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25 साल में पूरा नहीं हो पाया हवाई अड्डे का निर्माण
Updated Sat, 02 Dec 2017 09:34 PM IST
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उत्तरकाशी। उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश बनाने के लिए सरकार कितनी गंभीर है इसकी नजीर चिन्यालीसौड़ के निर्माणाधीन हवाई अड्डे से आसानी से जानी जा सकती है, जिसका निर्माण भूमि अधिग्रहण के 25 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। ऐसे में हवाई पट्टी को जमीन देने वाले काश्तकार अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
वर्ष 1992-93 में अविभाजित उत्तर प्रदेश सरकार ने चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे का हवाई पट्टी के रूप में चिन्याली और नागणी गांव के काश्तकारों से 776 नाली जमीन क्रय कर 1165 मीटर लंबी और 23 मीटर चौड़ाई की हवाई पट्टी के निर्माण की शुरुआत की थी, लेकिन आजतक निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। अक्तूबर 2013 में सरकार ने ने चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी को 45.80 करोड़ रुपये की लागत से पट्टी को हवाई अड्डे के रूप में उच्चीकृत कर 18 महीनों में टर्मिनल भवन, एटीसी टावर, अपरीन, रनवे का डामरीकरण और ड्रेनेज व एप्रोच निर्माण कार्य यूपी निर्माण निगम की देहरादून यूनिट को सौंपा गया था। जिसमें अस्सी फीसदी कार्यों पूरा हो गया है, लेकिन 20 फीसदी कार्य चार साल से अधूरा पड़ा है। यूपी निर्माण निगम के जीएम पीके शर्मा ने बताया कि रनवे की जांच रिपोर्ट को लोक निर्माण निगम ने जांच के लिए लैब भेजा गया है। शीघ्र जांच रिपोर्ट आने के बाद निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
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वर्ष 1992-93 में अविभाजित उत्तर प्रदेश सरकार ने चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे का हवाई पट्टी के रूप में चिन्याली और नागणी गांव के काश्तकारों से 776 नाली जमीन क्रय कर 1165 मीटर लंबी और 23 मीटर चौड़ाई की हवाई पट्टी के निर्माण की शुरुआत की थी, लेकिन आजतक निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। अक्तूबर 2013 में सरकार ने ने चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी को 45.80 करोड़ रुपये की लागत से पट्टी को हवाई अड्डे के रूप में उच्चीकृत कर 18 महीनों में टर्मिनल भवन, एटीसी टावर, अपरीन, रनवे का डामरीकरण और ड्रेनेज व एप्रोच निर्माण कार्य यूपी निर्माण निगम की देहरादून यूनिट को सौंपा गया था। जिसमें अस्सी फीसदी कार्यों पूरा हो गया है, लेकिन 20 फीसदी कार्य चार साल से अधूरा पड़ा है। यूपी निर्माण निगम के जीएम पीके शर्मा ने बताया कि रनवे की जांच रिपोर्ट को लोक निर्माण निगम ने जांच के लिए लैब भेजा गया है। शीघ्र जांच रिपोर्ट आने के बाद निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
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