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Udham Singh Nagar News: 18 साल से सांसें गिन रहा है ट्रामा सेंटर का सपना, इलाज के अभाव में दम तोड़ रहीं उम्मीदें
Sat, 17 Oct 2026 12:37 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:37 AM IST
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काशीपुर। शहर के लोगों को सड़क हादसों में तत्काल इलाज मुहैया कराने के लिए बनाया गया ट्रामा सेंटर 18 साल बाद भी सिर्फ शोपीस बना हुआ है। डॉक्टरों की तैनाती नहीं होने से यह ट्रामा सेंटर नहीं, बल्कि रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।
एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय परिसर में 31 मई 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने आठ बेड के ट्रामा सेंटर का उद्घाटन किया था। तब लोगों को उम्मीद थी कि अब गंभीर घायलों को इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं ले जाना पड़ेगा लेकिन उद्घाटन के 18 साल बाद भी यहां सर्जन, ऑर्थो सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई।
ऐसे में काशीपुर के अलावा बाजपुर, जसपुर, सुल्तानपुर पट्टी, केलाखेड़ा व रामनगर से आने वाले एक्सीडेंटल केसों को डॉक्टर प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और कई बार रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
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कोट
स्टाफ की कमी के कारण अब इस ट्रामा सेंटर में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर के लिए अभी अलग से कोई डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। - डॉ. संदीप दीक्षित, सीएमएस, काशीपुर अस्पताल
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एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय परिसर में 31 मई 2008 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने आठ बेड के ट्रामा सेंटर का उद्घाटन किया था। तब लोगों को उम्मीद थी कि अब गंभीर घायलों को इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं ले जाना पड़ेगा लेकिन उद्घाटन के 18 साल बाद भी यहां सर्जन, ऑर्थो सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई।
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ऐसे में काशीपुर के अलावा बाजपुर, जसपुर, सुल्तानपुर पट्टी, केलाखेड़ा व रामनगर से आने वाले एक्सीडेंटल केसों को डॉक्टर प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और कई बार रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
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कोट
स्टाफ की कमी के कारण अब इस ट्रामा सेंटर में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर के लिए अभी अलग से कोई डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। - डॉ. संदीप दीक्षित, सीएमएस, काशीपुर अस्पताल