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11 वर्षों तक फाइलों में दबा रहा जनश्री बीमा योजना घोटाले का कच्चा चिठ्ठा
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काशीपुर। जनश्री बीमा योजना में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट 11 वर्षों तक विभागीय अधिकारी दबाए बैठे रहे। कई बार शिकायतें होने और डीएम के जनसुनवाई कैंप में उठाने के बाद भी सरकारी राशि के गबन के मामले में कार्रवाई नहीं हो सकी। जब नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, तब विभाग की नींद टूटी। इसके बाद हरकत में आए विभागीय अधिकारियों ने दस साल से दबी पड़ी फाइल खोज निकाली। जांच के बाद विभिन्न विभागों के 12 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
बीपीएल परिवारों के लिए राज्य बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम की जनश्री बीमा योजना शुरू की गई थी। स्वाभाविक मौत होने पर आश्रितों को 30 हजार और दुर्घटना में मौत पर 75 हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। इसके लिए प्रति व्यक्ति का सौ रुपये का बीमा कराना होता था। दुघर्टना के एक साल की अवधि में आवेदन करने पर इस योजना का लाभ मिलता था। वर्ष 2007-08 के दौरान इस योजना के तहत काफी संख्या में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आवेदन किए गए।
अकेले फिरोजपुर गांव से ही 17 परिवारों ने इस योजना का लाभ अर्जित किया। अधिकांश आश्रित इस योजना के लिए अपात्र थे। काशीपुर के अलावा जिले के दूसरे ब्लाकों में फर्जी आवेदनों पर क्लेम की राशि प्राप्त की गई। आरोप था दो महिलाओं ने एक ही मृत व्यक्ति को अपना पति दर्शाकर जनश्री बीमा योजना का लाभ ले लिया, जबकि एक जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाकर उसका बीमा क्लेम भी ले लिया था। अधिकतर दस्तावेजों पर मृतक के आश्रितों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। शिकायत पर इस मामले में तत्कालीन परगना मजिस्ट्रेट बीडी तिवारी ने जांचकर 73 पन्नों की रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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आरटीआई में पूछे जाने पर विभाग ने इस प्रकरण में कार्रवाई न होने की जानकारी दी। इस मामले को वर्ष 2008 एवं 2009 में डीएम के जनसुनवाई कैंप में भी उठाया गया। फरवरी 2019 में डीएम ने काशीपुर के एसडीएम को इस प्रकरण में कार्रवाई के निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हो सकी।
इसके बाद फिरोजपुर निवासी रामकिशोर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 24 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने डीएम से जवाब मांगा था। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की नींद खुली और करीब 12 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
धोखाधड़ी में फिरोजपुर निवासी दंपति के खिलाफ हुआ था मुकदमा
काशीपुर। जनश्री बीमा योजना के तहत की गई जांच में ग्राम फिरोजपुर निवासी मथुरीलाल गौतम और उसकी पत्नी सपना गौतम की भूमिका संदिग्ध पाई थी। इस मामले में फिरोजपुर निवासी रामवती ने नौ फरवरी 2008 को काशीपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मथुरीलाल उसकी पत्नी सपना ने फर्जी दस्तावेज बनाकर उसके दिवंगत पति सतपाल के नाम से क्लेम की राशि प्राप्त कर ली। तहरीर पर पुलिस ने उक्त दंपति के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 506 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिस पर पुलिस ने मथुरीलाल को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वादी के पक्षद्रोही में होने पर यह मुकदमा छूट गया था।
सरकारी गबन होने पर भी नही चेता था विभाग
काशीपुर। जनश्री बीमा योजना में धांधली को लेकर रामकिशोर की दायर याचिका में कहा गया कि इसमें सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। इसके चलते इसमें कार्रवाई विभागीय स्तर पर होनी चाहिए। गबन के मामले में किसी व्यक्ति विशेष की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने का कोई औचित्य नहीं है। अब तक विभाग मामले को इस आधार पर दबाए हुए था कि इस फर्जीवाड़े में शामिल फिरोजपुर निवासी दंपति के खिलाफ मुकदमा हो चुका है। इससे इतर, इस घोटाले में पोस्ट ऑफिस, बैंक अधिकारियों, एलआईसी अधिकारियों व ब्लॉक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका पर विभागीय अधिकारी मौन रहे, जबकि वास्तव में उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। इन्हीं बिंदुओं पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी से जवाब मांगा था।
