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प्रबंधक पद पर विवाद बरकरार, अब 14 का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो नानकमत्ता।
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:27 AM IST
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नानकमत्ता गुरुद्वारा साहिब में दोनों पक्षों से वार्ता करती एसडीएम निर्मला बिष्ट व सीओ कमला बिष्ट।
- फोटो : amar ujala
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गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की ओर से प्रबंधक रणजीत सिंह को हटाकर दूसरी जगह भेजने पर विवाद के कारण दूसरे दिन गुरुद्वारा परिसर में भारी गहमागहमी रही। दोनों पक्षों के समर्थक गुरुद्वारा परिसर में ही मौजूद रहे। इससे तनाव बढ़ने पर पुलिस और पीएसी को मौके पर तैनात किया गया। शाम को एसडीएम और पुलिस क्षेत्राधिकारी ने गुरुद्वारा कार्यालय पहुंचकर प्रबंधक कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक की और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। एसडीएम ने सर्वसहमति से निर्णय लेने के लिए 14 जुलाई को सदस्यों की बैठक बुलाने के निर्देश दिए।
रविवार को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सेवा सिंह ने अन्य पदाधिकारियों और कुछ सदस्यों के साथ निर्णय लेते हुए गुरुद्वारा प्रबंधक रणजीत सिंह को उनके पद से हटाकर उन्हें चौमेला फार्म का सुपरवाइजर बनाने का निर्देश दिया था और उनके स्थान पर मलकीत सिंह बाजवा को गुरुद्वारा प्रबंधक नियुक्त किया था। इसपर रणजीत सिंह ने बिना नोटिस के उन्हें पद से हटाने का विरोध किया, जिस पर दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। देर रात दोनों पक्षों ने एक दूसरे के विरुद्ध थाना पुलिस को तहरीर सौंपी थी।
सोमवार को दोनों पक्षों के बीच गहमागहमी का माहौल रहा। प्रबंधक रणजीत सिंह अपने पद पर बरकरार रहते हुए अपने कार्य करते रहे। वहीं नवनियुक्त प्रबंधक मलकीत सिंह भी कार्यालय के एक कक्ष में बैठे नजर आए। दोनों पक्षों के समर्थक भी गुरुद्वारा परिसर में ही जमे रहे। तनाव को देख पुलिस और पीएसी गुरुद्वारा परिसर में तैनात रही।
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गुरुद्वारे में मौजूद सदस्य ने बताया कि प्रधान सेवा सिंह ने बिना आम सहमति के स्वयं निर्णय लेते हुए मलकीत सिंह के प्रबंधक के नाम की घोषणा की है। शाम करीब पांच बजे एसडीएम निर्मला बिष्ट और पुलिस क्षेत्राधिकारी कमला बिष्ट, थानाध्यक्ष दौलत राम वर्मा ने गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने सदस्यों को विवाद को समाप्त करने के लिए 14 जुलाई को सभी सदस्यों की बैठक बुलाकर सर्वसहमति से निर्णय लेकर विवाद का पटाक्षेप करने के निर्देश दिए।
सीओ कमला बिष्ट ने शांतिभंग होने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। वहां गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, सदस्य धन्ना सिंह, कुलदीप सिंह पन्नू, निशान सिंह, जरनैल सिंह, महेंद्र सिंह, हर भाग सिंह, हरचंद सिंह, प्रकाश सिंह, जसवंत सिंह, त्रिलोक सिंह बघोरा, गुरुद्वारा प्रबंधक रणजीत सिंह, मलकीत सिंह आदि थे।
णजीत सिंह के पास गुरुद्वारे का कार्यवाहक प्रबंधक का प्रभार था जो वह पिछले 10 वर्षों से निभा रहे थे। रिसीवर के कार्यकाल में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्हें हटाया नहीं गया है बल्कि स्थानांतरित करते हुए चोमेला फार्म का मैनेजर नियुक्त किया गया है। 14 जुलाई की बैठक का एजेंडा स्थायी तौर पर प्रबंधक की नियुक्ति का है, जिस पर सभी सदस्य विचार करेंगे। - सरदार सेवा सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
