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दीवाली पर छाया माौत का साया
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/सितारगंज।
Updated Thu, 12 Nov 2015 11:54 PM IST
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सितारगंज। शहर रोशनी से गुलजार था। हर तरफ पटाखों की आवाज गूंज रही थी। लेकिन, इंदिरानगर गांव में दो पक्षों के बीच पटाखे जलाने को लेकर खूनी संघर्ष में जनार्दन प्रसाद की हत्या के बाद उसके घर में जगमगा रही दिवाली की रोशनी पर मौत का अंधेरा छा गया। मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ था तो गांव में भी मातम पसरा रहा।
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बुधवार रात दिवाली के पवित्र त्योहार पर इंदिरानगर गांव में मछली विक्रेता जनार्दन प्रसाद की हत्या का दिन इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
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मृतक जनार्दन का बेटा पिछले करीब दो माह से गोरखपुर के मेडिकल कालेज में काम कर रहा था और दिवाली मनाने के लिए त्योहार से एक दिन पहले ही घर आया था। अस्पताल में पिता की मौत पर विलाप कर रहे उमेश व उसकी पत्नी राजमती ने रूंधे गले से कहा कि दो साल पहले मां मीरा देवी उन्हें छोड़ दुनिया से चल बसी और आज खुशी के दिन उसके पिता की हत्या कर दी गई।
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मृतक की साली राजकुमारी ने बताया कि दिवाली के दीये रोशन कर पूजा अर्चना के बाद जीजा जनार्दन भोजन करने के लिए बैठे थे। जिन्हें छोटी बहू चंदन की पत्नी बिंदु ने भोजन परोसा ही था कि इतने में झगड़ा हो गया। चीख पुकार मच गई।
गांव के लोग एकत्र हो गए। हत्यारोपियों को समझाने की कोशिश की गई। लेकिन, किसी ने भी एक न सुनी और निर्मम उनकी हत्या कर दी।
चंदन ने बताया कि वह तीन भाई-बहन हैं। उमेश बड़ा और वह छोटा भाई है। इसके अलावा बहन रीता है। जिसकी शादी तिलियापुर गांव में की गई है। झगड़े से पहले घर में दिवाली की खुशियां मनाई जा रही थीं। सब खुश थे। लेकिन, ये खुशियां एक पल में ही गम में तब्दील हो गईं।