{"_id":"59b8102d4f1c1bf77f8b6515","slug":"15052350123-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उतरकाशी ब्रैंड से बिकेगा हर्षिल का सेब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उतरकाशी ब्रैंड से बिकेगा हर्षिल का सेब
Updated Tue, 12 Sep 2017 10:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। इस बार हर्षिल के सेब को अपनी पहचान के लिए हिमाचल की पेटियों का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नाबार्ड और संकल्प सामाजिक संस्था के सहयोग से काश्तकारों को उत्तरकाशी ब्रांड की पेटियां दी गई हैं, जिससे अब जनपद का सेब यहीं के नाम से पहचाना जाएगा। अभी तक हिमाचल और उत्तराखंड नाम की पेटियों पर सेब बेचे जाते थे, जिससे काश्तकारों को बाजार में अलग पहचान नहीं मिल रही थी।
संकल्प सामाजिक संस्था की सचिव, शांति परमार ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में एक हजार पेटियां उपला टकनौर एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े करीब 200 काश्तकारों को दी जाएगी। हर किसान को 50-55 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से दी जा रही है। मांग बढ़ने पर पेटियों की संख्या भी बढ़ा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यूटीएपीसी नाबार्ड और काश्तकारों के सहयोग से बनी कंपनी है, जिसमें हर किसान का शेयर है। कंपनी के माध्यम से किसानों को उनकी जरूरत का हर उत्पाद 10 प्रतिशत की छूट में दिया जाता है। इस कमाई का 10 प्रतिशत किसानों व कंपनी के खाते में आधा-आधा जाता है। इसी कमाई से ये पेटियां भी बनाई गई हैं, जिससे जनपद के सेब की बाजार में अपनी अलग पहचान बनेगी। जल्द ही जनपद के अन्य सेब उत्पादकों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
विज्ञापन
संकल्प सामाजिक संस्था की सचिव, शांति परमार ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में एक हजार पेटियां उपला टकनौर एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े करीब 200 काश्तकारों को दी जाएगी। हर किसान को 50-55 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से दी जा रही है। मांग बढ़ने पर पेटियों की संख्या भी बढ़ा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यूटीएपीसी नाबार्ड और काश्तकारों के सहयोग से बनी कंपनी है, जिसमें हर किसान का शेयर है। कंपनी के माध्यम से किसानों को उनकी जरूरत का हर उत्पाद 10 प्रतिशत की छूट में दिया जाता है। इस कमाई का 10 प्रतिशत किसानों व कंपनी के खाते में आधा-आधा जाता है। इसी कमाई से ये पेटियां भी बनाई गई हैं, जिससे जनपद के सेब की बाजार में अपनी अलग पहचान बनेगी। जल्द ही जनपद के अन्य सेब उत्पादकों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
विज्ञापन