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बाजपुर के पांडे अस्पताल पर 50 हजार जुर्माने की संस्तुति
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर।
Updated Sat, 12 May 2018 12:26 AM IST
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जैव चिकित्सीय कचरा
- फोटो : अमर उजाला
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जैव चिकित्सीय कचरे का उचित निस्तारण नहीं करने वालों के खिलाफ पीसीबी की सख्ती जारी है। खटीमा में तीन अस्पतालों पर जुर्माना लगाने के बाद अब पीसीबी ने बाजपुर के पांडे अस्पताल पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की संस्तुति मुख्यालय भेजी है। पांडे अस्पताल में जैव चिकित्सीय कचरे का उचित निस्तारण नहीं होना पाया गया था।
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जैव चिकित्सीय कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने पर उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने जिले के 145 अस्पतालों, क्लिनिक, पैथोलॉजी लैब और नर्सिंग होम को नोटिस भेजे थे। व्यवस्था नहीं सुधरने पर पीसीबी ने खटीमा के तीन अस्पतालों पर 50 हजार- 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल ने बताया कि नौ मई को पीसीबी के सहायक अभियंता राकेश कंडारी और सहायक वैज्ञानिक सृष्टि आर्या ने बाजपुर में पांडे अस्पताल का निरीक्षण किया था।
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70 बेड के इस अस्पताल में डस्टबिन तो रखे पाए गए, लेकिन उसमें कचरे को फेंकने का विवरण नहीं पाया गया। डॉ. कंसल ने बताया कि जैव चिकित्सीय कचरा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर क्षेत्र के किसी भी खाली स्थान या पालिका के ट्रंचिंग ग्राउंड में फेंका जा रहा था। कचरे के निस्तारण के संबंध में अस्पताल में पंजिका भी नहीं मिली। डॉ. कंसल ने बताया कि अस्पताल की ओर से पीसीबी से अनुमति भी नहीं ली गई थी।
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डॉ. अंकुर कंसल ने बताया कि अस्पताल के खिलाफ लीगल कार्रवाई करने और 50 हजार जुर्माना लगाने की संस्तुति मुख्यालय को भेजी गई है। इधर, पांडे अस्पताल के स्वामी डॉ. हरिओम पांडे ने बताया कि वाटर ट्रीटमेंट के लिए प्लांट लगाया जा रहा है। जैव चिकित्सीय कचरे को छांटने के लिए डस्टबिनों पर निशान भी लगाए गए हैं। जनरेटर के पास पड़े कूड़े को निस्तारित किया जा चुका है।
निकायों ने नहीं दिया पीसीबी के नोटिसों का जवाब
काशीपुर। जैव चिकित्सीय कचरे का निस्तारण न कर कुछ अस्पतालों की ओर से ट्रंचिंग ग्राउंड में कचरा फेंकने की शिकायत मिलने के बाद पीसीबी ने जिले के निकायों को नोटिस भेजकर कचरे के निस्तारण के संबंध में सूचना देने को कहा था। लेकिन, जिले के एक भी निकाय ने अब तक नोटिस का जवाब देना उचित नहीं समझा। अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्तमान में भी कई अस्पतालों की ओर से जैव चिकित्सीय कचरे को निकायों के ट्रंचिंग ग्राउंड में फेंका जा रहा है।