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डोडीताल के लिए रवाना हुआ महाराष्ट्र का दल
Updated Mon, 21 Aug 2017 10:23 PM IST
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उत्तरकाशी। डोडीताल के गणेश मंदिर के लिए महाराष्ट्र के चार श्रद्धालु रवाना हुए। श्रद्धालु 25 अगस्त को गणेश महोत्सव के दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
सोमवार को श्रद्धालुओं ने हनुमान मंदिर में विधिविधान से पूजा-अर्चना की। उसके बाद जिलाधिकारी डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, एसपी ददनपाल और पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा ने संयुक्त रूप से श्रद्धालुओं को डोडीताल के लिए रवाना किया। प. राधेश्याम खंडूड़ी ने बताया कि स्कंदपुराण के अनुसार डोडीताल में माता पार्वती ने भगवान की उत्पत्ति की थी। यहां पर गणेश भगवान ने भगवान शिव को माता पार्वती के कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया, जिससे भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था। माता पार्वती के रौद्ररूप धारण करने पर भगवान शिव ने गणेश के धड़ में हाथी का सिर लगाया था। तभी से यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है और इस स्थान पर गजवक्त्रेश्वर मंदिर का निर्माण हुआ। महाराष्ट्र से आए श्रद्धालु रोहित तक्ष, विजय, जनार्द्धन डे वागमरे और रुद्राणी ने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई में गणपति का विशेष महत्व है। इस मौके पर कमल सिंह, गणेश पंवार, शिवराम, बलदेव राणा, गिरीश भट्ट आदि मौजूद थे।
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सोमवार को श्रद्धालुओं ने हनुमान मंदिर में विधिविधान से पूजा-अर्चना की। उसके बाद जिलाधिकारी डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, एसपी ददनपाल और पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा ने संयुक्त रूप से श्रद्धालुओं को डोडीताल के लिए रवाना किया। प. राधेश्याम खंडूड़ी ने बताया कि स्कंदपुराण के अनुसार डोडीताल में माता पार्वती ने भगवान की उत्पत्ति की थी। यहां पर गणेश भगवान ने भगवान शिव को माता पार्वती के कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया, जिससे भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था। माता पार्वती के रौद्ररूप धारण करने पर भगवान शिव ने गणेश के धड़ में हाथी का सिर लगाया था। तभी से यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है और इस स्थान पर गजवक्त्रेश्वर मंदिर का निर्माण हुआ। महाराष्ट्र से आए श्रद्धालु रोहित तक्ष, विजय, जनार्द्धन डे वागमरे और रुद्राणी ने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई में गणपति का विशेष महत्व है। इस मौके पर कमल सिंह, गणेश पंवार, शिवराम, बलदेव राणा, गिरीश भट्ट आदि मौजूद थे।
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