ओवर रेटिंग का खेल रोकने में महकमा फेल
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जिले में शराब की दुकानों में ओवर रेटिंग का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। महंगी शराब बेचकर ग्राहकों को चूना लगाकर अपनी जेब भरी जा रही हैं। विभाग नौ महीनों में ओवर रेटिंग के 41 मामले पकड़ चुका है। जुर्माना और निलंबन की कार्रवाई के बाद भी ओवर रेटिंग के खेल में कमी नहीं आई है।
जिले में अंग्रेजी शराब की 34 और देशी शराब की 68 दुकानें हैं। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में कई दुकानों में ओवर रेटिंग का खेल होता है। ग्राहकों से शराब की प्रति बोतल 5 से 20 रुपये ज्यादा वसूले जाते हैं। बीयर की बोतल में 10 से 20 रुपये ज्यादा लिए जाते हैं। ग्राहक के विरोध जताने पर कुछ जगह पैसे वापस कर दिए जाते हैं, लेकिन कई जगहों पर ग्राहक को बोतल तक नहीं दी जाती हैं। अक्सर जिले में शराब की ओवर रेटिंग को लेकर झगड़े और शिकायतें विभाग को मिलती रहती हैं।
बीते नौ महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा रुद्रपुर और खटीमा सर्किल में ओवर रेटिंग के 13-13 मामले पकड़े गए। काशीपुर सर्किल में 8 और बाजपुर सर्किल में नौ मामले पकड़े जा चुके हैं। छह दुकानें 1-1 दिन के लिए निलंबित भी की जा चुकी हैं। रुद्रपुर के गाबा चौक की अंग्रेजी शराब की दुकान तो ओवर रेटिंग में तीसरी दफा पकड़ी जा चुकी है। दुकानों में कमियां पाए जाने पर 227 बार दुकानदारों से 3 लाख 83 हजार का जुर्माना भी विभाग वसूल चुका है। विभाग की कार्रवाइयों के बावजूद ओवर रेटिंग का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जानकार बताते हैं कि रोजाना बिक्री से इतर महंगी शराब बेचने पर हजारों की कमाई हो जाती है।
विभाग भी ज्यादा शिकायतें मिलने पर ही कार्रवाइयां अमल में लाता है। अगर महीनों ओवर रेट शराब बेचने के बावजूद एक दिन पकड़े भी गए तो 5 हजार रुपये का जुर्माना अनुज्ञापियों के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान होता है। ऐसे हाल में ग्राहक लुटे तो लुटे, उसकी फिक्र ही किसे है।