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भद्रकाली मां के मेले में उमड़ रही ग्रामीणों की भीड़
Updated Sun, 10 Sep 2017 10:11 PM IST
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नौगांव (उत्तरकाशी)। डेढ़ सप्ताह से गांव भ्रमण पर निकली मां भद्रकाली की डोली को सुनारा से सौंदाड़ी गांव के लिए विदा किया गया। महिलाओं ने विदाई गीत गाकर अपनी आराध्य देवी को दूसरे गांव के लिए विदा किया।
भादों माह में सुनारा गांव में भद्रकाली के नाम से मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में लोग बड़ी संख्या में भागीदारी कर अपनी आराध्य देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। मेला तीन साल में एक बार मनाया जाता है। मेले में विशेष कर गांव से दूर ब्याही बेटियां मन्नत मांगने के लिए मायके पहुंचती हैं और आराध्य देवी को धूप, श्रीफल, चुनरी, बिंदी आदि शृंगार चढ़ाकर आशीर्वाद लेती हैं। मेले में लोग रातभर हारूल, तांदी नृत्य, छोपती आदि नाच गाना कर रतजगा करते हैं। अपराह्न तीन बजे विशेष पूजा होती है और देवी अपने पश्वा पर अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती है। पौंटी, मोल्डा, खांसी, पलेठा, सुनारा, सौंदाड़ी, हुडोली, पाणीगांव, नैलाड़ी, कंताड़ी, डंडाल गांव, विणाई आदि गांवों की आराध्य देवी मां भद्रकाली भादों माह में गांव भ्रमण पर रहती है। प्रधान अजब सिंह रावत बताते हैं कि अब मेला दो वर्ष बाद 2019 में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेले में सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्रों में कार्य करने वाले कर्मचारी भी छुट्टी लेकर गांव पहुंचते हैं।
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भादों माह में सुनारा गांव में भद्रकाली के नाम से मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में लोग बड़ी संख्या में भागीदारी कर अपनी आराध्य देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। मेला तीन साल में एक बार मनाया जाता है। मेले में विशेष कर गांव से दूर ब्याही बेटियां मन्नत मांगने के लिए मायके पहुंचती हैं और आराध्य देवी को धूप, श्रीफल, चुनरी, बिंदी आदि शृंगार चढ़ाकर आशीर्वाद लेती हैं। मेले में लोग रातभर हारूल, तांदी नृत्य, छोपती आदि नाच गाना कर रतजगा करते हैं। अपराह्न तीन बजे विशेष पूजा होती है और देवी अपने पश्वा पर अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती है। पौंटी, मोल्डा, खांसी, पलेठा, सुनारा, सौंदाड़ी, हुडोली, पाणीगांव, नैलाड़ी, कंताड़ी, डंडाल गांव, विणाई आदि गांवों की आराध्य देवी मां भद्रकाली भादों माह में गांव भ्रमण पर रहती है। प्रधान अजब सिंह रावत बताते हैं कि अब मेला दो वर्ष बाद 2019 में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेले में सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्रों में कार्य करने वाले कर्मचारी भी छुट्टी लेकर गांव पहुंचते हैं।
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