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आपदा के बाद आया पहचान का संकट

Fri, 21 Jun 2013 04:11 PM IST
कर्णप्रयाग/ब्यूरो
कर्णप्रयाग/ब्यूरो Updated Fri, 21 Jun 2013 04:11 PM IST
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uttarakhand heavy rain disaster

तन पर बस पहने कपड़े ही शेष रह गए हैं। बर्तन, पैसा, भूमि संबंधी दस्तावेज, राशन कार्ड, फोटो पहचान पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र सहित एक घर के लिए जो चीजें लोगों ने मेहनत की पाई-पाई से संजोई थी, वह आज पिंडर नदी में समा चुकी थी।

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यह बानगी नारायणबगड़ ब्लाक मुख्यालय की है। जहां 26 परिवार पिंडर नदी के उफान में अपना सब कुछ गंवा चुके हैं। जीजीआईसी राहत कैंप में शरण लिये आपदा प्रभावित उर्मिला मेहरा बताती है कि उनके और बच्चों के सभी शैक्षिक प्रमाण पत्र सहित अन्य जरूरी दस्तावेज सामान के साथ बह गए हैं।
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यहां तक कि अपनी पहचान बताने के लिए भी उनके पास कुछ नहीं बचा है। बीरेंद्र सिंह नेगी कहते हैं कि पिंडर नदी ने रोजगार और घर ही नहीं, बल्कि पहचान भी छीन ली है। स्थिति यह है कि प्रभावितों के जेब में जितना कुछ रुपये-पैसा बचा था, बस अब वही उनके पास रह गया है।
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कुछ जमा पूंजी है भी वह बैंक और पोस्ट ऑफिस में है, लेकिन न संबंधित पास बुक बची है न अन्य दस्तावेज। अन्य प्रभावितों की हालत भी ऐसी ही है। इन सबके बीच सबसे अधिक स्कूली बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

बच्चों के प्रमाण पत्र आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। ग्रामीण संजय सिंह रावत, विजेंद्र सिंह, बृज भूषण सिंह का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाया मकान तो टूट गया है। साथ ही बच्चों के शैक्षिक प्रमाण पत्र भी नहीं बचे हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य का क्या होगा, समझ नहीं आ रहा है।

देवाल क्षेत्र प्रभावित
लिंगणी ग्राम पंचायत के ऊंणीबगड तोक के दस अनुसूचित परिवारों सहित काठिंग धौड के दलवीर राम, विक्रम राम,सोडिंग के कुंदन सिंह, सिलंगी के मंगल सिंह, सिमार के पांच परिवार, मोहनी गाड़ के भवान राम, बीरत राम, महेंद्र राम के आवासीय मकानों में मलबा घुसने से उन्होंने अन्यत्र शरण ली हुई हैं।


जबकि हरमल के गोपाल सिंह का मकान बह चुका है। क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन और भू-धसाव से सोडिंग, ऊंणीबगउ़, ओडर, लिंगणी, हरमल सहित कई गांवों में काश्तकारों की सैकड़ों नाली कृषि भूमि अब तक स्वाह हो चुकी है।

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