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वाया सुवाखोली मार्ग पर बनेंगी दो सुरंगे, दून से उतरकाशी की दूरी होगी 56 किमी कम
Updated Mon, 25 Sep 2017 10:07 PM IST
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उत्तरकाशी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पहले से कहीं ज्यादा सुगम हो जाएगी। देहरादून से वाया सुवाखोली उत्तरकाशी तक दो सुरंगें बनाई जा रही हैं। ऐसे में जहां अभी तक राजधानी दून से उत्तरकाशी तक करीब 144 किमी का रास्ता नापने में पांच से छह घंटे लग जाते हैं, वहीं सुरंग बनने के बाद एक तरफ 56 किमी की दूरी घटने के साथ ही समय भी कम लगेगा। जिला प्रशासन ने प्रारंभिक सर्वे कराने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है।
चारधाम में से गंगोत्री और यमुनोत्री दो प्रमुख धाम उत्तरकाशी में स्थित हैं। जहां हर साल यात्रा सीजन में लाखों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। केंद्र सरकार ने ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए काम शुरू किया है, जिसको ध्यान में रखते हुए डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कुछ समय पहले देहरादून से उत्तरकाशी तक का सफर सुगम करने के लिए राष्ट्रीय मार्ग खंड लोनिवि बड़कोट से देहरादून से वाया सुवाखोली उत्तरकाशी मार्ग पर एक सर्वे कराया, जिसमें राष्ट्रीय खंड लोनिवि ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर सर्वे किया है। इसके तहत सहस्त्रधारा से करीब सात किमी आगे से प्रारंभ होकर भवान तक 11 किमी लंबाई की एक सुरंग तैयार की जानी है, जिसमें 37 किमी की दूरी कम होगी। जबकि दूसरी सुरंग भवान के सामने गदेरे के पार से शुरू होकर क्यार्दा से करीब तीन किमी आगे तक निकलेगी। यह सुरंग 10 किमी लंबाई की होगी, जिसमें मार्ग की करीब 19 किमी की दूरी कम होगी। दोनों सुरंगों का प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। जिसमें देहरादून से उत्तरकाशी तक की 56 किमी की दूरी कम होगी।
देहरादून के आईटी पार्क से वाया सुवाखोली होते हुए उत्तरकाशी तक की कुल दूरी वर्तमान में 144 किमी है। इस पर 56 किमी दूरी कम हो जाने के बाद 88 किमी दूरी रह जाएगी। सुरंग बनने के बाद 88 किमी की दूरी बमुश्किल से दो से तीन घंटे में पूरी हो जाएगी, जबकि अभी तक 144 किमी के पहाड़ी रास्ते को नापने के लिए दून से वाया सुवाखोली से उत्तरकाशी आने पर बस में पांच से छह घंटे तक लग जाते हैं। इससे यात्रा सीजन के दौरान आए दिन भूस्खलन से मलबा आने पर मार्ग बंद होने की शिकायत भी कम हो जाएगी। देहरादून से उत्तरकाशी आने-जाने के लिए यात्री ऋषिकेश से जाने के बजाए वाया सुवाखोली वाले रास्ते को ज्यादा प्रयोग में लाते हैं। डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों सुरंग के बनने के बाद 56 किमी की दूरी कम हो जाएगी। प्रारंभिक सर्वेक्षण कराने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। इसके बाद अगर वहां से हरी झंडी मिलती है, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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चारधाम में से गंगोत्री और यमुनोत्री दो प्रमुख धाम उत्तरकाशी में स्थित हैं। जहां हर साल यात्रा सीजन में लाखों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। केंद्र सरकार ने ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए काम शुरू किया है, जिसको ध्यान में रखते हुए डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कुछ समय पहले देहरादून से उत्तरकाशी तक का सफर सुगम करने के लिए राष्ट्रीय मार्ग खंड लोनिवि बड़कोट से देहरादून से वाया सुवाखोली उत्तरकाशी मार्ग पर एक सर्वे कराया, जिसमें राष्ट्रीय खंड लोनिवि ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर सर्वे किया है। इसके तहत सहस्त्रधारा से करीब सात किमी आगे से प्रारंभ होकर भवान तक 11 किमी लंबाई की एक सुरंग तैयार की जानी है, जिसमें 37 किमी की दूरी कम होगी। जबकि दूसरी सुरंग भवान के सामने गदेरे के पार से शुरू होकर क्यार्दा से करीब तीन किमी आगे तक निकलेगी। यह सुरंग 10 किमी लंबाई की होगी, जिसमें मार्ग की करीब 19 किमी की दूरी कम होगी। दोनों सुरंगों का प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। जिसमें देहरादून से उत्तरकाशी तक की 56 किमी की दूरी कम होगी।
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देहरादून के आईटी पार्क से वाया सुवाखोली होते हुए उत्तरकाशी तक की कुल दूरी वर्तमान में 144 किमी है। इस पर 56 किमी दूरी कम हो जाने के बाद 88 किमी दूरी रह जाएगी। सुरंग बनने के बाद 88 किमी की दूरी बमुश्किल से दो से तीन घंटे में पूरी हो जाएगी, जबकि अभी तक 144 किमी के पहाड़ी रास्ते को नापने के लिए दून से वाया सुवाखोली से उत्तरकाशी आने पर बस में पांच से छह घंटे तक लग जाते हैं। इससे यात्रा सीजन के दौरान आए दिन भूस्खलन से मलबा आने पर मार्ग बंद होने की शिकायत भी कम हो जाएगी। देहरादून से उत्तरकाशी आने-जाने के लिए यात्री ऋषिकेश से जाने के बजाए वाया सुवाखोली वाले रास्ते को ज्यादा प्रयोग में लाते हैं। डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों सुरंग के बनने के बाद 56 किमी की दूरी कम हो जाएगी। प्रारंभिक सर्वेक्षण कराने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। इसके बाद अगर वहां से हरी झंडी मिलती है, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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