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Udham Singh Nagar News: ईएसआई मामले में कोर्ट में हाजिर हुए पूर्व कुलपति डाॅ. प्रताप
Tue, 20 Jun 2023 11:47 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 20 Jun 2023 11:47 PM IST
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पंतनगर। दिसंबर 2021 में ईएसआई के रिकवरी विभाग ने वर्ष 2016-17 की जीबी पंत विवि पर 1.92 करोड़ रुपये की देनदारी पर ब्याज सहित 3.09 करोड़ रुपये की रिकवरी कर ली थी जिससे विवि प्रशासन सकते में आ गया और उसने बैंक सहित ईएसआई पर केस किया था। इसके बाद सर्वे के लिए विवि आई ईएसआई की टीम से तत्कालीन निदेशक प्रशासन ने अभद्रता कर दी थी। मामले में ईएसआई ने तत्कालीन कुलपति डाॅ. तेज प्रताप को पार्टी बनाते हुए सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस दर्ज किया था।
इसी मामले में सीजेएम कोर्ट ने डाॅ. प्रताप को समन जारी कर मंगलवार को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। डाॅ. प्रताप तय समय पर कोर्ट में हाजिर भी हुए लेकिन मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के चलते उन्हें अगली तारीख दे दी गई। दरअसल केंद्रीय श्रम मंत्रालय की कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत 15 हजार रुपये तक आय वाले कर्मचारियों को ईएसआई हाॅस्पिटल व उससे संबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। जिसके एवज में प्रतिमाह कुछ धनराशि कर्मचारी के वेतन से और बाकी रकम नियोक्ता वहन करता है। सरकार ने जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के ठेका कर्मियों को ईएसआई का लाभ वर्ष 2016 से देने के आदेश दिए थे। जिसकी प्रतिपूर्ति के लिए विवि प्रशासन ने राज्य सरकार से ईएसआई मद में खर्च होने वाली 1.92 करोड़ रुपये धनराशि की मांग की थी। विवि ने कई बार इसके लिए शासन से पत्राचार भी किया लेकिन शासन से विवि को राशि उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद शासन के मौखिक आदेश पर विवि में ठेका कर्मियों के लिए यह सुविधा अप्रैल 2021 से लागू की गई। अब ठेका कर्मियों के वेतन से कटौती के साथ ही नियोक्ता का अंश वाह्य सेवा प्रदाता कंपनी वहन कर रही है।
किसी भी संस्थान के क्रिया कलापों का जिम्मेदार मुखिया होता है। मामले में ईएसआई के विधि अनुभाग की ओर से तत्कालीन कुलपति के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने की तहरीर दी गई थी। मंगलवार के घटनाक्रम की मुझे कोई जानकारी नहीं है।-पीबी गुरूंग, उपायुक्त विधि अनुभाग ईएसआई।
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इसी मामले में सीजेएम कोर्ट ने डाॅ. प्रताप को समन जारी कर मंगलवार को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। डाॅ. प्रताप तय समय पर कोर्ट में हाजिर भी हुए लेकिन मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के चलते उन्हें अगली तारीख दे दी गई। दरअसल केंद्रीय श्रम मंत्रालय की कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत 15 हजार रुपये तक आय वाले कर्मचारियों को ईएसआई हाॅस्पिटल व उससे संबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। जिसके एवज में प्रतिमाह कुछ धनराशि कर्मचारी के वेतन से और बाकी रकम नियोक्ता वहन करता है। सरकार ने जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के ठेका कर्मियों को ईएसआई का लाभ वर्ष 2016 से देने के आदेश दिए थे। जिसकी प्रतिपूर्ति के लिए विवि प्रशासन ने राज्य सरकार से ईएसआई मद में खर्च होने वाली 1.92 करोड़ रुपये धनराशि की मांग की थी। विवि ने कई बार इसके लिए शासन से पत्राचार भी किया लेकिन शासन से विवि को राशि उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद शासन के मौखिक आदेश पर विवि में ठेका कर्मियों के लिए यह सुविधा अप्रैल 2021 से लागू की गई। अब ठेका कर्मियों के वेतन से कटौती के साथ ही नियोक्ता का अंश वाह्य सेवा प्रदाता कंपनी वहन कर रही है।
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किसी भी संस्थान के क्रिया कलापों का जिम्मेदार मुखिया होता है। मामले में ईएसआई के विधि अनुभाग की ओर से तत्कालीन कुलपति के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने की तहरीर दी गई थी। मंगलवार के घटनाक्रम की मुझे कोई जानकारी नहीं है।-पीबी गुरूंग, उपायुक्त विधि अनुभाग ईएसआई।
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