कोट - मैं वर्ष 1991 से गुरुद्वारा साहिब की सेवा करता आ रहा हूं। 1991 में लेखाधिकारी, 1994 से 1997 तक के कैशियर और वर्ष 2008 से अब तक बतौर प्रबंधक के पद पर अपनी सेवाएं देते आ रहा हूं। नवनियुक्त प्रबंधन कमेटी ने अकारण मेरे खिलाफ निर्णय लेते हुए मुझे बिना किसी नोटिस के कमेटी के सदस्यों को विश्वास में न ले जबरन पद से हटाने का प्रयास किया। कमेटी के सभी सदस्य यदि सर्वसहमति से निर्णय लेते हैं तो मैं तत्काल प्रबंधक पद से त्यागपत्र दे दूंगा। - रणजीत सिंह
हठधर्मिता के कारण चार्ज नहीं सौंप रहे रणजीत : मलकीत सिंह
नवनियुक्त प्रबंधक मलकीत सिंह ने प्रेस वार्ता कर बताया कि गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंधन कमेटी ने उन्हें प्रबंधक के पद पर नियुक्त किया है। कहा कि कमेटी ने रणजीत सिंह को गुरुद्वारा साहिब के चोमेला फार्म का प्रबंधक बनाया है। कहा कि रणजीत सिंह अपनी हठधर्मिता के चलते प्रबंधक पद का चार्ज मुझे नहीं सौंप रहे हैं। कहा कि 14 जुलाई को होने वाली मेंबरों की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा वह सर्वमान्य होगा।
प्रबंधन को लेकर विवादों का है पुराना नाता
नानकमत्ता। गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंधन कमेटी को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। गुरुद्वारा प्रबंधन के विवाद को थामने के लिए हाईकोर्ट नैनीताल ने अप्रैल 2006 में जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को गुरुद्वारा साहिब में रिसीवर के पद पर नियुक्त किया था। दो दिसंबर 2016 तक डीएम रिसीवर के पद पर रहे। दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट के सब रजिस्ट्रार कुंवर अमरिंदर सिंह की देखरेख में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव कराया गया।
किसी भी पक्ष को पूर्ण बहुमत न मिलने पर जसविंदर सिंह गिल को सर्वसहमति से डेढ़ साल के लिए कमेटी में प्रधान बनाया गया। 20 जून 2018 को जसविंदर सिंह गिल का कार्यकाल समाप्त हो गया। लेकिन, कमेटी के उपप्रधान सेवा सिंह, महासचिव प्रीतम सिंह संधू और सचिव केहर सिंह के निलंबन के बाद फिर विवाद गहरा गया।
विवाद को निपटाने के लिए डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने सितारगंज की एसडीएम को गुरुद्वारे का रिसीवर नियुक्त कर दिया था। 30 जून 2018 को विवाद का निपटारा होने पर प्रधान सेवा सिंह ने अपना पदभार ग्रहण किया।
पदभार ग्रहण करने के सप्ताह भर बाद ही प्रशासनिक फेरबदल को लेकर विवाद हो गया है। इस के निपटारे के लिए 14 जुलाई को कमेटी के सभी सदस्यों की अहम बैठक बुलाई गई है। देखना यह है कि 14 जुलाई को विवाद का निपटारा किस सिरे पहुंचेगा...।
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रविवार को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सेवा सिंह ने अन्य पदाधिकारियों और कुछ सदस्यों के साथ निर्णय लेते हुए गुरुद्वारा प्रबंधक रणजीत सिंह को उनके पद से हटाकर उन्हें चौमेला फार्म का सुपरवाइजर बनाने का निर्देश दिया था और उनके स्थान पर मलकीत सिंह बाजवा को गुरुद्वारा प्रबंधक नियुक्त किया था। इसपर रणजीत सिंह ने बिना नोटिस के उन्हें पद से हटाने का विरोध किया, जिस पर दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। देर रात दोनों पक्षों ने एक दूसरे के विरुद्ध थाना पुलिस को तहरीर सौंपी थी।
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सोमवार को दोनों पक्षों के बीच गहमागहमी का माहौल रहा। प्रबंधक रणजीत सिंह अपने पद पर बरकरार रहते हुए अपने कार्य करते रहे। वहीं नवनियुक्त प्रबंधक मलकीत सिंह भी कार्यालय के एक कक्ष में बैठे नजर आए। दोनों पक्षों के समर्थक भी गुरुद्वारा परिसर में ही जमे रहे। तनाव को देख पुलिस और पीएसी गुरुद्वारा परिसर में तैनात रही।
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गुरुद्वारे में मौजूद सदस्य ने बताया कि प्रधान सेवा सिंह ने बिना आम सहमति के स्वयं निर्णय लेते हुए मलकीत सिंह के प्रबंधक के नाम की घोषणा की है। शाम करीब पांच बजे एसडीएम निर्मला बिष्ट और पुलिस क्षेत्राधिकारी कमला बिष्ट, थानाध्यक्ष दौलत राम वर्मा ने गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने सदस्यों को विवाद को समाप्त करने के लिए 14 जुलाई को सभी सदस्यों की बैठक बुलाकर सर्वसहमति से निर्णय लेकर विवाद का पटाक्षेप करने के निर्देश दिए।
