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Udham Singh Nagar News: कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं, अटैक आने पर हल्द्वानी-बरेली का सहारा
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रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर के एक भी सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद ही स्वीकृत नहीं है। कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने से हार्ट अटैक के मरीजों को हल्द्वानी या बरेली रेफर कर दिया जाता है।
जिले की आबादी 20 लाख से अधिक है। इसमें रुद्रपुर, काशीपुर, जसपुर, खटीमा जैसे बड़े शहर शामिल हैं लेकिन हृदय की जांच के लिए ईको, टीएमटी और एंजियोग्राफी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक अस्पतालों में नहीं हैं। इमरजेंसी में सिर्फ ईसीजी और प्राथमिक उपचार देकर मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। सबसे बड़ी समस्या एंबुलेंस से हल्द्वानी पहुंचने की है। रुद्रपुर से हल्द्वानी की दूरी करीब 50 किमी और काशीपुर से 70 किमी है। बारिश के दिनों में गदरपुर-हल्द्वानी मार्ग पर जाम और गड्ढों के कारण एंबुलेंस को डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं। कई बार मरीज की जान भी खतरे में पड़ जाती है।
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गोल्डन ऑवर में नहीं मिल पाता कई बार इलाज
हार्ट अटैक में जिसे गोल्डन ऑवर कहा जाता है वह रास्ते में ही निकल जाता है। कई बार 108 एंबुलेंस में कार्डियक मॉनिटर तक काम नहीं करता। अटेंडेंट भी प्रशिक्षित नहीं होते। निजी अस्पतालों में एक-दो हृदय रोग विशेषज्ञ हैं लेकिन उनकी फीस आम आदमी की पहुंच से बाहर है।
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कोट:
शासन को विशेषज्ञों के पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हृदय के मरीजों को अभी हल्द्वानी एसटीएच ले जाना पड़ता है। -डॉ. एसके गोस्वामी, सीएमओ।
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सरकारी अस्पताल में दिल का इलाज भगवान भरोसे
विश्व हृदय दिवस विशेष:
-हृदय रोग विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रही लाखों की मशीनें, 11 साल से अस्पताल को नहीं मिला डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
काशीपुर। एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त पड़ा है। हृदय रोगियों को इलाल कराने के लिए निजी अस्पतालों में या अन्यत्र शहरों का रुख करना पड़ता है।
वर्ष 1986 में अस्पताल के परिसर में बने हृदय चिकित्सा केंद्र का निर्माण सहकारी गन्ना समिति ने कराया था। इसका शुभारंभ तत्कालीन विदेश मंत्री एनडी तिवारी ने किया था। वर्ष 1997 से डॉ. बीसी जोशी ने हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दी थीं। 25 जून 2015 तक उन्होंने अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। उस समय केंद्र में हृदय बीमारी से ग्रसित मरीजों की भीड़ लगी रहती थी। उनके कार्यकाल में करीब 200 मरीज ओपीडी में रोजाना जांच कराने आते थे। इनमें उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लोग भी शामिल थे। डॉ. जोशी के तबादले के बाद से लाखों रुपये की मशीनें बंद कमरे में रखी धूल फांक रही हैं। दो साल पूर्व सीएसआर के माध्यम से इसकी कायाकल्प भी हो चुका है। मई में अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने हार्ट सेंटर सुचारू करने की बात कही थी। इस पर आज तक अमल नीं हो सका है।
कोट:
हृदय रोग विशेषज्ञ पूरे प्रदेश में नहीं है। काशीपुर केंद्र में चिकित्सक की व्यवस्था के लिए डीजी से बात की जाएगी। -डॉ. केके अग्रवाल, निदेशक, कुमाऊं मंडल
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जिले की आबादी 20 लाख से अधिक है। इसमें रुद्रपुर, काशीपुर, जसपुर, खटीमा जैसे बड़े शहर शामिल हैं लेकिन हृदय की जांच के लिए ईको, टीएमटी और एंजियोग्राफी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक अस्पतालों में नहीं हैं। इमरजेंसी में सिर्फ ईसीजी और प्राथमिक उपचार देकर मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। सबसे बड़ी समस्या एंबुलेंस से हल्द्वानी पहुंचने की है। रुद्रपुर से हल्द्वानी की दूरी करीब 50 किमी और काशीपुर से 70 किमी है। बारिश के दिनों में गदरपुर-हल्द्वानी मार्ग पर जाम और गड्ढों के कारण एंबुलेंस को डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं। कई बार मरीज की जान भी खतरे में पड़ जाती है।
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गोल्डन ऑवर में नहीं मिल पाता कई बार इलाज
हार्ट अटैक में जिसे गोल्डन ऑवर कहा जाता है वह रास्ते में ही निकल जाता है। कई बार 108 एंबुलेंस में कार्डियक मॉनिटर तक काम नहीं करता। अटेंडेंट भी प्रशिक्षित नहीं होते। निजी अस्पतालों में एक-दो हृदय रोग विशेषज्ञ हैं लेकिन उनकी फीस आम आदमी की पहुंच से बाहर है।
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कोट:
शासन को विशेषज्ञों के पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हृदय के मरीजों को अभी हल्द्वानी एसटीएच ले जाना पड़ता है। -डॉ. एसके गोस्वामी, सीएमओ।
सरकारी अस्पताल में दिल का इलाज भगवान भरोसे
विश्व हृदय दिवस विशेष:
-हृदय रोग विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रही लाखों की मशीनें, 11 साल से अस्पताल को नहीं मिला डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
काशीपुर। एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त पड़ा है। हृदय रोगियों को इलाल कराने के लिए निजी अस्पतालों में या अन्यत्र शहरों का रुख करना पड़ता है।
वर्ष 1986 में अस्पताल के परिसर में बने हृदय चिकित्सा केंद्र का निर्माण सहकारी गन्ना समिति ने कराया था। इसका शुभारंभ तत्कालीन विदेश मंत्री एनडी तिवारी ने किया था। वर्ष 1997 से डॉ. बीसी जोशी ने हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दी थीं। 25 जून 2015 तक उन्होंने अस्पताल में अपनी सेवाएं दीं। उस समय केंद्र में हृदय बीमारी से ग्रसित मरीजों की भीड़ लगी रहती थी। उनके कार्यकाल में करीब 200 मरीज ओपीडी में रोजाना जांच कराने आते थे। इनमें उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लोग भी शामिल थे। डॉ. जोशी के तबादले के बाद से लाखों रुपये की मशीनें बंद कमरे में रखी धूल फांक रही हैं। दो साल पूर्व सीएसआर के माध्यम से इसकी कायाकल्प भी हो चुका है। मई में अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने हार्ट सेंटर सुचारू करने की बात कही थी। इस पर आज तक अमल नीं हो सका है।
कोट:
हृदय रोग विशेषज्ञ पूरे प्रदेश में नहीं है। काशीपुर केंद्र में चिकित्सक की व्यवस्था के लिए डीजी से बात की जाएगी। -डॉ. केके अग्रवाल, निदेशक, कुमाऊं मंडल