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Udham Singh Nagar News: बार-बार आ रहे भूकंप को लेकर भूगर्भ वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी
Sat, 17 Oct 2026 12:34 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:34 AM IST
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काशीपुर। उत्तराखंड में हाल के महीनों में महसूस किए गए भूकंप के झटकों ने हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के लगातार टकराव से जमीन के नीचे ऊर्जा जमा हो रही है। हालांकि छोटे भूकंपों के आधार पर किसी बड़े भूकंप के आने का समय तय नहीं किया जा सकता।
भूगर्भीय अध्ययनों के अनुसार कुमाऊं क्षेत्र में वर्ष 1505 में बड़ा भूकंप आया था। उसका केंद्र रामनगर के आसपास माना जाता है। इसके साक्ष्य रामनगर से ललढांग तक मिले हैं। इसके बाद 1803 और 1833 में भी भूकंप आए लेकिन उनकी तीव्रता 1505 जैसी नहीं थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में लंबे समय से जमा हो रही टेक्टोनिक ऊर्जा बड़े भूकंप की आशंका को गंभीर बनाती है।
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आईआईटी कानपुर की टीम ने किया था अध्ययन
संभावित खतरे को समझने के लिए आईआईटी कानपुर के प्रो. जावेद मलिक के नेतृत्व में टीम ने 12 फरवरी 2020 को रामनगर के नंदपुर गैबुआ में सर्वे किया था। टीम ने सक्रिय भ्रंशों की स्थलाकृति का अध्ययन किया और जमीन में गड्ढे खोदकर प्राचीन भूकंपों के साक्ष्य जुटाए। प्रो. मलिक के अनुसार भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है, जिससे भूगर्भ में ऊर्जा जमा होती है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान और आईआईटी कानपुर के संयुक्त अध्ययन में भी गढ़वाल-कुमाऊं क्षेत्र को भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील बताया गया है।
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अक्तूबर में भी दर्ज हुए भूकंप के झटके
6 अक्तूबर 2026: चमोली जिले में रात 10:15 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र जमीन से 13 किलोमीटर की गहराई में था। इसके झटके दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में महसूस किए गए।
10 अक्तूबर 2026: उत्तरकाशी में रात 8:07 बजे 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र उत्तरकाशी से दो किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में 11 किलोमीटर की गहराई पर था। इसी दिन बागेश्वर में 2.8 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज हुआ। उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में भी हल्के झटके महसूस किए गए।
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कोट
भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है, जिससे भूगर्भ में ऊर्जा जमा हो रही है। इस क्षेत्र में सात मीटर से अधिक की स्लिप जमा होने का अनुमान है। -प्रो. जावेद मलिक, भूगर्भ वैज्ञानिक, आईआईटी कानपुर
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भूगर्भीय अध्ययनों के अनुसार कुमाऊं क्षेत्र में वर्ष 1505 में बड़ा भूकंप आया था। उसका केंद्र रामनगर के आसपास माना जाता है। इसके साक्ष्य रामनगर से ललढांग तक मिले हैं। इसके बाद 1803 और 1833 में भी भूकंप आए लेकिन उनकी तीव्रता 1505 जैसी नहीं थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में लंबे समय से जमा हो रही टेक्टोनिक ऊर्जा बड़े भूकंप की आशंका को गंभीर बनाती है।
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आईआईटी कानपुर की टीम ने किया था अध्ययन
संभावित खतरे को समझने के लिए आईआईटी कानपुर के प्रो. जावेद मलिक के नेतृत्व में टीम ने 12 फरवरी 2020 को रामनगर के नंदपुर गैबुआ में सर्वे किया था। टीम ने सक्रिय भ्रंशों की स्थलाकृति का अध्ययन किया और जमीन में गड्ढे खोदकर प्राचीन भूकंपों के साक्ष्य जुटाए। प्रो. मलिक के अनुसार भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है, जिससे भूगर्भ में ऊर्जा जमा होती है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान और आईआईटी कानपुर के संयुक्त अध्ययन में भी गढ़वाल-कुमाऊं क्षेत्र को भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील बताया गया है।
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अक्तूबर में भी दर्ज हुए भूकंप के झटके
6 अक्तूबर 2026: चमोली जिले में रात 10:15 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र जमीन से 13 किलोमीटर की गहराई में था। इसके झटके दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में महसूस किए गए।
10 अक्तूबर 2026: उत्तरकाशी में रात 8:07 बजे 4.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र उत्तरकाशी से दो किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में 11 किलोमीटर की गहराई पर था। इसी दिन बागेश्वर में 2.8 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज हुआ। उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में भी हल्के झटके महसूस किए गए।
कोट
भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है, जिससे भूगर्भ में ऊर्जा जमा हो रही है। इस क्षेत्र में सात मीटर से अधिक की स्लिप जमा होने का अनुमान है। -प्रो. जावेद मलिक, भूगर्भ वैज्ञानिक, आईआईटी कानपुर