सीओ कमला बिष्ट ने शांतिभंग होने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। वहां गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सेवा सिंह, सदस्य धन्ना सिंह, कुलदीप सिंह पन्नू, निशान सिंह, जरनैल सिंह, महेंद्र सिंह, हर भाग सिंह, हरचंद सिंह, प्रकाश सिंह, जसवंत सिंह, त्रिलोक सिंह बघोरा, गुरुद्वारा प्रबंधक रणजीत सिंह, मलकीत सिंह आदि थे।
णजीत सिंह के पास गुरुद्वारे का कार्यवाहक प्रबंधक का प्रभार था जो वह पिछले 10 वर्षों से निभा रहे थे। रिसीवर के कार्यकाल में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्हें हटाया नहीं गया है बल्कि स्थानांतरित करते हुए चोमेला फार्म का मैनेजर नियुक्त किया गया है। 14 जुलाई की बैठक का एजेंडा स्थायी तौर पर प्रबंधक की नियुक्ति का है, जिस पर सभी सदस्य विचार करेंगे। - सरदार सेवा सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
कोट - मैं वर्ष 1991 से गुरुद्वारा साहिब की सेवा करता आ रहा हूं। 1991 में लेखाधिकारी, 1994 से 1997 तक के कैशियर और वर्ष 2008 से अब तक बतौर प्रबंधक के पद पर अपनी सेवाएं देते आ रहा हूं। नवनियुक्त प्रबंधन कमेटी ने अकारण मेरे खिलाफ निर्णय लेते हुए मुझे बिना किसी नोटिस के कमेटी के सदस्यों को विश्वास में न ले जबरन पद से हटाने का प्रयास किया। कमेटी के सभी सदस्य यदि सर्वसहमति से निर्णय लेते हैं तो मैं तत्काल प्रबंधक पद से त्यागपत्र दे दूंगा। - रणजीत सिंह
हठधर्मिता के कारण चार्ज नहीं सौंप रहे रणजीत : मलकीत सिंह
नवनियुक्त प्रबंधक मलकीत सिंह ने प्रेस वार्ता कर बताया कि गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंधन कमेटी ने उन्हें प्रबंधक के पद पर नियुक्त किया है। कहा कि कमेटी ने रणजीत सिंह को गुरुद्वारा साहिब के चोमेला फार्म का प्रबंधक बनाया है। कहा कि रणजीत सिंह अपनी हठधर्मिता के चलते प्रबंधक पद का चार्ज मुझे नहीं सौंप रहे हैं। कहा कि 14 जुलाई को होने वाली मेंबरों की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा वह सर्वमान्य होगा।
प्रबंधन को लेकर विवादों का है पुराना नाता
नानकमत्ता। गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की प्रबंधन कमेटी को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। गुरुद्वारा प्रबंधन के विवाद को थामने के लिए हाईकोर्ट नैनीताल ने अप्रैल 2006 में जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को गुरुद्वारा साहिब में रिसीवर के पद पर नियुक्त किया था। दो दिसंबर 2016 तक डीएम रिसीवर के पद पर रहे। दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट के सब रजिस्ट्रार कुंवर अमरिंदर सिंह की देखरेख में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव कराया गया।
किसी भी पक्ष को पूर्ण बहुमत न मिलने पर जसविंदर सिंह गिल को सर्वसहमति से डेढ़ साल के लिए कमेटी में प्रधान बनाया गया। 20 जून 2018 को जसविंदर सिंह गिल का कार्यकाल समाप्त हो गया। लेकिन, कमेटी के उपप्रधान सेवा सिंह, महासचिव प्रीतम सिंह संधू और सचिव केहर सिंह के निलंबन के बाद फिर विवाद गहरा गया।
विवाद को निपटाने के लिए डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने सितारगंज की एसडीएम को गुरुद्वारे का रिसीवर नियुक्त कर दिया था। 30 जून 2018 को विवाद का निपटारा होने पर प्रधान सेवा सिंह ने अपना पदभार ग्रहण किया।
पदभार ग्रहण करने के सप्ताह भर बाद ही प्रशासनिक फेरबदल को लेकर विवाद हो गया है। इस के निपटारे के लिए 14 जुलाई को कमेटी के सभी सदस्यों की अहम बैठक बुलाई गई है। देखना यह है कि 14 जुलाई को विवाद का निपटारा किस सिरे पहुंचेगा...।