{"_id":"6acbe6e1c15b5ff53b07e804","slug":"request-to-change-fathers-name-in-school-records-rejected-rudrapur-news-c-242-1-rdp1029-148278-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: स्कूल रिकॉर्ड में पिता का नाम बदलने की मांग खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: स्कूल रिकॉर्ड में पिता का नाम बदलने की मांग खारिज
Mon, 12 Oct 2026 01:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:13 AM IST
विज्ञापन
रुद्रपुर। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) गुंजन सिंह की अदालत ने स्कूल के अभिलेखों में जैविक पिता का नाम हटाकर सौतेले पिता का नाम दर्ज कराने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि तलाक और पुनर्विवाह के बाद भी बच्चे के जैविक पिता की कानूनी पहचान स्वतः समाप्त नहीं होती।
रुद्रपुर निवासी वादिनी मीनाक्षी का विवाह वर्ष 2011 में चंदन सिंह बोरा के साथ हुआ था। दोनों का एक पुत्र अक्षित सिंह है। वैचारिक मतभेदों के चलते वर्ष 2023 में पारिवारिक न्यायालय ने उनके विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित की थी। इसके बाद बच्चा मां के साथ रहने लगा। अक्टूबर 2024 में मां ने प्रदीप बानी से दूसरा विवाह कर लिया। शाद के बाद उन्होंने स्कूल के अभिलेख में बच्चे के जैविक पिता चंदन का नाम हटाकर प्रदीप का दर्ज कराने का अनुरोध किया। स्कूल प्रशासन ने इसके लिए सक्षम अधिकारी के आदेश की आवश्यकता बताई। उन्होंने नाम परिवर्तन की मांग के लिए न्यायालय की शरण ली। अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर माना कि जैविक पिता के जीवित रहते सिर्फ पुनर्विवाह के कारण सौतेले पिता को प्राकृतिक पिता का कानूनी दर्जा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया।
--
विज्ञापन
रुद्रपुर निवासी वादिनी मीनाक्षी का विवाह वर्ष 2011 में चंदन सिंह बोरा के साथ हुआ था। दोनों का एक पुत्र अक्षित सिंह है। वैचारिक मतभेदों के चलते वर्ष 2023 में पारिवारिक न्यायालय ने उनके विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित की थी। इसके बाद बच्चा मां के साथ रहने लगा। अक्टूबर 2024 में मां ने प्रदीप बानी से दूसरा विवाह कर लिया। शाद के बाद उन्होंने स्कूल के अभिलेख में बच्चे के जैविक पिता चंदन का नाम हटाकर प्रदीप का दर्ज कराने का अनुरोध किया। स्कूल प्रशासन ने इसके लिए सक्षम अधिकारी के आदेश की आवश्यकता बताई। उन्होंने नाम परिवर्तन की मांग के लिए न्यायालय की शरण ली। अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर माना कि जैविक पिता के जीवित रहते सिर्फ पुनर्विवाह के कारण सौतेले पिता को प्राकृतिक पिता का कानूनी दर्जा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया।
विज्ञापन