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रामलीला मंच में अवतरित हुईं जिले की 17 देवीयां
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:39 PM IST
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उत्तरकाशी। रामलीलाओं में जहां पहले पुरुष ही महिलाओं का किरदार भी निभाते थे, वहीं उत्तरकाशी में अब महिला किरदारों की भूमिका महिलाएं ही निभाती हैं। आदर्श रामलीला ने यह प्रयोग वर्ष 2011 में सबसे पहले किया था। यही वजह है कि आज भी रामलीला का मंचन देखने के लिए लोगों की खूब भीड़ उमड़ती है।
समाज की रुढ़ीवादी परंपराओं को तोड़कर रामलीला में भूमिका निभाकर जिले की युवतियों ने नई मिसाल कायम की है। रामलीला में वर्ष 2011 में सबसे पहले पांच युवतियों ने महिला पात्रों की भूमिका निभाई थी, जो आज बढ़कर 17 हो गई है। रामलीला में जनपद के सीमांत गांवों की पांच युवतियों को पहली बार मंच में स्थान दिया गया था। उनकी इस पहल का ही नतीजा है कि आज रामलीला में 17 महिला पात्र अभिनय कर रही हैं। दंदालका गांव की ललीता पंवार (सीता), भंकोली गांव की वंदना रावत (कैकेयी), धनारी गांव की मोनिका नेगी (कौशल्या), कोटी लदाड़ी गांव की संगीता चौहान (सुमित्रा) की भूमिका निभा रही हैं। इनका कहना है कि मंच ने हमें समाज में एक अलग पहचान दिलाने के साथ ही रुढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ने का भी हौसला दिया है। हमें उम्मीद है कि इससे प्रेरणा लेकर अन्य युवतियां भी अपनी पसंद के कार्यों कर सकेंगी।
कोट
समिति अपने मंच से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ व महिला सशक्तिकरण का संदेश देने का प्रयास कर रही है। महिला पात्रों के माता-पिता को समिति की ओर से सम्मानित किया जा रहा है, ताकी अन्य लोग भी अपनी बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला दें। - रमेश चौहान, समिति के अध्यक्ष
समाज की रुढ़ीवादी परंपराओं को तोड़कर रामलीला में भूमिका निभाकर जिले की युवतियों ने नई मिसाल कायम की है। रामलीला में वर्ष 2011 में सबसे पहले पांच युवतियों ने महिला पात्रों की भूमिका निभाई थी, जो आज बढ़कर 17 हो गई है। रामलीला में जनपद के सीमांत गांवों की पांच युवतियों को पहली बार मंच में स्थान दिया गया था। उनकी इस पहल का ही नतीजा है कि आज रामलीला में 17 महिला पात्र अभिनय कर रही हैं। दंदालका गांव की ललीता पंवार (सीता), भंकोली गांव की वंदना रावत (कैकेयी), धनारी गांव की मोनिका नेगी (कौशल्या), कोटी लदाड़ी गांव की संगीता चौहान (सुमित्रा) की भूमिका निभा रही हैं। इनका कहना है कि मंच ने हमें समाज में एक अलग पहचान दिलाने के साथ ही रुढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ने का भी हौसला दिया है। हमें उम्मीद है कि इससे प्रेरणा लेकर अन्य युवतियां भी अपनी पसंद के कार्यों कर सकेंगी।
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समिति अपने मंच से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ व महिला सशक्तिकरण का संदेश देने का प्रयास कर रही है। महिला पात्रों के माता-पिता को समिति की ओर से सम्मानित किया जा रहा है, ताकी अन्य लोग भी अपनी बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला दें। - रमेश चौहान, समिति के अध्यक्ष
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