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आपदा के मारे, दूसरों के सहारे

Sat, 22 Jun 2013 07:50 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Sat, 22 Jun 2013 07:50 PM IST
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uttarakhand heavy rain disaster

आपदा में घायल और कराहती केदार, गंगोत्री और मंदाकिनी घाटी के ग्रामीणों की मदद सराहनीय आपदा के मारे उत्तराखंड के बारे में नकारात्मक खबरें सुनकर कलेजा फटा जा रहा है। बेशक यहां की सरकार, शासन, प्रशासन नाकारे हों।

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चंद तीर्थयात्रियों से बदसलूकी, ठगी और लूट की खबरें सुनने में आ रही हैं। आप उन्हें जरूर कोसें, लेकिन यकीन मानिए बुरे मेजबान हम नहीं हैं। अतिथि देवो भव हमारी परंपरा है। यह हमारी घुट्टी में है।  शास्त्रों में कहा गया है कि दान तभी फलीभूत होता है जब एक हाथ से दान दिया गया हो तो दूसरे हाथ को भी पता न हो। हम यात्रियों के लिए क्या कर रहे हैं कहना भी नहीं चाहते लेकिन जो यात्री यहां से जा रहे हैं उनका क्या कहना है जरा यह भी तो जानिए। 
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उत्तरकाशी खुद आपदाग्रस्त है। उसके गांव गणेशपुर के लोग रोज लगभग तीस सौ यात्रियों को खाना बनाकर खिला रहे हैं। घायल यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। यहां से गुजरने वाले यात्री कह रहे हैं उनके लिए तो भगवान ये गांव वाले ही हैं। सैकड़ों यात्रियों को सुक्की गांव ने शरण दे रखी थी। 
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गंगोरी व बाड़ाहाट के युवा पैदल रास्ते में न केवल यात्रियों को पानी पिला रहे हैं, बल्कि बुजुर्ग यात्रियों को उत्तरकाशी तक लाने में भी मदद भी कर रहे हैं। यहां सेवा ग्रहण करने वाली गुजरात की नानू बेन और लुंबिनी नेपाल निवासी फूलमती कुरमी बताती है कि यदि आसपास गांव नहीं होते तो शायद अब तक जान चली जाती। हमारे लिए तो गांव वाले भगवान से बढ़कर हैं।

आपदा प्रभावितों की मदद के लिए गुप्तकाशी, रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा, गुलाबराय समेत कई स्थानों पर स्थानीय लोगों, व्यापारियों, कर्मचारियों द्वारा लंगर की व्यवस्था की गई है। शनिवार को रुद्रप्रयाग मुख्यालय में डीडी मोटर्स द्वारा आपदा प्रभावितों के लिए भंडारा लगाकर खाना खिलाया गया।


इसके अलावा भी लोग अपने-अपने स्तर से मदद में जुटे हुए हैं। गुप्तकाशी में महिलाएं अपने घरों में रोटी-दाल बनाकर तीर्थ यात्रियों को खिला रही हैं। यह सब तब है जब इस स्थान पर राशन और ईधन खत्म हो रहा है। इन्हें खुद मदद की दरकार है।

(देहरादून से कुमार अतुल के साथ उत्तरकाशी से पंकज गुप्ता और रुद्र प्रयाग से संदीप थपलियाल की रिपोर्ट)

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