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Udham Singh Nagar News: ऑटिज्म की चपेट में आ रहे हैं बच्चे
Mon, 20 Nov 2023 12:45 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 20 Nov 2023 12:45 AM IST
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विवेक मेहरा
रुद्रपुर। जिले में ऑटिज्म की बीमारी तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। ऑटिज्म के लक्षणों का आसानी से पता नहीं लगने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। वर्तमान में 40 बच्चे डीईआईसी (जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र) में इलाज करवा रहे हैं। केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल ऑटिज्म के मरीजों की संख्या 10 थी।
कोविड में अधिकतम समय फोन और टीवी देखने की आदत ने बच्चों के व्यवहार में कई बदलाव ला दिए हैं। इसके चलते बच्चे ऑटिज्म के शिकार हो रहे हैं। जागरूकता के अभाव में परिजनों को बीमारी के लक्षण समझने में तीन साल तक का समय लग जाता है। दिखने में सामान्य लगने वाले लक्षणों का बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर घातक असर हो सकरा है। चिकित्सकों के अनुसार ऑटिज्म के शिकार बच्चों में सामान्य से दिखने वाले व्यावहारिक बदलाव होते हैं। समय पर इलाज न कराने पर बढ़ती उम्र के साथ यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। डीईआइसी में ऑटिज्म के एक प्रकार वर्चुअल ऑटिज्म के मरीज एक साल में 70 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
ये हैं लक्षण
दूसरे लोगों से नजरें चुराना, आंखें न मिलाना
ज्यादातर अकेले खेलना
हाइपर एक्टिव होना, गुमसुम रहना
कार्टून कैरेक्टर की आवाज में जवाब देना
अपने आसपास हो रही घटना से अंजान
बार बार चीजों को घुमाना, गोलमोल जवाब देना
सावधानियां-
ऑटिज्म के बारे में पढ़ें और इसे बच्चे का आम व्यवहार न समझें। ऐसे लक्षण मिलने पर बच्चे को नजदीकी डीईआईसी केंद्र में ले जाएं। केंद्र में बाल चिकित्सक के परामर्श के बाद थेरेपी शुरू कराएं।
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मनोचिकित्सक बच्चे के व्यवहार को समझ कर व्यायाम, स्पीच थैरेपी और अन्य थैरेपी कराते हैं। परिजनों को भी बच्चों के व्यवहार में नजर बनाएं रखने को कहा जाता है। धीरे धीरे बच्चे के व्यवहार में बदलाव आना शुरू होता है। उनका कहना है कि डाक्टर इलाज अधूरा ना छोड़ें। थैरेपी ही इसका एकमात्र इलाज हैं।
अंधविश्वास के चंगुल में पड़ना हो सकता है घातक
रुद्रपुर। परिजन बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलाव को दैवी प्रकोप समझकर इलाज नहीं कराते हैं। वे सिर्फ कर्मकांड के सहारे रह जाते हैं। इससे समय पर इलाज नहीं मिलने से बच्चे का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
डीईआइसी केंद्र में कई बच्चे ऑटिज्म से निजात पाने के लिए थैरेपी करवा रहे हैं। इस बीमारी से लड़ने के लिए अभिभावकों का जागरूक होना जरूरी है। अभिभावक जागरूक होंगेे तभी इसके लक्षणों का पता लग पाएगा। थैरेपी से ठीक होकर बच्चा अपना सामान्य जीवन जी सकता है। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डॉक्टर से परामर्श लें। -डॉ. मनोज शर्मा, सीएमओ ऊधमसिंह नगर
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रुद्रपुर। जिले में ऑटिज्म की बीमारी तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। ऑटिज्म के लक्षणों का आसानी से पता नहीं लगने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। वर्तमान में 40 बच्चे डीईआईसी (जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र) में इलाज करवा रहे हैं। केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल ऑटिज्म के मरीजों की संख्या 10 थी।
कोविड में अधिकतम समय फोन और टीवी देखने की आदत ने बच्चों के व्यवहार में कई बदलाव ला दिए हैं। इसके चलते बच्चे ऑटिज्म के शिकार हो रहे हैं। जागरूकता के अभाव में परिजनों को बीमारी के लक्षण समझने में तीन साल तक का समय लग जाता है। दिखने में सामान्य लगने वाले लक्षणों का बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर घातक असर हो सकरा है। चिकित्सकों के अनुसार ऑटिज्म के शिकार बच्चों में सामान्य से दिखने वाले व्यावहारिक बदलाव होते हैं। समय पर इलाज न कराने पर बढ़ती उम्र के साथ यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। डीईआइसी में ऑटिज्म के एक प्रकार वर्चुअल ऑटिज्म के मरीज एक साल में 70 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
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ये हैं लक्षण
दूसरे लोगों से नजरें चुराना, आंखें न मिलाना
ज्यादातर अकेले खेलना
हाइपर एक्टिव होना, गुमसुम रहना
कार्टून कैरेक्टर की आवाज में जवाब देना
अपने आसपास हो रही घटना से अंजान
बार बार चीजों को घुमाना, गोलमोल जवाब देना
सावधानियां-
ऑटिज्म के बारे में पढ़ें और इसे बच्चे का आम व्यवहार न समझें। ऐसे लक्षण मिलने पर बच्चे को नजदीकी डीईआईसी केंद्र में ले जाएं। केंद्र में बाल चिकित्सक के परामर्श के बाद थेरेपी शुरू कराएं।
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मनोचिकित्सक बच्चे के व्यवहार को समझ कर व्यायाम, स्पीच थैरेपी और अन्य थैरेपी कराते हैं। परिजनों को भी बच्चों के व्यवहार में नजर बनाएं रखने को कहा जाता है। धीरे धीरे बच्चे के व्यवहार में बदलाव आना शुरू होता है। उनका कहना है कि डाक्टर इलाज अधूरा ना छोड़ें। थैरेपी ही इसका एकमात्र इलाज हैं।
अंधविश्वास के चंगुल में पड़ना हो सकता है घातक
रुद्रपुर। परिजन बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलाव को दैवी प्रकोप समझकर इलाज नहीं कराते हैं। वे सिर्फ कर्मकांड के सहारे रह जाते हैं। इससे समय पर इलाज नहीं मिलने से बच्चे का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
डीईआइसी केंद्र में कई बच्चे ऑटिज्म से निजात पाने के लिए थैरेपी करवा रहे हैं। इस बीमारी से लड़ने के लिए अभिभावकों का जागरूक होना जरूरी है। अभिभावक जागरूक होंगेे तभी इसके लक्षणों का पता लग पाएगा। थैरेपी से ठीक होकर बच्चा अपना सामान्य जीवन जी सकता है। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डॉक्टर से परामर्श लें। -डॉ. मनोज शर्मा, सीएमओ ऊधमसिंह नगर