना है कि बिजली एवं दूरसंचार का मजबूत नेटवर्क न होने से पर्यटकों को ही नहीं होटल कारोबारी व सेब उत्पादकों को भी परेशानी हो रही है। पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट मानते हैं कि गांवों से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के लिए पलायन चिंताजनक है। डीएम डा. आशीष चौहान जोशियाड़ा बैराज की झील में जलक्रीड़ा के लिए ढांचागत सुविधाएं जुटाने की कोशिश में लगे हैं।
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मनाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर, पर्यटन अधिकारी रितेश पटियाल की मानें तो बीते साल उनके यहां जनवरी से मार्च तक ही पौने सात लाख व वर्षभर में 39 लाख देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचे। चिन्यालीसाड़ में टिहरी बांध की झील, जोशियाड़ा एवं मनेरी की बैराज झील, जांगला से झाला तक गंगा भागीरथी के 14 किमी रोमांचक प्रवाह पथ के अलावा बार्सू गांव व भरनाला की झीलें जलक्रीड़ा की संभावनाओं की ओर इशारा करती हैं। इसके अलावा यमुनोत्री गंगोत्री की तीर्थयात्रा के साथ ही गंगा भागीरथी के उद्गम का धार्मिक आध्यात्मिक रुतबा और जाड़ों में मां गंगा के शीतकालीन पड़ाव मुखबा में गंगा के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की व्यवस्था हिमाचल से बेहतर परिणाम देने की ओर इशारा करती है।
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होटल कारोबारी धराली के जयभगवान सिंह, महेश पंवार, हर्षिल के डा. नागेंद्र रावत का कहना है कि बिजली एवं दूरसंचार का मजबूत नेटवर्क न होने से पर्यटकों को ही नहीं होटल कारोबारी व सेब उत्पादकों को भी परेशानी हो रही है। पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट मानते हैं कि गांवों से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के लिए पलायन चिंताजनक है। डीएम डा. आशीष चौहान जोशियाड़ा बैराज की झील में जलक्रीड़ा के लिए ढांचागत सुविधाएं जुटाने की कोशिश में लगे हैं।
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