स्मृति शेष: जब प्रणब दा को भा गई थी चुड़कानी-झिंगोरे की खीर, रेसिपी सहित इन अनाजों को राष्ट्रपति भवन भेजने की कही थी बात
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 29वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि 17 नवंबर 2015 को शिरकत करने पंतनगर पहुंचे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समारोह में पौने दो घंटे से अधिक समय बिताने के बाद एक घंटे कुलपति निवास (तराई भवन) में भी रहे। इस दौरान उन्होंने तराई भवन में रुद्राक्ष का पौधा लगाने के साथ ही यहां उनके सम्मान में आयोजित भोज में भी शिरकत की थी।
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प्रणब दा ने तब भट्ट की चुड़कानी, मंडुवे की रोटी और झिंगोरे की खीर के साथ ही बंगाली डिश बैंगन भाजी आदि व्यंजनों का भी लुत्फ उठाया था। यह सभी व्यंजन कुलपति आवास के रसोइये द्वारा ही बनाए गए थे। राष्ट्रपति ने पर्वतीय व्यंजनों की तारीफ करते हुए उन्हें गुणवत्ता युक्त बताया था।
उनको भट्ट की चुड़कानी व झिंगोरे की खीर इतनी पसंद आई कि उन्होंने रेसिपी सहित इन अनाजों को राष्ट्रपति भवन भेजने की बात कही थी। प्रणब दा ने पंतनगर विवि के 29वें दीक्षांत समारोह में अपने 26 मिनट के भाषण में कृषि विकास के सभी पहलुओं को छुआ था। उन्होंने किसानों को मानसूनी वर्षा पर निर्भरता छोड़ते हुए सिंचाई के अन्य साधन अपनाने पर जोर दिया।
कृषि से ही सुधरेगी देश की अर्थव्यवस्था
प्रणब दा ने उस वक्त वैज्ञानिकों व विद्यार्थियों को संबोधन में कहा था कि इस देश की अर्थव्यवस्था कृषि से ही सुधर सकती है। इसलिए पंतनगर विवि के शोधार्थी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान दें।
उन्होंने पंत विवि को हरित क्रांति के तकनीकी क्षेत्र की जननी बताया और कृषि विश्वविद्यालयों को देश की कृषि के विकास में बदलाव तथा केंद्र बिंदु बनने का आह्वान भी किया था। प्रणब दा ने इस दौरान 1208 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की थीं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ भारत में पोषण सुरक्षा की बदहाल स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए पोषण युक्त अनाज पर अधिक शोध करने पर बल दिया।
अनाज की गुणवत्ता बचा लीजिए
हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति का हवाला देते हुए प्रणब दा ने कहा था कि हम अच्छी स्थिति में नहीं हैं, इसे बदलना होगा। केवल अनाज के भंडार भरने से काम नहीं चलेगा इसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा जिससे आने वाली पीढ़ियां मजबूत हों। उन्होंने अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहे हो उर्वरकों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा था कि खेतों में निवेश घटाकर अच्छी फसल लेनी होगी।
शालीनता के कायल हुए थे सभी लोग
दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंचे प्रणब दा की शालीनता के सभी कायल रहे। पहुंचते ही उन्होंने हाथ जोड़कर विनम्र भाव से समारोह में मौजूद लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद ही वह मंच पर आसीन हुए और लोगों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
काशीपुर आईआईएम के पहले दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे डॉ. प्रणब मुखर्जी
पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणब मुखर्जी वर्ष 2013 में काशीपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। अपने उद्बोधन में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा था कि देश के राजनैतिक और आर्थिक विकास के लिए यह आवश्यक है कि विकास का ढांचा ऐसा हो जिससे देश के गरीब वर्ग को लाभ मिल सके। इनका सामना करने के लिए देश को जमीन से जुड़े नेताओं की जरूरत है। जिनकी प्राथमिकता लोगों की कठिनाइयों को समझकर उनका समाधान करना हो।
आईआईएम के छात्रों से प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि वह समस्याओं की जड़ में जाकर उनका समाधान करें। उन्हें आशा है कि आईआईएम शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी संस्थान बनेगा। भारतीय उद्योग को वैश्विक औद्योगिक विकास के मुकाबले उत्कृष्ट बनाने के लिए रणनीति बनाने पर भी उन्होंने जोर दिया था।
उस दौरान समारोह में राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी, तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री जितिन प्रसाद, आईआईएम के गर्वनिंग बाडी के अध्यक्ष ध्रुव एम स्वामी, निदेशक आईआईएम डॉ. गौतम सिन्हा, सांसद प्रदीप टम्टा, सांसद केसी सिंह बाबा आदि भी मौजूद रहे थे।