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20 जून से पहले कर लें धान की बुआई : डॉ. क्वात्रा
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प्रतीकात्मक।
- फोटो : हल्द्वानी के इंदिरा नगर क्षेत्र में नाला चौक होनें के कारण घरों में कैद हुए लोग। संवाद
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कृषि वैज्ञानिक बोले-धान की सीधी बुवाई किसान के लिए हो सकती है फायदेमंद
काशीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने कहा जिले में धान की सीधी बुवाई करना लाभप्रद हो सकता है। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुवाई में किसी प्रकार की नर्सरी नहीं उगाई जाती है। बल्कि अंकुरित बीज सीधे ट्रैक्टर से संचालित मशीन द्वारा खेत में ड्रिल किए जाते हैं और मशीनों की सहायता से खेत को तैयार कर धान की सीधी बुवाई कर सकते हैं।
डॉ. क्वात्रा ने बताया कि यदि किसान सीधी बुवाई करना चाहते हैं तो 20 जून से पहले कर लें। इसके लिए खेत की जुताई से 1 सप्ताह पूर्व खेत में पानी भरे जब खेत सूख जाए। तब इसमें मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें। दो से तीन जुताई करने के बाद खेत को समतल कर दें। बासमती धान के लिए यह मात्रा कम कर सकते हैं।
बीज की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर के मध्य रखें तथा पौधे से पौधे की दूरी 5 से 7 सेंटीमीटर तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें। उन्होंने बताया यह विधि हल्की एवं रेतीली भूमि के लिए उपयुक्त नहीं है।
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इस विधि से एक घंटे में एक एकड़ में धान की बुवाई हो सकती हैं। सीधी बुवाई तकनीक में 25-30 फीसदी तक पानी कम लगता है जबकि रोपाई विधि में खेत में 4-5 सेमी पानी भरा होना चाहिए।
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काशीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने कहा जिले में धान की सीधी बुवाई करना लाभप्रद हो सकता है। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुवाई में किसी प्रकार की नर्सरी नहीं उगाई जाती है। बल्कि अंकुरित बीज सीधे ट्रैक्टर से संचालित मशीन द्वारा खेत में ड्रिल किए जाते हैं और मशीनों की सहायता से खेत को तैयार कर धान की सीधी बुवाई कर सकते हैं।
डॉ. क्वात्रा ने बताया कि यदि किसान सीधी बुवाई करना चाहते हैं तो 20 जून से पहले कर लें। इसके लिए खेत की जुताई से 1 सप्ताह पूर्व खेत में पानी भरे जब खेत सूख जाए। तब इसमें मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें। दो से तीन जुताई करने के बाद खेत को समतल कर दें। बासमती धान के लिए यह मात्रा कम कर सकते हैं।
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बीज की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर के मध्य रखें तथा पौधे से पौधे की दूरी 5 से 7 सेंटीमीटर तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें। उन्होंने बताया यह विधि हल्की एवं रेतीली भूमि के लिए उपयुक्त नहीं है।
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इस विधि से एक घंटे में एक एकड़ में धान की बुवाई हो सकती हैं। सीधी बुवाई तकनीक में 25-30 फीसदी तक पानी कम लगता है जबकि रोपाई विधि में खेत में 4-5 सेमी पानी भरा होना चाहिए।