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नवरात्र के पहले दिन माता के दरबार में रही श्रद्धालुओं की भीड़
Updated Thu, 21 Sep 2017 10:39 PM IST
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उत्तरकाशी। नवरात्र आरंभ होते ही जनपद के सभी देवी मंदिरों में सजावट व पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। जिले के बाडाहाट शहर के शक्ति मंदिर, कुटेटी देवी, महिषासुरमर्दिनी, अन्नपूर्णा, दुर्गा आदि मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।
धनारी क्षेत्र के बालखिला पर्वत पर स्थित नांगणी देवी मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए पांच किमी का ट्रैक है। महर्षि बालखिल्य ने इसी स्थान पर कठोर तप किया था, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि सदियों तक लोग इस पर्वत को उनके नाम से जानेंगे। इसी पर्वत पर ग्रामीणों ने वर्ष 1990 में मंदिर बनाया था।
एरावत पर्वत पर स्थित कुटेटी देवी मंदिर का भी बहुत महत्व है। गंगोत्री की तीर्थ यात्रा में कोटा के एक राजा का कीमती थैला खो गया था। निराश राजा उत्तरकाशी लौट आए और विश्वनाथ मंदिर में थैला मिलने के लिए प्रार्थना की। जिसके बाद वह थैला मंदिर के एक पुजारी ने राजा को ढूंढ कर दे दिया। इससे प्रसन्न होकर राजा ने अपनी बेटी की शादी स्थानीय लड़के से कर दी। हालांकि, इससे राजकुमारी दुखी हो गई क्योंकि उसे कुल देवी कुटेती देवी से दूर होना पड़ा था। राजकुमारी और उसके पति ने इसका समाधान पाने के लिए देवी से प्रार्थना की। जिसके बाद, देवी ने सपने में प्रकट होकर कहा कि वे उन्हें अपने खेत में एक पत्थर के स्वरूप में पा सकते हैं। जिसके बाद दोनों को खेत से तीन बहुमूल्य पत्थर मिले। कुटेती देवी मंदिर उसी स्थान पर बनाया गया है, जहां ये पत्थर मिले थे।
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धनारी क्षेत्र के बालखिला पर्वत पर स्थित नांगणी देवी मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए पांच किमी का ट्रैक है। महर्षि बालखिल्य ने इसी स्थान पर कठोर तप किया था, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि सदियों तक लोग इस पर्वत को उनके नाम से जानेंगे। इसी पर्वत पर ग्रामीणों ने वर्ष 1990 में मंदिर बनाया था।
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एरावत पर्वत पर स्थित कुटेटी देवी मंदिर का भी बहुत महत्व है। गंगोत्री की तीर्थ यात्रा में कोटा के एक राजा का कीमती थैला खो गया था। निराश राजा उत्तरकाशी लौट आए और विश्वनाथ मंदिर में थैला मिलने के लिए प्रार्थना की। जिसके बाद वह थैला मंदिर के एक पुजारी ने राजा को ढूंढ कर दे दिया। इससे प्रसन्न होकर राजा ने अपनी बेटी की शादी स्थानीय लड़के से कर दी। हालांकि, इससे राजकुमारी दुखी हो गई क्योंकि उसे कुल देवी कुटेती देवी से दूर होना पड़ा था। राजकुमारी और उसके पति ने इसका समाधान पाने के लिए देवी से प्रार्थना की। जिसके बाद, देवी ने सपने में प्रकट होकर कहा कि वे उन्हें अपने खेत में एक पत्थर के स्वरूप में पा सकते हैं। जिसके बाद दोनों को खेत से तीन बहुमूल्य पत्थर मिले। कुटेती देवी मंदिर उसी स्थान पर बनाया गया है, जहां ये पत्थर मिले थे।
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