{"_id":"6318ebd8d9e0585a7639d2fa","slug":"stp-in-us-nagar-rudrapur-news-hld474971252","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऊधम सिंह नगर जिले की सात प्रदूषित नदियों को स्वच्छ बनाने की कवायद शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऊधम सिंह नगर जिले की सात प्रदूषित नदियों को स्वच्छ बनाने की कवायद शुरू
विज्ञापन
काशीपुर स्थित ढेला नदी के समीप बनाया जा रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट।
- फोटो : RUDRAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुद्रपुर। जिले की सात प्रदूषित नदियों को नमामि गंगे योजना से स्वच्छ बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। ढेला, बहल्ला, गौला, पिलखर समेत सातों नदियों में 199 करोड़ रुपये की लागत से नौ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाना है। इसके तहत ढेला नदी के पास 10 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की ओर से जिले की सातों नदियों को सबसे ज्यादा प्रदूषित माना गया है। एनजीटी की ओर से सातों नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के आदेश के बाद अफसरों में इसके प्रति संजीदगी दिखाई देने लगी है। रुद्रपुर से निकलने वाली कल्याणी नदी वर्षों से गंदगी से पटी है। स्थिति यह है कि फैक्टरियों से लेकर लोगों के घरों का गंदा पानी और सीवर भी नदी में गिरता है। इसी तरह काशीपुर की ढेला, बहल्ला, किच्छा की गौला, बाजपुर की कोसी, सितारगंज की नंधौर, रुद्रपुर के पास ही पिलखर नदी का भी यही हाल हैं।
अब पेयजल निगम की ओर से नमामि गंगे योजना के तहत इन नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा। पेयजल निगम की अधिशासी अभियंता मृदुला सिंह ने बताया कि नदियों के पास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने व अगले 15 वर्षों तक इसका रखरखाव करने के लिए पेयजल निगम की ओर से लखनऊ की आरके इंजीनियर्स को ठेका दिया गया है। कंपनी की ओर से सबसे पहले ढेला नदी के पास 10 एमएलडी का एसटीपी का काम शुरू कर दिया गया है। जिले में नदियों के पास 30 एमएलडी के कुल नौ प्लांट बनाए जाएंगे।
विज्ञापन
एसटीपी से इस तरह किया जाएगा नदियों को साफ
रुद्रपुर। जिले की सातों नदियों को साफ करने के लिए नदियों में गिरने वाली सीवर लाइनों, शहर के छोटे-बड़े नालों का इंटर सेक्शन और डायवर्जन कर सीवर लाइन बिछाकर उसमें गंदे पानी का रुख बदला जाएगा। उसके बाद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदे पानी को फिल्टर कर साफ किया जाएगा जिसे दोबारा नदियों में छोड़ दिया जाएगा। इस तरह नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा।
विज्ञापन
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की ओर से जिले की सातों नदियों को सबसे ज्यादा प्रदूषित माना गया है। एनजीटी की ओर से सातों नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के आदेश के बाद अफसरों में इसके प्रति संजीदगी दिखाई देने लगी है। रुद्रपुर से निकलने वाली कल्याणी नदी वर्षों से गंदगी से पटी है। स्थिति यह है कि फैक्टरियों से लेकर लोगों के घरों का गंदा पानी और सीवर भी नदी में गिरता है। इसी तरह काशीपुर की ढेला, बहल्ला, किच्छा की गौला, बाजपुर की कोसी, सितारगंज की नंधौर, रुद्रपुर के पास ही पिलखर नदी का भी यही हाल हैं।
विज्ञापन
अब पेयजल निगम की ओर से नमामि गंगे योजना के तहत इन नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा। पेयजल निगम की अधिशासी अभियंता मृदुला सिंह ने बताया कि नदियों के पास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने व अगले 15 वर्षों तक इसका रखरखाव करने के लिए पेयजल निगम की ओर से लखनऊ की आरके इंजीनियर्स को ठेका दिया गया है। कंपनी की ओर से सबसे पहले ढेला नदी के पास 10 एमएलडी का एसटीपी का काम शुरू कर दिया गया है। जिले में नदियों के पास 30 एमएलडी के कुल नौ प्लांट बनाए जाएंगे।
विज्ञापन
एसटीपी से इस तरह किया जाएगा नदियों को साफ
रुद्रपुर। जिले की सातों नदियों को साफ करने के लिए नदियों में गिरने वाली सीवर लाइनों, शहर के छोटे-बड़े नालों का इंटर सेक्शन और डायवर्जन कर सीवर लाइन बिछाकर उसमें गंदे पानी का रुख बदला जाएगा। उसके बाद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदे पानी को फिल्टर कर साफ किया जाएगा जिसे दोबारा नदियों में छोड़ दिया जाएगा। इस तरह नदियों को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा।