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एमएसपी से अधिक गेहूं के दाम मिलने की खुशी तो कम पैदावार ने बढ़ाई चिंता
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रुद्रपुर गल्ला मंडी स्थित आढ़त पर ट्रॉली से गेहूं निकालता पल्लेदार।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। जिले में इस वर्ष आई आपदा के कारण निचले स्थानों वाली कृषि भूमि पर गेहूं का उत्पादन गिरने से किसान चिंतित हैं। हालांकि निजी आढ़तों पर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से अधिक मिल रहे गेहूं के मूल्य ने किसानों को मरहम लगाने का काम किया है। यही वजह से वर्तमान में जिले में आढ़तों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों की संख्या बढ़ रही है, जबकि सहकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
ऊधमसिंह नगर जिले में इस बार करीब 98 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में गेहूं की फसल बोई गई थी, लेकिन अक्तूबर में भीषण बारिश के दौरान गेहूं के खेतों में जलभराव व निचले स्थानों वाली कृषि भूमि में लंबे समय तक बरसाती पानी की निकासी न होने की समस्या बन गई गई थी जिसका असर गेहूं की पैदावार पर पड़ा है। कई किसानों का कहना है कि अब तक उनके जिन खेतों में प्रति हेक्टेयर करीब 45 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता था, इस बार मात्र 30 क्विंटल उत्पादन हो रहा है, लेकिन गेहूं की कम उपलब्धता के चलते निजी आढ़तों पर किसानों को अपने गेहूं का मनमाना मूल्य मिल रहा है। सरकार की ओर से गेहूं का मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन निजी आढ़तों पर किसानों को 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं। आपदा की मार झेल चुके किसान इसे अपने लिए मरहम बता रहे हैं। जिस कारण किसान सहकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बजाय सीधे खुले बाजार में आढ़तियों के पास बेच रहे हैं। यही वजह है कि सहकारी क्रय केंद्रों पर सुनसानी पसरी हुई है। आढ़तों पर अधिक मूल्य मिलने के कारण गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करना असंभव बनता जा रहा है। कुमाऊं मंडल में इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए 16 लाख क्विंटल का लक्ष्य मिला है, जबकि अब तक सिर्फ 4,722.5 क्विंटल गेहूं खरीद ही हुई है।
आपदा के कारण इस बार निचले स्थानों पर गेहूं के खेतों से बरसाती पानी की निकासी नहीं हो सकी थी। इसका जिले में गेहूं की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
धीरेंद्र सिंह, किसान।
इस बार जिले में कई स्थानों में गेहूं का उत्पादन घटा है। अक्तूबर में आयी आपदा की वजह से ऐसा हुआ है, लेकिन आढ़तों पर गेहूं के अच्छे दाम से मिलने से थोड़ी राहत है।
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विभाष सिंह, किसान।
हमारे खेतों में आपदा के दौरान काफी जलभराव हो गया था। इससे गेहूं की पैदावार थोड़ी कम हुई है। जहां कृषि भूमि निचले स्थानों पर है, वहां यह दिक्कत ज्यादा आई है।
सुधीर शाही, किसान।
सरकार ने इस बार एसएसपी बेहद कम करने के साथ ही बोनस की धनराशि भी किसानों को नहीं दी। जिस कारण किसान अपना गेहूं सहकारी केंद्रों के बजाय आढ़तों में बेच रहे हैं।
विक्रमजीत सिंह, किसान।
सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं का मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि किसानों का गेहूं आढ़तों पर इससे अधिक मूल्य पर बिक रहा है। ऐसे में किसानों का आढ़तों पर गेहूं बेचना लाजमी है।
रामकिशन शर्मा, आढ़ती
तराई के गेहूं का निर्यात विदेशों में अधिक हो रहा है, जिस कारण यहां के गेहूं की डिमांड अधिक बढ़ रही है। किसानों को भी इसका फायदा मिल रहा है। आढ़तों पर गेहूं के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
गजानन शर्मा, आढ़ती
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ऊधमसिंह नगर जिले में इस बार करीब 98 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में गेहूं की फसल बोई गई थी, लेकिन अक्तूबर में भीषण बारिश के दौरान गेहूं के खेतों में जलभराव व निचले स्थानों वाली कृषि भूमि में लंबे समय तक बरसाती पानी की निकासी न होने की समस्या बन गई गई थी जिसका असर गेहूं की पैदावार पर पड़ा है। कई किसानों का कहना है कि अब तक उनके जिन खेतों में प्रति हेक्टेयर करीब 45 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता था, इस बार मात्र 30 क्विंटल उत्पादन हो रहा है, लेकिन गेहूं की कम उपलब्धता के चलते निजी आढ़तों पर किसानों को अपने गेहूं का मनमाना मूल्य मिल रहा है। सरकार की ओर से गेहूं का मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन निजी आढ़तों पर किसानों को 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं। आपदा की मार झेल चुके किसान इसे अपने लिए मरहम बता रहे हैं। जिस कारण किसान सहकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बजाय सीधे खुले बाजार में आढ़तियों के पास बेच रहे हैं। यही वजह है कि सहकारी क्रय केंद्रों पर सुनसानी पसरी हुई है। आढ़तों पर अधिक मूल्य मिलने के कारण गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करना असंभव बनता जा रहा है। कुमाऊं मंडल में इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए 16 लाख क्विंटल का लक्ष्य मिला है, जबकि अब तक सिर्फ 4,722.5 क्विंटल गेहूं खरीद ही हुई है।
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आपदा के कारण इस बार निचले स्थानों पर गेहूं के खेतों से बरसाती पानी की निकासी नहीं हो सकी थी। इसका जिले में गेहूं की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
धीरेंद्र सिंह, किसान।
इस बार जिले में कई स्थानों में गेहूं का उत्पादन घटा है। अक्तूबर में आयी आपदा की वजह से ऐसा हुआ है, लेकिन आढ़तों पर गेहूं के अच्छे दाम से मिलने से थोड़ी राहत है।
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विभाष सिंह, किसान।
हमारे खेतों में आपदा के दौरान काफी जलभराव हो गया था। इससे गेहूं की पैदावार थोड़ी कम हुई है। जहां कृषि भूमि निचले स्थानों पर है, वहां यह दिक्कत ज्यादा आई है।
सुधीर शाही, किसान।
सरकार ने इस बार एसएसपी बेहद कम करने के साथ ही बोनस की धनराशि भी किसानों को नहीं दी। जिस कारण किसान अपना गेहूं सहकारी केंद्रों के बजाय आढ़तों में बेच रहे हैं।
विक्रमजीत सिंह, किसान।
सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं का मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि किसानों का गेहूं आढ़तों पर इससे अधिक मूल्य पर बिक रहा है। ऐसे में किसानों का आढ़तों पर गेहूं बेचना लाजमी है।
रामकिशन शर्मा, आढ़ती
तराई के गेहूं का निर्यात विदेशों में अधिक हो रहा है, जिस कारण यहां के गेहूं की डिमांड अधिक बढ़ रही है। किसानों को भी इसका फायदा मिल रहा है। आढ़तों पर गेहूं के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
गजानन शर्मा, आढ़ती