{"_id":"6978fa505f583bdd6d042499","slug":"udham-singh-nagar-on-alert-over-nipah-virus-health-department-on-alert-rudrapur-news-c-242-1-rdp1024-136321-2026-01-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: निपाह वायरस को लेकर ऊधमसिंह नगर में अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग सतर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: निपाह वायरस को लेकर ऊधमसिंह नगर में अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग सतर्क
विज्ञापन
रुद्रपुर। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के हालिया मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिले में अलर्ट जारी करते हुए सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं। राहत की बात यह है कि उत्तराखंड या ऊधमसिंह नगर में अब तक निपाह वायरस का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। बीते दिनों पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के पांच पुष्ट मामले सामने आए हैं। इनमें कुछ स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित पाए गए हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए 100 से अधिक लोगों को क्वारंटाइन और निगरानी में रखा गया है।
-- --
डब्ल्यूएचओ के अनुसार उच्च जोखिम वाली बीमारी
निपाह वायरस को वर्ल्ड हेल्थ ऑग्रेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से उच्च जोखिम वाली जूनोटिक बीमारी माना गया है। यह वायरस जानवरों से इंसानों में और इंसान-से-इंसान भी फैल सकता है, विशेषकर नजदीकी संपर्क और स्वास्थ्य देखभाल के दौरान। फिलहाल इसका कोई सुनिश्चित टीका या विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए समय रहते पहचान और रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय माने जा रहे हैं।
-- -
मरीजों की पहचान व रिपोर्टिंग के सख्त निर्देश
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया सभी सरकारीव निजी अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिया गया है कि तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, उल्टी या एन्सेफलाइटिस (दिमागी सूजन) जैसे लक्षण वाले मरीजों की तुरंत पहचान और रिपोर्टिंग की जाए। जरूरत पड़ने पर मरीज को आइसोलेट कर सैंपल राज्य व राष्ट्रीय रेफरल लैब भेजा जाए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में निगरानी और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था सख्ती से लागू की जाए। यह कदम पूरी तरह एहतियाती और रोकथाम के उद्देश्य से उठाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डब्ल्यूएचओ के अनुसार उच्च जोखिम वाली बीमारी
निपाह वायरस को वर्ल्ड हेल्थ ऑग्रेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से उच्च जोखिम वाली जूनोटिक बीमारी माना गया है। यह वायरस जानवरों से इंसानों में और इंसान-से-इंसान भी फैल सकता है, विशेषकर नजदीकी संपर्क और स्वास्थ्य देखभाल के दौरान। फिलहाल इसका कोई सुनिश्चित टीका या विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए समय रहते पहचान और रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय माने जा रहे हैं।
विज्ञापन
मरीजों की पहचान व रिपोर्टिंग के सख्त निर्देश
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया सभी सरकारीव निजी अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिया गया है कि तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, उल्टी या एन्सेफलाइटिस (दिमागी सूजन) जैसे लक्षण वाले मरीजों की तुरंत पहचान और रिपोर्टिंग की जाए। जरूरत पड़ने पर मरीज को आइसोलेट कर सैंपल राज्य व राष्ट्रीय रेफरल लैब भेजा जाए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में निगरानी और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था सख्ती से लागू की जाए। यह कदम पूरी तरह एहतियाती और रोकथाम के उद्देश्य से उठाया गया है।
विज्ञापन