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पंतनगर विवि के पूर्व ठेकाकर्मी ने फांसी लगाकर दी जान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 28 Oct 2022 11:59 PM IST
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Crime.
पंतनगर। विवि के पूर्व कर्मी ने अपने पड़ोसी के घर में फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों और पड़ोसियों ने किसी प्रकार चंदा एकत्र कर दोपहर बाद पंतनगर श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया।
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जवाहर नगर निवासी और जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय में ठेके पर बतौर सहायक लेखाकार कार्यरत रहे विनोद कुमार शर्मा (44) पुत्र स्व. बन्नू शर्मा ने बृहस्पतिवार देर रात अपने पड़ोसी के घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल उनके पड़ोसी मि. बनर्जी कोलकाता में रहते हैं और वह अपने घर की देखभाल के लिए चाभी विनोद को देकर गए थे। विनोद खाना खाकर रात को उसी घर में सोने चले जाते थे।
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शुक्रवार सुबह देर तक घर नहीं आने पर जब उनका बेटा उन्हें बुलाने गया तब घटना की जानकारी हुई। घर में खबर लगते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि विनोद नौकरी जाने के बाद से अवसाद में चल रहे थे। विनोद की मां आशा कार्यकर्ता हैं और पिता स्व. बन्नू शर्मा विवि के फसल अनुसंधान केंद्र से सेवानिवृत्त हुए थे। करीब 10 वर्ष पूर्व उनकी मृत्यु हो चुकी है। विनोद के परिवार में पत्नी, एक बेटी व दो बेटे हैं। बेटी बीएससी व एक बेटा पंतनगर विवि में बीटेक द्वितीय वर्ष व दूसरा बेटा कॉलेज की पढ़ाई कर रहा है।
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इस वजह से अवसाद में थे विनोद
पंतनगर। विनोद 22 वर्षों तक बतौर ठेकाकर्मी सहायक लेखाकार पद पर विवि के प्रसार शिक्षा निदेशालय व सामान्य खंड में तैनात रहे। बीते अप्रैल में विवि में 87 नियमित सहायक लेखाकारों की नियुक्ति हुई थी। इसकी भनक लगते ही जुगाड़बाजों ने अपना समायोजन अन्य पदों पर करवा लिया। शेष 43 सहायक लेखाकारों (ठेकाकर्मी) की विवि से सेवाएं समाप्त कर दी गईं थीं जिसमें विनोद भी थे। कई दिनों तक चले धरना-प्रदर्शन और पंतनगर आए सीएम पुष्कर सिंह धामी के दखल के बाद इन लोगों को समायोजित करने के निर्देश हुए थे। इसके बाद 34 लोगों को तो समायोजित कर लिया गया लेकिन विनोद सहित नौ कर्मियों का समायोजन नहीं हो सका। बच्चों की पढ़ाई और भरण पोषण की चिंता ने विनोद को अवसाद में ला दिया। संवाद
अवसाद में एक और पूर्व कर्मी दे चुका है जान
पंतनगर। नौकरी से हटाए जाने पर विवि कर्मी सगीर अहमद ने भी बीती सात अप्रैल को शांतिपुरी तीसरे मील के पास ट्रेन के आगे कूद कर जान दे दी थी। वह सीबीएसएच कॉलेज में करीब 20 वर्षों से बतौर सहायक लेखाकार (ठेका कर्मी) काम कर रहे थे। सगीर भी बेरोजगारी और परिवार के पोषण में आर्थिक तंगी के चलते लंबे समय से परेशान थे जिस वजह से वह अवसाद में चले गए थे। संवाद

नियमितीकरण के इंतजार में 2003 से पूर्व के ठेका कर्मी
पंतनगर। वर्ष 2003 के पूर्व से विवि में विभिन्न पटलों पर काम कर रहे लगभग 200 ठेका कर्मी आज भी नियमितीकरण की बाट जोह रहे हैं। विनोद शर्मा भी उनमें से एक थे। जनप्रतिनिधियों व कर्मचारी संगठनों ने कई बार आवाज बुलंद की और कई बार शासन में फाइल मांगी भी गई लेकिन इनका आज तक भला नहीं हो पाया। इसमें कई ठेकाकर्मी तो ऐसे हैं जो अपनी अधिवर्षता आयु पूरी करने वाले हैं। संवाद
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