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तीर्थ श्री द्रोणासागर की दोनों समितियां स्थगित, प्रशासन ने लिया कब्जा
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काशीपुर में तीर्थ श्री द्रोणासागर परिसर का निरीक्षण करते एसडीएम व तहसीलदार।
- फोटो : KASHIPUR
तीर्थ श्री द्रोणसागर के नाम से संचालित दोनों समितियां स्थगित कर दी गई है। डीएम के आदेश पर एसडीएम की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने द्रोणसागर का प्रबंधन संभाल लिया है। साथ ही भूमि के स्वामित्व अथवा प्रबंधन को लेकर समितियों के दावे की जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
द्रोणसागर का प्रबंधन पूर्व में द्रोणसागर जीर्णोद्धार समिति की ओर से किया जा रहा था। इस कमेटी के सुप्तावस्था में चले जाने के कारण कुछ पदाधिकारियों ने द्रोणासागर उत्थान समिति के नाम से नई संस्था का पंजीकरण करा लिया। द्रोणासागर परिसर में टाट वाले बाबा, डमरू वाले बाबा का भी मंदिर है। समिति के नाम राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 205,66 क, 68 क, 69, 81 क, 84 क, 89 क की भूमि है, जो वर्ग एक क में दर्ज है।
अधिवक्ता वेदप्रकाश बाठला ने 14 फरवरी 2020 को डीएम से शिकायत कर कुछ लोगों की ओर से समिति बनाकर तीर्थ द्रोणसागर का प्रबंधन अनाधिकृत रूप से करने का आरोप लगाया था। मामले की जांच आईएएस विशाल मिश्रा और एसडीएम ने कराई। समिति ने 28 जुलाई को जांच आख्या में कहा कि तीर्थ श्री द्रोणसागर के प्रबंधन का दावा करने वाली दोनों समितियों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। यह स्पष्ट नहीं है कि द्रोणसागर समिति के नाम अभिलेखों में दर्ज भूमि पर इन समितियों को किस प्रकार से अधिकार प्राप्त है। जांच में यह सार्वजनिक उपयोग की भूमि होना पाई गई।
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प्राचीन स्मारक पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम-1958 के प्रावधान भी इस भूमि पर प्रभावी हो सकते है। वहीं गंज निवासी अनिल माहेश्वरी की याचिका पर भी नैनीताल हाईकोर्ट ने तीर्थ श्री द्रोणसागर, बाल सुंदरी देवी मंदिर, चैती परिसर व मोटेश्वर महादेव का प्रबंधन भी राज्य सरकार को सौंपे जाने के आदेश दिए है। जांच आख्या के आधार पर संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया।
इस समिति में एएसआई के अधिकारी व सीओ चकबंदी को शामिल किया गया है। सोमवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार, तहसीलदार वीसी पंत, कानूनगो राजीव वर्मा व हल्का लेखपाल दौलत सिंह, शासकीय अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने तीर्थ द्रोणासागर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। संयुक्त मजिस्ट्रेट ने तहसीलदार को मौके की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए हैं।
तीर्थ श्रीद्रोणासागर परिसर में स्थापित अधिकांश मंदिर वर्ग 6 (2), 5(3) व सरकारी प्रयोज्य की भूमि पर बने है। इन मंदिरों समेत 12 दुकानों को कब्जे में ले लिया गया है। इन मंदिरों के प्रबंधकों से उनका पक्ष जाना जाएगा। फिलहाल मंदिरों की देखरेख का जिम्मा प्रशासन का होगा। गौरव कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट काशीपुर।
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द्रोणसागर का प्रबंधन पूर्व में द्रोणसागर जीर्णोद्धार समिति की ओर से किया जा रहा था। इस कमेटी के सुप्तावस्था में चले जाने के कारण कुछ पदाधिकारियों ने द्रोणासागर उत्थान समिति के नाम से नई संस्था का पंजीकरण करा लिया। द्रोणासागर परिसर में टाट वाले बाबा, डमरू वाले बाबा का भी मंदिर है। समिति के नाम राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 205,66 क, 68 क, 69, 81 क, 84 क, 89 क की भूमि है, जो वर्ग एक क में दर्ज है।
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अधिवक्ता वेदप्रकाश बाठला ने 14 फरवरी 2020 को डीएम से शिकायत कर कुछ लोगों की ओर से समिति बनाकर तीर्थ द्रोणसागर का प्रबंधन अनाधिकृत रूप से करने का आरोप लगाया था। मामले की जांच आईएएस विशाल मिश्रा और एसडीएम ने कराई। समिति ने 28 जुलाई को जांच आख्या में कहा कि तीर्थ श्री द्रोणसागर के प्रबंधन का दावा करने वाली दोनों समितियों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। यह स्पष्ट नहीं है कि द्रोणसागर समिति के नाम अभिलेखों में दर्ज भूमि पर इन समितियों को किस प्रकार से अधिकार प्राप्त है। जांच में यह सार्वजनिक उपयोग की भूमि होना पाई गई।
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प्राचीन स्मारक पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम-1958 के प्रावधान भी इस भूमि पर प्रभावी हो सकते है। वहीं गंज निवासी अनिल माहेश्वरी की याचिका पर भी नैनीताल हाईकोर्ट ने तीर्थ श्री द्रोणसागर, बाल सुंदरी देवी मंदिर, चैती परिसर व मोटेश्वर महादेव का प्रबंधन भी राज्य सरकार को सौंपे जाने के आदेश दिए है। जांच आख्या के आधार पर संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया।
इस समिति में एएसआई के अधिकारी व सीओ चकबंदी को शामिल किया गया है। सोमवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार, तहसीलदार वीसी पंत, कानूनगो राजीव वर्मा व हल्का लेखपाल दौलत सिंह, शासकीय अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने तीर्थ द्रोणासागर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। संयुक्त मजिस्ट्रेट ने तहसीलदार को मौके की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए हैं।
तीर्थ श्रीद्रोणासागर परिसर में स्थापित अधिकांश मंदिर वर्ग 6 (2), 5(3) व सरकारी प्रयोज्य की भूमि पर बने है। इन मंदिरों समेत 12 दुकानों को कब्जे में ले लिया गया है। इन मंदिरों के प्रबंधकों से उनका पक्ष जाना जाएगा। फिलहाल मंदिरों की देखरेख का जिम्मा प्रशासन का होगा। गौरव कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट काशीपुर।