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मनुष्य के सात जन्मों के पाप हरती है नागणी देवी मां
Updated Thu, 28 Sep 2017 10:31 PM IST
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उत्तरकाशी। बालखिला पर्वत पर बसे नागणी देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
नागणी देवी मंदिर पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से लंबगांव मोटर मार्ग पर संकूर्णाधार तक 14 किमी वाहन से पहुंचा जा सकता है। यहां से पांच किमी की पैदल दूरी पर नागणी देवी मंदिर स्थित है। महर्षि बालखिल्य ने इसी स्थान पर तप कर भगवान त्रिलोकी नारायण की आराधना की थी। भगवान शिव ने महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिए थे। तभी से यह पर्वत बालखिला पर्वत के नाम से जाना जाता है। मां नागणी देवी के मंदिर का निर्माण वर्ष 1990 में ग्रामीणों ने कराया था। मंदिर के आसपास से कई प्राचीन मूर्तियां भी है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटड़ा का कहना है कि बालखिला पर्वत तीर्थस्थल के साथ ही पर्यटक स्थल भी है। सरकार को इस स्थल को पर्यटन और तीर्थाटन से जोड़ने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।
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नागणी देवी मंदिर पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से लंबगांव मोटर मार्ग पर संकूर्णाधार तक 14 किमी वाहन से पहुंचा जा सकता है। यहां से पांच किमी की पैदल दूरी पर नागणी देवी मंदिर स्थित है। महर्षि बालखिल्य ने इसी स्थान पर तप कर भगवान त्रिलोकी नारायण की आराधना की थी। भगवान शिव ने महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिए थे। तभी से यह पर्वत बालखिला पर्वत के नाम से जाना जाता है। मां नागणी देवी के मंदिर का निर्माण वर्ष 1990 में ग्रामीणों ने कराया था। मंदिर के आसपास से कई प्राचीन मूर्तियां भी है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटड़ा का कहना है कि बालखिला पर्वत तीर्थस्थल के साथ ही पर्यटक स्थल भी है। सरकार को इस स्थल को पर्यटन और तीर्थाटन से जोड़ने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।