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बीपीएल परिवारों के लिए राज्य बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम की जनश्री बीमा योजना शुरू की गई थी। स्वाभाविक मौत होने पर आश्रितों को 30 हजार और दुर्घटना में मौत पर 75 हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। इसके लिए प्रति व्यक्ति का सौ रुपये का बीमा कराना होता था। दुघर्टना के एक साल की अवधि में आवेदन करने पर इस योजना का लाभ मिलता था। वर्ष 2007-08 के दौरान इस योजना के तहत काफी संख्या में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आवेदन किए गए।
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अकेले फिरोजपुर गांव से ही 17 परिवारों ने इस योजना का लाभ अर्जित किया। अधिकांश आश्रित इस योजना के लिए अपात्र थे। काशीपुर के अलावा जिले के दूसरे ब्लाकों में फर्जी आवेदनों पर क्लेम की राशि प्राप्त की गई। आरोप था दो महिलाओं ने एक ही मृत व्यक्ति को अपना पति दर्शाकर जनश्री बीमा योजना का लाभ ले लिया, जबकि एक जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाकर उसका बीमा क्लेम भी ले लिया था। अधिकतर दस्तावेजों पर मृतक के आश्रितों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। शिकायत पर इस मामले में तत्कालीन परगना मजिस्ट्रेट बीडी तिवारी ने जांचकर 73 पन्नों की रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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आरटीआई में पूछे जाने पर विभाग ने इस प्रकरण में कार्रवाई न होने की जानकारी दी। इस मामले को वर्ष 2008 एवं 2009 में डीएम के जनसुनवाई कैंप में भी उठाया गया। फरवरी 2019 में डीएम ने काशीपुर के एसडीएम को इस प्रकरण में कार्रवाई के निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हो सकी।
इसके बाद फिरोजपुर निवासी रामकिशोर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 24 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने डीएम से जवाब मांगा था। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की नींद खुली और करीब 12 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
धोखाधड़ी में फिरोजपुर निवासी दंपति के खिलाफ हुआ था मुकदमा
काशीपुर। जनश्री बीमा योजना के तहत की गई जांच में ग्राम फिरोजपुर निवासी मथुरीलाल गौतम और उसकी पत्नी सपना गौतम की भूमिका संदिग्ध पाई थी। इस मामले में फिरोजपुर निवासी रामवती ने नौ फरवरी 2008 को काशीपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मथुरीलाल उसकी पत्नी सपना ने फर्जी दस्तावेज बनाकर उसके दिवंगत पति सतपाल के नाम से क्लेम की राशि प्राप्त कर ली। तहरीर पर पुलिस ने उक्त दंपति के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 506 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिस पर पुलिस ने मथुरीलाल को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वादी के पक्षद्रोही में होने पर यह मुकदमा छूट गया था।
सरकारी गबन होने पर भी नही चेता था विभाग
काशीपुर। जनश्री बीमा योजना में धांधली को लेकर रामकिशोर की दायर याचिका में कहा गया कि इसमें सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। इसके चलते इसमें कार्रवाई विभागीय स्तर पर होनी चाहिए। गबन के मामले में किसी व्यक्ति विशेष की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने का कोई औचित्य नहीं है। अब तक विभाग मामले को इस आधार पर दबाए हुए था कि इस फर्जीवाड़े में शामिल फिरोजपुर निवासी दंपति के खिलाफ मुकदमा हो चुका है। इससे इतर, इस घोटाले में पोस्ट ऑफिस, बैंक अधिकारियों, एलआईसी अधिकारियों व ब्लॉक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका पर विभागीय अधिकारी मौन रहे, जबकि वास्तव में उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। इन्हीं बिंदुओं पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी से जवाब मांगा था।