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25 जिंदा कछुओं सहित दो तस्कर गिरफ्तार

Thu, 14 Jul 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Thu, 14 Jul 2016 12:14 AM IST
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 Two smugglers arrested with 25 turtles alive
कछुए - फोटो : अमर उजाला

पुलिस ने 25 कछुओं के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। कोतवाल जेसी पाठक ने बताया कि पकड़े गए तस्कर लंबे अरसे से कछुओं की तस्करी कर रहे थे। कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत दो लाख आंकी गई है।

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रम्पुरा चौकी प्रभारी प्रकाश सिंह दानू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गश्त के दौरान गदरपुर रोड रेलवे क्रासिंग के पास बिना नंबर की बाइक में दो संदिग्ध युवकों को दबोच लिया। 
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पकड़े गए ग्राम पिपलिया नं. 2 महतोष मोड़ गदरपुर निवासी नारायण विश्वास और ग्राम ढाका अंसारी मुरादाबाद निवासी मोनू की तलाशी ली तो उनके पास से एक कट्टे में 25 जिंदा कछुए बरामद हुए। दोनों तस्कर कछुओं को मुरादाबाद ले जा रहे थे। कोतवाल जेसी पाठक ने कछुओं की तस्करी का खुलासा करते हुए बताया तस्कर नारायण और मोनू पिछले 15 वर्षों से कछुआ तस्करी कर रहे थे। वह अब तक 1 लाख से अधिक कछुए मुरादाबाद और अन्य शहरों में बेच चुके हैं। 
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आज पकड़ी गई खेप को वह पोखर से बेचने जा रहे थे। कोतवाल जेसी पाठक ने बताया पकड़े गए कछुए विशेष प्रजाति के हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत दो लाख से अधिक है। तस्करी में लिप्त अन्य लोगों की पुलिस तलाश कर रही है। तस्करों को पकड़ने वाली पुलिस टीम में एसआई प्रवीण सिंह, कां. जितेंद्र सिंह बिष्ट, संजीव चौधरी, एसआईटी के संतोष कुमार, कां. राजेंद्र सिंह शामिल थे।

देशी दवाओं के लिए कछुओं की है बड़ी डिमांड
कछुओं की तस्करी के लिए सबसे बड़ा कारण है इनका दवाओं के लिए प्रयोग। बताया जाता है कि कछुओं के मांस का प्रयोग टीबी और दमा जैसी जानलेवा बीमारियों की दवा बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलाव सेक्स पावर बढ़ाने की दवा में भी कछुए का मांस काम आता है। मोटापा कम करने और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को फिट बनाने के लिए भी कछुए से दवा बनाई जाती है। 

कछुए के मांस के शौकीनों की कमी नहीं है। तस्करों के मुताबिक कछुओं के मांस के अलावा इनका सुरक्षा कवच भी दवा बनाने के काम में आता है जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। जिसके चलते कछुओं की तस्करी से दोहरा लाभ होता है। इसीलिए तस्कर कछुओं की तस्करी में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।

कछुओं की तस्करी के लिए महफूज है यूएसनगर 
कछुओं की तस्करी के लिए ऊधम सिंह नगर महफूज माना जाता है। इससे पहले भी यहां कोतवाल जेसी पाठक के नेतृत्व में पुलिस तीन सौ से अधिक कछुए बरामद कर चुकी है। जनपद में तालाब अधिक होने से यहां कछुए आसानी से मिल जाते हैं। शक्तिफार्म, सितारगंज, नानकमत्ता, खटीमा, दिनेशपुर, गूलरभोज, गदरपुर आदि क्षेत्रों में स्थित तालाबों से तस्कर कछुओं को पकड़कर मुरादाबाद और अन्य शहरों में सप्लाई करते हैं। 


कछुओं को थैले या बोरे में ले जाना बहुत आसान है। पुलिस भी इस पर जल्दी से शक नहीं कर पाती। पूर्व में कई बार कछुओं की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद अब तस्करों ने बड़ी संख्या में एक साथ कछुओं को ले जाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी संख्या में कछुओं की तस्करी करने का रास्ता अख्तियार कर लिया है।  

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