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एनएचएम कर्मियों ने किया आर-पार की लड़ाई का एलान
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रुद्रपुर में सीएमओ कार्यालय परिसर में धरना देते एनएचएम कर्मी।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्री के वार्ता न करने और मानदेय कटौती पर भड़के एनएचएम कर्मियों ने शुक्रवार से अपने आंदोलन का दूसरा चरण शुरू कर दिया। उन्होंने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे कोरोना टीकाकरण, जांच समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। कर्मचारियों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन उत्तराखंड के बैनर तले दो सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठे एनएचएम कर्मियों की सरकार से वार्ता के बाद शुक्रवार को धरना स्थगित करने की तैयारी थी, लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक पहल न होने से आक्रोशित एनएचएम कर्मियों ने अनिश्चतकालीन हड़ताल का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी चार दिन से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। उन्होंने हड़ताल की अवधि का मानदेय काटने के सरकार के फैसले को तानाशाहीपूर्ण बताया। कहा कि जब तक हरियाणा की तर्ज पर वेतनमान और आउटसोर्स से नियुक्ति की व्यवस्था बंद नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड के जिलाध्यक्ष बीएन बेलवाल भी सर्मथन देने के लिए सीएमओ कार्यालय में चल रहे धरनास्थल पर पहुंचे। जिले से कई एनएचएम कर्मी उच्च अधिकरियों व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से वार्ता के लिए देहरादून भी पहुंचे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन ऊधम सिंह नगर के कार्यकारी जिलाध्यक्ष डॉ. संदीप मिश्रा व डीएस भंडारी ने देहरादून में डेरा डाल दिया है। इधर, एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से जिलेभर में आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। रुद्रपुर जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी में विभिन्न आपातकालीन ड्यूटियां कर रहे एनएचएम कर्मी भी धरने पर बैठ गए। जिस कारण जिले में टीकाकरण, मेडिकल जांच, सैंपलिंग आदि कार्य प्रभावित रहे। वहां पर रविंद्र पाल, अंशुल टंडन, नंदलाल, चांद मिया, आमिर मेवाती, जावेद, पंकज गुंसाई, गोपाल आर्या, मनोज आर्या, पूरनमल, उमेश पाल, ममता सक्सेना, तौफीक, कविता जोशी, डॉ. कामरान, भावना पांडेय, भास्कर जोशी, नवीन पांडेय, उमेश जोशी आदि थे।
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एनएचएम कर्मी स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, इसके बावजूद उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। सरकार को कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। -प्रीत पंत
शासन और प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण ही शुक्रवार से एनएचएम कर्मियों को दूसरे चरण में अनिश्चतकालीन आंदोलन शुरू करना पड़ रहा है। हमारी कोई सुनने वाला नहीं। - सुनील सती
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मैं पिछले छह साल से एनएचएम के तहत नौकरी कर रहा हूं। मुझे सिर्फ चार हजार रुपये का मानदेय मिल रहा है। इससे मैं अपना पेट भरूं या परिवार चलाऊं। -भैरव दत्त
हरियाणा की तर्ज पर वेतनमान और ठेका प्रथा को खत्म करने की हमारी मांग बहुत पुरानी है, लेकिन कई बार हड़ताल करने के बावजूद सरकार नहीं सुन रही। -निर्मला बृजवाल
करीब डेढ़ दशक पहले खासकर महिला स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए एनएचएम की शुरुआत हुई थी, लेकिन आज महिला सशक्तिकरण का दावा कर रही सरकार इसे भूल चुकी है। -रीना सिंह।
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सैकड़ों एनएचएम कर्मियों की वर्तमान स्थित ऐसी हो चुकी है कि उनकी उम्र अब न तो सरकारी नौकरी के लिए रही, नहीं प्राइवेट नौकरी के लिए। मैं पूछता हूं कि आखिर हमारा खैरख्वाह कौन है -शुभम पपनोई।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन उत्तराखंड के बैनर तले दो सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठे एनएचएम कर्मियों की सरकार से वार्ता के बाद शुक्रवार को धरना स्थगित करने की तैयारी थी, लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक पहल न होने से आक्रोशित एनएचएम कर्मियों ने अनिश्चतकालीन हड़ताल का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी चार दिन से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। उन्होंने हड़ताल की अवधि का मानदेय काटने के सरकार के फैसले को तानाशाहीपूर्ण बताया। कहा कि जब तक हरियाणा की तर्ज पर वेतनमान और आउटसोर्स से नियुक्ति की व्यवस्था बंद नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
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डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड के जिलाध्यक्ष बीएन बेलवाल भी सर्मथन देने के लिए सीएमओ कार्यालय में चल रहे धरनास्थल पर पहुंचे। जिले से कई एनएचएम कर्मी उच्च अधिकरियों व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से वार्ता के लिए देहरादून भी पहुंचे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन ऊधम सिंह नगर के कार्यकारी जिलाध्यक्ष डॉ. संदीप मिश्रा व डीएस भंडारी ने देहरादून में डेरा डाल दिया है। इधर, एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से जिलेभर में आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। रुद्रपुर जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी में विभिन्न आपातकालीन ड्यूटियां कर रहे एनएचएम कर्मी भी धरने पर बैठ गए। जिस कारण जिले में टीकाकरण, मेडिकल जांच, सैंपलिंग आदि कार्य प्रभावित रहे। वहां पर रविंद्र पाल, अंशुल टंडन, नंदलाल, चांद मिया, आमिर मेवाती, जावेद, पंकज गुंसाई, गोपाल आर्या, मनोज आर्या, पूरनमल, उमेश पाल, ममता सक्सेना, तौफीक, कविता जोशी, डॉ. कामरान, भावना पांडेय, भास्कर जोशी, नवीन पांडेय, उमेश जोशी आदि थे।
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एनएचएम कर्मी स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, इसके बावजूद उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। सरकार को कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। -प्रीत पंत
शासन और प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण ही शुक्रवार से एनएचएम कर्मियों को दूसरे चरण में अनिश्चतकालीन आंदोलन शुरू करना पड़ रहा है। हमारी कोई सुनने वाला नहीं। - सुनील सती
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मैं पिछले छह साल से एनएचएम के तहत नौकरी कर रहा हूं। मुझे सिर्फ चार हजार रुपये का मानदेय मिल रहा है। इससे मैं अपना पेट भरूं या परिवार चलाऊं। -भैरव दत्त
हरियाणा की तर्ज पर वेतनमान और ठेका प्रथा को खत्म करने की हमारी मांग बहुत पुरानी है, लेकिन कई बार हड़ताल करने के बावजूद सरकार नहीं सुन रही। -निर्मला बृजवाल
करीब डेढ़ दशक पहले खासकर महिला स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए एनएचएम की शुरुआत हुई थी, लेकिन आज महिला सशक्तिकरण का दावा कर रही सरकार इसे भूल चुकी है। -रीना सिंह।
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सैकड़ों एनएचएम कर्मियों की वर्तमान स्थित ऐसी हो चुकी है कि उनकी उम्र अब न तो सरकारी नौकरी के लिए रही, नहीं प्राइवेट नौकरी के लिए। मैं पूछता हूं कि आखिर हमारा खैरख्वाह कौन है -शुभम पपनोई।