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प्रसव कराने आई गर्भवती और बच्चे की मौत 

Sun, 12 Jun 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Sun, 12 Jun 2016 11:53 PM IST
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pregnant lady and child died during delivery
प्रसव के दाौरान माौत - फोटो : अमर उजाला

एक दुकाननुमा कमरे में चल रहे प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराने आना गर्भवती को महंगा पड़ गया। कथित महिला डाक्टर ने सुरक्षित प्रसव कराने का दस हजार रुपये में ठेका ले लिया। वह प्रसव तो करा नहीं पाई मगर गर्भवती और पेट में ही बच्चे की मौत हो गई। कथित महिला डाक्टर और आशा कार्यकत्री गायब हुई तो आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा काटा। 

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सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाबुझाकर आक्रोशित लोगों को शांत किया। पुलिस अस्पताल संचालकों की तलाश कर रही है। फिलहाल परिजन शव को पीएम कराने से इनकार कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार स्टेडियम नागनाथ मंदिर बाईपास रोड पर किराए के दो छोटे कमरों में प्राइवेट अस्पताल खुला है। अस्पताल के बाहर बोर्ड में दो महिला डाक्टरों के नाम और नीचे डिग्रियां भी दर्ज हैं। रविवार की शाम ग्राम शिवलालपुर अमर झंडा निवासी इरशाद की गर्भवती पत्नी नरगिस (20) का शव पड़ा था। 
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शव के पास महिलाएं बिलखकर हंगामा कर रही थी। सूचना मिलने पर बांसफोड़ान चौकी प्रभारी सुनील बिष्ट फोर्स के साथ वहां पहुंच गए। मृतका के पति  इरशाद ने बताया कि सरकारी अस्पताल में मिली एक आशा कार्यकर्ता उनको अस्पताल में लेकर आई थी, जहां महिला डाक्टर थी। उसकी पत्नी की डिलीवरी का समय पूरा हो गया था। 
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डाक्टर ने जांच करने के बाद तीन घंटे के भीतर सामान्य डिलीवरी कराने का भरोसा दिया। इसकी एवज में उनसे 10 हजार रुपये भी जमा करवाए गए। डाक्टर ने नरगिस को इंजेक्शन लगाकर ग्लूकोज चढ़ाया। काफी समय बाद बाहर आई डाक्टर ने कुछ समय बाद डिलीवरी होने की बात कही। यह कहने के बाद वह वहां से चली गई और आशा कार्यकर्ता भी खिसक गई। 

कुछ समय तक इंतजार करने के बाद उन्होंने कमरे में जाकर देखा तो नरगिस मृत पड़ी थी। उनको अंदेशा है कि गलत इंजेक्शन लगाने से नरगिस की मौत हुई है। एसआई सुनील बिष्ट ने बताया कि दो कमरों में खुला अस्पताल फर्जी लग रहा है। फिलहाल संचालक का पता नहीं चल सका है। परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही की जाएगी। 

प्राइवेट अस्पतालों के दलालों का अड्डा
मृतक महिला के ससुर अफसर अली ने पुलिस को बताया कि वह बहू को लेकर सरकारी अस्पताल गए थे। वहां नर्सों ने कहा कि रविवार है और महिला डाक्टर नहीं है। वहीं गैलरी में घूम रही एक महिला ने अपने को आशा कार्यकर्ता बता कर कहा कि वह कम रुपयों में नार्मल डिलीवरी करा देगी और उन्हे इस अस्पताल में लेकर आ गई। समझा जा सकता है कि डाक्टर नहीं होने का फायदा उठाकर प्राइवेट अस्पतालों की दलाल घूमती रहती हैं। मौका देखकर भोलेभाले लोगों को झांसे में लेकर प्राइवेट अस्पताल ले जाती हैं। 

मरने के बाद अंगूठा लिया
मृतका का पति इरशाद ने बताया कि डाक्टर के खिसकने के बाद उन्होंने कमरे में जाकर देखा तो वहां नरगिस मरी पड़ी थी। उसके अंगूठे में स्याही लगी थी। उन्हें शक है कि कथित डाक्टर ने किसी कागज पर नरगिस के मरने के बाद अंगूठा ले लिया है।


गलीमोहल्ले में खुल रहे दुकाननुमा अस्पताल
शहर में गली मोहल्लों में प्राइवेट अस्पतालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कईं झोलाछाप तो बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर दुकान चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से फर्जी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की जान से खिलवाड़ होता है। सामान्य दवाइयां देने के अलावा कईं डाक्टर तो डिलीवरी और ऑपरेशन तक कर देते हैं। कईं बार फर्जी क्लीनिकों में लोगों की जान चली जाती है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन फर्जी अस्पतालों को न तो जांचता है और न ही कार्यवाही करता है। 

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