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यमुनोत्री राजमार्ग 15वें दिन भी बंद, कई परेशानियों के बीच वैकल्पिक मार्ग पूरा होने की उम्मीद
Updated Tue, 26 Sep 2017 10:43 PM IST
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बड़कोट। करीब आधा माह बीतने के बाद भी यमुनोत्री हाईवे भूस्खलन की वजह से खुल नहीं पाया है। वहीं, ओजरी-डबरकोट स्लाइड जोन का असर अब वैकल्पिक मार्ग निर्माण कार्य में भी पड़ने लगा है, जिससे लोनिवि ने सोमवार से ही निर्माण कार्य बंद कर दिया है।
यमुनोत्री राजमार्ग के बंद होने के बाद प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग निर्माण का फैसला लिया गया था, जिसे ओजरी, तिर्खली व कुनसाला गांवों के बीच से बनना था। लेकिन ग्रामीणों के विरोध और निर्माणाधीन मार्ग के ऊपर भूस्खलन का असर पड़ने से प्रशासन के सामने कई दिक्कतें खड़ी हो गई थी। ऐसे में, एसडीएम मनुज गोयल और यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत के समझाने पर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में सहयोग देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य किसी निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि सभी 14 गांवों, यमुनोत्री धाम व यात्रियों की सुविधा के लिए कराया जा रहा है। जबकि ग्रामीणों ने आलू व चौलाई की फसल का समर्थन मूल्य घोषित करने, सौ दिन का रोजगार देने तथा क्षतिग्रस्त हुई कृषि भूमि का मुआवजा देने की मांग की है।
उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता जेपी रतूड़ी के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान हमारे कर्मचारी कई बार बोल्डर मलबे की चपेट में आने से बचे हैं, जबकि आगे का मार्ग और दुर्गम है, जिससे कार्य रोकने का फैसला लिया गया है।
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यमुनोत्री राजमार्ग के बंद होने के बाद प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्ग निर्माण का फैसला लिया गया था, जिसे ओजरी, तिर्खली व कुनसाला गांवों के बीच से बनना था। लेकिन ग्रामीणों के विरोध और निर्माणाधीन मार्ग के ऊपर भूस्खलन का असर पड़ने से प्रशासन के सामने कई दिक्कतें खड़ी हो गई थी। ऐसे में, एसडीएम मनुज गोयल और यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत के समझाने पर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में सहयोग देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य किसी निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि सभी 14 गांवों, यमुनोत्री धाम व यात्रियों की सुविधा के लिए कराया जा रहा है। जबकि ग्रामीणों ने आलू व चौलाई की फसल का समर्थन मूल्य घोषित करने, सौ दिन का रोजगार देने तथा क्षतिग्रस्त हुई कृषि भूमि का मुआवजा देने की मांग की है।
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उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता जेपी रतूड़ी के अनुसार निर्माण कार्य के दौरान हमारे कर्मचारी कई बार बोल्डर मलबे की चपेट में आने से बचे हैं, जबकि आगे का मार्ग और दुर्गम है, जिससे कार्य रोकने का फैसला लिया गया है।
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