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कार्रवाई से पहले ही माफियाओं को दे दी जाती है सूचना

Sat, 13 Aug 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Sat, 13 Aug 2016 12:38 AM IST
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Several policemen have become the mining mafia informant
क्राइम - फोटो : अमर उजाला

जिले में अवैध खनन का सबसे बड़ा अड्डा बाजपुर क्षेत्र बन गया है। यहां पर खनन माफिया पुलिस पर पूरी तरह से हावी हैं। आलम यह है कि अब पुलिस खनन को रोकने में कम और माफियाओं के लिए मुखबिरी ज्यादा कर रही है। जहां  भी खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी होती है, कुछ मुखबिर पहले ही माफिया को सूचना देकर अलर्ट कर देते हैं। 

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केलाखेड़ा से लेकर सुल्तानपुर पट्टी और बाजपुर के कोसी क्षेत्र तक चप्पे-चप्पे पर खनन माफियाओं का जबर्दस्त नेटवर्क है। माफियाओं से जुड़े लोग हर चौराहे पर अपनी पैनी नजर गड़ाए हैं। नदियों के किनारे कुछ प्वाइंट माफियाओं ने भी अपने  लोगों को जोड़ने के लिए चिन्हित किए हुए हैं। 
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बाजपुर के दोराहा चौराहे से लेकर सुल्तानपुर पट्टी में उत्तराखंड और यूपी सीमा में भी व्यापक स्तर पर खनन चलता है। यहां पर माफिया खुलेआम खनन के धंधे को बेखौफ अंजाम देते हैं। खनन कारोबारी यूपी का हवाला देकर धड़ल्ले से खनन के धंधे को जोरों से चलाए हुए हैं। पुलिस के साथ खनन में सांठगांठ का खेल आज का नहीं पिछले एक दशक से चल रहा है।
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इसमें कई बार छापेमार कार्रवाई तो जरूर हुई लेकिन आज तक इस पर पूर्णता प्रतिबंध नहीं लग पाया। इसका मुख्य कारण यह भी रहा कि खनन के कारोबार में सत्ताधारी लोगों का भी बड़ा हाथ होता है। अधिकारी वर्ग यूं तो समय-समय पर छापेमारी करते हैं, लेकिन माफियाओं का नेटवर्क इतना जबर्दस्त होता है कि सूचना पहले ही मुखबिरी से पहुंच जाती है। 

चोर रास्तों से होता है रातभर नदियों से भरान
बाजपुर की कोसी नदी, सितारगंज की बैगुल, काशीपुर-जसपुर के बीच ढेला नदी और खटीमा की जगबुड़ा में पूरी तरह खनन कारोबारियों का एक बड़ा जाल है। खनन के इस खेल में यह लोग सत्ता तक अपनी हनक रखते हैं और फिर स्थानीय स्तर पर हो जाती है सांठगांठ की सेटिंग। बाजपुर के कोसी नदी से अवैध खनन करने के लिए माफियाओं ने कई चोर रास्तों का निर्माण किया हुआ है। इसमें स्थानीय पुलिस की भी पूरी शह होती है। इस बारे में डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव भी मानते हैं कि चोर नदियों से खनन बड़े स्तर पर हो रहा है। समय-समय पर चेकिंग होती है, लेकिन माफियाओं का नेटवर्क जबर्दस्त है, कार्रवाई से पहले ही  माफियाओं को सूचना पहुंच जाती है और वह अलर्ट हो जाते हैं। 


डीएम आशीष श्रीवास्तव शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
जिले की नदियों में पोकलैंड के जरिए हो रहे भारी खनन के मामले को डीएम ने भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से नदियों में माफियाओं ने जेसीबी और पोकलैंड मशीन तक उतार दी हैं, ये चिंता का विषय है। इसकी एक रिपोर्ट वह जल्द ही शासन को भेजेंगे। डीएम श्रीवास्तव का कहना है कि वह इसकी भी जांच करेंगे कि क्या जिला प्रशासन का कोई व्यक्ति या अधिकारी तो खनन माफियों के साथ लिप्त है या नहीं। पुलिस की मिलीभगत पर उन्होंने कहा कि पुलिस के मामले में वह ज्यादा कुछ नहीं कह सकते, लेकिन यह जरूर है कि माफियाओं को सूचना देने में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदेह में है।

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