{"_id":"59bea0264f1c1b24688b5074","slug":"15056650921437-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसीड संस्था का नया कारनामा, गौशाला बनाने के नाम पर 37 लाख की गड़बड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसीड संस्था का नया कारनामा, गौशाला बनाने के नाम पर 37 लाख की गड़बड़ी
Updated Sun, 17 Sep 2017 09:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुरोला। विश्व बैंक पोषित उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना की सहयोगी संस्था एसीड की ओर से अब गोशालाओं के निर्माण में भी धांधली सामने आई है। आरटीआई में खुलासा हुआ है कि परियोजना के तहत एसीड संस्था को 2015-16 में 40 और 2016-17 में 63 गोशालाओं का निर्माण करना था, लेकिन संस्था ने 2015-16 में एक भी गोशाला नहीं बनाई। 2016-17 में 37 लाख की लागत से बनाई गई गोशालाओं में कई तरह की गड़बड़ी हुई है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद जलागम निदेशालय ने टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता हुकुम सिंह की ओर से मांगी गई सूचना के मुताबिक मोरी, पुरोला व नौगांव ब्लॉक के 107 राजस्व गांव में संचालित परियोजना के तहत संस्था ने 2016-17 में करीब 37 लाख की लागत से 63 गोशालाओं का निर्माण दिखाया है। गोशालाओं के निर्माण की सामग्री हल्द्वानी की एक कंपनी द्वारा सप्लाई की जा रही है, जबकि यही सामग्री देहरादून व ऋषिकेश से भी मंगाई जा सकती थी। वहीं गोशालाएं भी अनुबंध के मानकों के अनुुुरूप नहीं बनाई जा रही हैं। इनके निर्माण में भी धनराशि के अलग-अलग मानक दिखाए गए हैं। सभी गोशालाओं की लंबाई, ऊंचाई और चौड़ाई एक होने के बावजूद, कहीं पर लागत 60 हजार तो कहीं 53 हजार रुपये दर्ज की गई है। परियोजना में विश्व बैंक द्वारा ऋण दिया गया है, जो कि 20 वर्ष बाद सात प्रतिशत ब्याज सहित लौटाया जाना है। उधर, जलागम के पर्यवेक्षक विजय पटवाल का कहना कि संस्था के सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
आरटीआई कार्यकर्ता हुकुम सिंह की ओर से मांगी गई सूचना के मुताबिक मोरी, पुरोला व नौगांव ब्लॉक के 107 राजस्व गांव में संचालित परियोजना के तहत संस्था ने 2016-17 में करीब 37 लाख की लागत से 63 गोशालाओं का निर्माण दिखाया है। गोशालाओं के निर्माण की सामग्री हल्द्वानी की एक कंपनी द्वारा सप्लाई की जा रही है, जबकि यही सामग्री देहरादून व ऋषिकेश से भी मंगाई जा सकती थी। वहीं गोशालाएं भी अनुबंध के मानकों के अनुुुरूप नहीं बनाई जा रही हैं। इनके निर्माण में भी धनराशि के अलग-अलग मानक दिखाए गए हैं। सभी गोशालाओं की लंबाई, ऊंचाई और चौड़ाई एक होने के बावजूद, कहीं पर लागत 60 हजार तो कहीं 53 हजार रुपये दर्ज की गई है। परियोजना में विश्व बैंक द्वारा ऋण दिया गया है, जो कि 20 वर्ष बाद सात प्रतिशत ब्याज सहित लौटाया जाना है। उधर, जलागम के पर्यवेक्षक विजय पटवाल का कहना कि संस्था के सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी, जिसके आधार पर ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन