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Udham Singh Nagar News: चंदन की सुगंध से महकेगा तराई
Thu, 22 Jun 2023 12:29 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 22 Jun 2023 12:29 AM IST
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रुद्रपुर। तराई में पहली बार लोग श्वेत चंदन के पौधे लगाएंगे। चंदन का पेड़ उगाने के लिए जिले को जल्द 3550 पौधे मिलने वाले हैं। भेषज विकास इकाई की ओर से चंदन के पेड़ लगाने वाले इच्छुक किसानों से आवेदन मांग लिए गए हैं। जिले के बाजपुर, काशीपुर और दिनेशपुर के 115 किसानों को बरसात के समय चंदन के निशुल्क पौधे बांटे जाएंगे।
चंदन की खेती के लिए कर्नाटक काफी प्रसिद्ध है। यहां से चंदन की लकड़ियां विभिन्न प्रदेशों में सप्लाई की जाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भी कई जगह चंदन की खेती होती है। भेषज विकास इकाई के जिला समन्वयक एसके वाजपेयी ने बताया कि जिले में बीते वर्ष सर्पगंधा, सतावर जड़ी-बूटियां किसानों को बांटी गई थीं लेकिन किसानों को इससे खास लाभ नहीं मिला। इस वजह से किसानों को अब श्वेत चंदन की खेती के लिए प्रेरित किया गया है। बताया कि किसान डेढ़ बीघा खेतों की मेड़ में चंदन के पेड़ लगाएंगे। 12 साल में चंदन का पेड़ तैयार हागा। इसके बाद इसकी लकड़ियां उपयोग में आ सकेंगी।
श्वेत चंदन का पूजा के साथ ही सौंदर्य प्रसाधन सामग्री में किया जाता है प्रयोग
रुद्रपुर। श्वेत चंदन का मंदिरों में पूजा के लिए काफी प्रयोग किया जाता है। इसे माथे में लगाने से काफी ठंडक मिलती है। इसके साथ ही क्रीम, पाउडर सहित कई सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। वाजपेयी ने बताया कि सिडकुल में कॉस्मेटिक सामग्री बनाने वाली कई कंपनियां मौजूद हैं। चंदन की लकड़ियों को किसान कंपनियों में भी सप्लाई कर सकते हैं। इससे कंपनियों को कर्नाटक से चंदन नहीं मंगाना पड़ेगा। अच्छी कीमत में ही कंपनियों को चंंदन मिल जाएगा। बताया कि नर्सरी से एक चंदन का पौधा 300 रुपये से भी अधिक कीमत का मिलता है।
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चंदन की खेती के लिए कर्नाटक काफी प्रसिद्ध है। यहां से चंदन की लकड़ियां विभिन्न प्रदेशों में सप्लाई की जाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भी कई जगह चंदन की खेती होती है। भेषज विकास इकाई के जिला समन्वयक एसके वाजपेयी ने बताया कि जिले में बीते वर्ष सर्पगंधा, सतावर जड़ी-बूटियां किसानों को बांटी गई थीं लेकिन किसानों को इससे खास लाभ नहीं मिला। इस वजह से किसानों को अब श्वेत चंदन की खेती के लिए प्रेरित किया गया है। बताया कि किसान डेढ़ बीघा खेतों की मेड़ में चंदन के पेड़ लगाएंगे। 12 साल में चंदन का पेड़ तैयार हागा। इसके बाद इसकी लकड़ियां उपयोग में आ सकेंगी।
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श्वेत चंदन का पूजा के साथ ही सौंदर्य प्रसाधन सामग्री में किया जाता है प्रयोग
रुद्रपुर। श्वेत चंदन का मंदिरों में पूजा के लिए काफी प्रयोग किया जाता है। इसे माथे में लगाने से काफी ठंडक मिलती है। इसके साथ ही क्रीम, पाउडर सहित कई सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। वाजपेयी ने बताया कि सिडकुल में कॉस्मेटिक सामग्री बनाने वाली कई कंपनियां मौजूद हैं। चंदन की लकड़ियों को किसान कंपनियों में भी सप्लाई कर सकते हैं। इससे कंपनियों को कर्नाटक से चंदन नहीं मंगाना पड़ेगा। अच्छी कीमत में ही कंपनियों को चंंदन मिल जाएगा। बताया कि नर्सरी से एक चंदन का पौधा 300 रुपये से भी अधिक कीमत का मिलता है।
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