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किसान विरोधी तीनों कानून हों वापस : पाल
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सितारगंज में पत्रकारों से बातचीत करते पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र सिंह पाल।
- फोटो : SITARGANJ
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पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र सिंह पाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि सुधार कानून पारित कर कृषि क्षेत्र पर कारपोरेट के कब्जे का प्रयास किया है। इन तीनों कानूनों को जल्द वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने लालकुआं से सितारगंज होते हुए खटीमा तक लंबित रेलवे लाइन का मुद्दा भी उठाया।
मंगलवार को बिज्टी चौराहा स्थित किसान राइस मिल में पूर्व सांसद पाल ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि देश के किसानों की बिना रायशुमारी के सरकार ने तीन काले कानून लागू कर दिए। इससे किसान आज सड़क पर हैं। काफी समय से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन चल रहा है लेकिन सरकार हठधर्मिता अपना रही है और कानूनों का वापस नहीं लिया जा रहा है।
पूर्व सांसद पाल ने बताया कि लालकुआं से सितारगंज होते हुए खटीमा तक रेलवे लाइन केंद्र सरकार से पारित हो चुकी है। अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। राज्य सरकार को रेल लाइन बिछाने में आ रही भूमि के मुआवजे के लिए फाइल केंद्र सरकार को भेजनी थी लेकिन सरकार इस पर मुद्दे पर गंभीर नहीं है। यह रेलवे लाइन बनने से पहाड़ जाने वाले लोगों को आसानी होगी। उन्होंने सरकार से जल्द ही रेलवे लाइन निर्माण की मांग की। वहां कांग्रेस नगराध्यक्ष हरपाल सिंह, मुंशीराम जिंदल, सरताज अहमद, एडवोकेट दयानंद सिंह, विक्कर सिंह, मूंसा सिंह आदि थे।
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मंगलवार को बिज्टी चौराहा स्थित किसान राइस मिल में पूर्व सांसद पाल ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि देश के किसानों की बिना रायशुमारी के सरकार ने तीन काले कानून लागू कर दिए। इससे किसान आज सड़क पर हैं। काफी समय से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन चल रहा है लेकिन सरकार हठधर्मिता अपना रही है और कानूनों का वापस नहीं लिया जा रहा है।
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पूर्व सांसद पाल ने बताया कि लालकुआं से सितारगंज होते हुए खटीमा तक रेलवे लाइन केंद्र सरकार से पारित हो चुकी है। अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। राज्य सरकार को रेल लाइन बिछाने में आ रही भूमि के मुआवजे के लिए फाइल केंद्र सरकार को भेजनी थी लेकिन सरकार इस पर मुद्दे पर गंभीर नहीं है। यह रेलवे लाइन बनने से पहाड़ जाने वाले लोगों को आसानी होगी। उन्होंने सरकार से जल्द ही रेलवे लाइन निर्माण की मांग की। वहां कांग्रेस नगराध्यक्ष हरपाल सिंह, मुंशीराम जिंदल, सरताज अहमद, एडवोकेट दयानंद सिंह, विक्कर सिंह, मूंसा सिंह आदि थे।
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