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Udham Singh Nagar News: नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड की आईआईटी रुड़की में होगी टेस्टिंग
Thu, 14 Aug 2025 01:21 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:21 AM IST
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काशीपुर। जंगलों में आग लगने की समस्या के समाधान के तौर पर टिहरी की जैनब ने एक खास तरीका ईजाद किया था। उन्होंने चीड़ के पत्तों के इस्तेमाल से नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड को प्रोटोटाइप के तौर पर तैयार किया था। अब उनके प्रोडक्ट की टेस्टिंग आईआईटी रुड़की में होगी। इसके बाद बोर्ड की प्रोडक्शन शुरू की जा सकेगी।
टिहरी के बौराड़ी में रहने वाली जैनब सिद्दीकी ने पिरूल का बेहतर विकल्प खोजते हुए नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड बनाने का तरीका ईजाद किया था। उनके इस आइडिया को आईआईएम काशीपुर के इन्क्यूबेशन सेंटर फीड में चयनित किया गया। इसके बाद उन्हें पांच लाख रुपये का फंड फीड की तरफ से इसी महीने प्रदान किया गया है। जैनब के तैयार किए गए नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड की आईआईटी रुड़की के इन्क्यूबेशन सेंटर टीआईडीईएस में टेस्टिंग की जाएगी। इसके लिए उनका चयन हो चुका है। जल्द ही टेस्टिंग के बाद इस प्रोडक्ट को प्रोडक्शन स्टेज पर ले जाया जाएगा।
बता दें कि इस प्रोडक्ट से जंगलों में आग लगने की समस्या कम होगी और पिरूल के इस्तेमाल से पेड़ों की कटाई पर भी असर पड़ेगा। जैनब ने बताया कि वह चीड़ के पत्तों के उपाय पर सात-आठ साल से रिसर्च कर रही थीं। कई प्रयासों के बाद वुडन बोर्ड का एक्सीपेरिमेंट सही साबित हुआ। पिरूल से मजबूत नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड बनाए जा सकते हैं।
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आइडिया को मिला फंड
जैनब ने बताया कि आईआईएम काशीपुर में उनके स्टार्टअप को सिलेक्ट किया गया था। इसके लिए पांच लाख रुपये उन्हें मिलना थे, जो कि इस महीने मिल गए हैं। अब उनके प्रोडक्ट की टेस्टिंग होगी और उसके प्रोडक्शन स्टेज पर काम शुरू होगा। इस खास बोर्ड के आइडिया के लिए उन्हें देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत 75 हजार और हीरो मोटर कंपनी के सीएसआर मद के तहत एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता मिली है।
ऐसे तैयार होते हैं बोर्ड
चीड़ की पत्तियों और एग्रीकल्चर रेजिड्यू को एक साथ पीस कर इसमें प्राकृतिक रेजिन मिलाए जाते हैं। इसके बाद मशीन में इसे एक साथ तय तापमान और तय दबाव से गर्म और कंप्रेस किया जाता है। इस प्रकार इसमें मजबूती आती है। मार्केट में उपलब्ध पार्टिकल बोर्ड के मुकाबले इसकी मजबूती बेहतर है। साथ ही यह वाटर रेजिस्टेंस और फायर रेजिस्टेंस भी है। इन बोर्ड में स्क्रू होल्डिंग क्षमता भी है, जोकि मार्केट में उपलब्ध अन्य बोर्ड में नहीं होती है। इनसे डोर पैनल, विंडो, कैबिनेट, बुक सेल्फ, मॉड्यूलर किचन, डोर, फर्नीचर इत्यादि बनाए जा सकते हैं। इन बोर्ड पर लेजर प्रिटिंग, लेजर कटिंग भी हो सकती है। एक बोर्ड की कीमत करीब 30-35 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट रहेगी।
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टिहरी के बौराड़ी में रहने वाली जैनब सिद्दीकी ने पिरूल का बेहतर विकल्प खोजते हुए नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड बनाने का तरीका ईजाद किया था। उनके इस आइडिया को आईआईएम काशीपुर के इन्क्यूबेशन सेंटर फीड में चयनित किया गया। इसके बाद उन्हें पांच लाख रुपये का फंड फीड की तरफ से इसी महीने प्रदान किया गया है। जैनब के तैयार किए गए नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड की आईआईटी रुड़की के इन्क्यूबेशन सेंटर टीआईडीईएस में टेस्टिंग की जाएगी। इसके लिए उनका चयन हो चुका है। जल्द ही टेस्टिंग के बाद इस प्रोडक्ट को प्रोडक्शन स्टेज पर ले जाया जाएगा।
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बता दें कि इस प्रोडक्ट से जंगलों में आग लगने की समस्या कम होगी और पिरूल के इस्तेमाल से पेड़ों की कटाई पर भी असर पड़ेगा। जैनब ने बताया कि वह चीड़ के पत्तों के उपाय पर सात-आठ साल से रिसर्च कर रही थीं। कई प्रयासों के बाद वुडन बोर्ड का एक्सीपेरिमेंट सही साबित हुआ। पिरूल से मजबूत नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड बनाए जा सकते हैं।
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आइडिया को मिला फंड
जैनब ने बताया कि आईआईएम काशीपुर में उनके स्टार्टअप को सिलेक्ट किया गया था। इसके लिए पांच लाख रुपये उन्हें मिलना थे, जो कि इस महीने मिल गए हैं। अब उनके प्रोडक्ट की टेस्टिंग होगी और उसके प्रोडक्शन स्टेज पर काम शुरू होगा। इस खास बोर्ड के आइडिया के लिए उन्हें देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत 75 हजार और हीरो मोटर कंपनी के सीएसआर मद के तहत एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता मिली है।
ऐसे तैयार होते हैं बोर्ड
चीड़ की पत्तियों और एग्रीकल्चर रेजिड्यू को एक साथ पीस कर इसमें प्राकृतिक रेजिन मिलाए जाते हैं। इसके बाद मशीन में इसे एक साथ तय तापमान और तय दबाव से गर्म और कंप्रेस किया जाता है। इस प्रकार इसमें मजबूती आती है। मार्केट में उपलब्ध पार्टिकल बोर्ड के मुकाबले इसकी मजबूती बेहतर है। साथ ही यह वाटर रेजिस्टेंस और फायर रेजिस्टेंस भी है। इन बोर्ड में स्क्रू होल्डिंग क्षमता भी है, जोकि मार्केट में उपलब्ध अन्य बोर्ड में नहीं होती है। इनसे डोर पैनल, विंडो, कैबिनेट, बुक सेल्फ, मॉड्यूलर किचन, डोर, फर्नीचर इत्यादि बनाए जा सकते हैं। इन बोर्ड पर लेजर प्रिटिंग, लेजर कटिंग भी हो सकती है। एक बोर्ड की कीमत करीब 30-35 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट रहेगी।