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उत्तराखंड त्रासदी: एक गांव की सारी महिलाएं हो गईं विधवा
गिरीश रंजन तिवारी
Updated Sat, 22 Jun 2013 08:43 AM IST
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केदारनाथ मंदिर में पूजा-पाठ कराने वाले पंडों के ऊखीमठ के निकट स्थित गांव बमणी की लगभग सारी औरतें केदारनाथ हादसे में विधवा हो गई हैं।
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यह दावा केदारनाथ हादसे में बाल-बाल बची नैनीताल निवासी बसंती देवी और वैजयंती जोशी ने किया है। चार दिन बमणी गांव के निकट फंसे रहने के बाद ये दोनों महिलाएं शुक्रवार को नैनीताल पहुंचीं।
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तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
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वैजयंती यहां पिटरिया में रहती हैं। उनके पति जगदीश चंद्र जोशी पुलिस में थे। बसंती का पैतृक गांव बागेश्वर में है। उन्होंने बताया कि वे रिश्तेदारों के साथ दस सदस्यीय दल में 14 जून को केदारनाथ में थीं। वापसी में जब ये लोग गौरीकुंड पहुंचे तो केदारनाथ में हादसा हो गया।
बसंती और वैजयंती ने बताया कि वे गौरीकुंड में नीचे को भागे। पीछे-पीछे मलबा और आपदा भी आती रही। हालांकि उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन ऊखीमठ पहुंचते-पहुंचते सारे मार्ग बंद हो गए और चार दिन तक वे निकटवर्ती गांव में फंसे रहे, जहां कुछ परिचितों ने उन्हें शरण दी।
तस्वीरों में: कुदरत के कहर के बाद बचाव की कोशिश
यहां पता चला कि बगल के बमणी गांव के पुरुष केदारनाथ में पूजापाठ और कर्मकांड कराते हैं। इस सिलसिले में गांव के सारे पुरुष अपने पुत्रों सहित केदारनाथ में थे।
गांव में केवल महिलाएं और लड़कियां थीं। वैजयंती ने बताया कि सारे पंडे हादसे में मारे गए और पूरे गांव की महिलाएं विधवा हो गईं। इससे पूरे इलाके में हाहाकार मचा हुआ है।
उन्होंने बताया कि हादसे के दौरान गौरीकुंड में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और केदारनाथ का पूरा इलाका गुलजार था। हादसे के तीसरे दिन जब हेलीकाप्टर राहत के लिए आए तो लोगों ने पायलटों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए अपने शरीर के कपड़े उतारकर मशाल की तरह जलाया।
बसंती ने बताया कि वह पांच वर्ष पूर्व भी केदारनाथ गई थीं। तब से अब तक वहां कई नए और भारी निर्माण हो चुके हैं। हादसे से बाल-बाल बचने के बावजूद इन 66 वर्षीय महिलाओं का न हौसला टूटा है न आस्था ही डिगी। वे अगले वर्ष फिर केदारनाथ जाने की इच्छा रखती हैं।