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ट्रक के नीचे कुचलकर क्लीनर की मौत
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
Updated Thu, 13 Jul 2017 12:41 AM IST
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रुद्रपुर की हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री में हंगामा कर रहे ड्राईवरों को समझाते सीओ
- फोटो : amar ujala
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सिडकुल स्थित हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री में राजस्थान से कच्चा माल लेकर पहुंचे एक ट्रक के क्लीनर की ट्रक के नीचे कुचलने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रक तीन दिन पहले फैक्ट्री पहुंच गया था। लेकिन अनलोड न होने के कारण ट्रक फैक्ट्री के बाहर नहीं आ सका, जिसके चलते क्लीनर बाहर खड़े ट्रकों के नीचे सोकर रात गुजार रहा था।
थाना रुपनगर अजमेर राजस्थान निवासी कान्हा राम तीन दिन पूर्व अपने साथी के साथ अजमेर से कच्चा माल लेकर सिडकुल स्थित हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री में पहुंचा था।
बताया जा रहा है कि फैक्ट्री पहुंचने के बाद ट्रक चालक ट्रक को अनलोड करने के लिए फैक्ट्री के अंदर चला गया। फैक्ट्री के नियमानुसार ट्रक क्लीनर को फैक्ट्री के अंदर जाने की इजाजत नहीं होती जिसके चलते कान्हा राम को फैक्ट्री के बाहर ही रुकना पड़ा। देर शाम तक भी ट्रक चालक ट्रक लोड कर फैक्ट्री के बाहर नहीं लौटा तो कान्हा राम फैक्ट्री के बाहर खड़े एक ट्रक के नीचे सो गया। दूसरे दिन भी ट्रक चालक बाहर नहीं आया और कान्हा राम ने फिर से ट्रक के नीचे रात गुजारी।
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बुधवार देर शाम तक भी जब ट्रक चालक फैक्ट्री के बाहर नहीं आया तो दो दिन से भूखा प्यासा कान्हा राम थकान से चूर होकर फैक्ट्री के बाहर खड़े एक ट्रक के नीचे आराम करने लगा। कान्हा की आंख लगी ही थी कि उक्त ट्रक का चालक आ गया और उसे पता नहीं चला कि उसके ट्रक के नीचे कोई लेटा है और उसने ट्रक को चालू कर दिया जिससे ट्रक के नीचे दबने से कान्हा की मौत हो गई।
अन्य ट्रक चालकों को जब मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन को घटना की जानकारी दी लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने उनकी बात को गंभीरता से ना लेते हुए उन्हें फैक्ट्री से बाहर खदेड़ दिया। जिस पर आक्रोशित चालकों ने कान्हा के शव को फैक्ट्री परिसर में रखकर हंगामा शुरू कर दिया।
सूचना पर सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार, सिडकुल चौकी प्रभारी नरेश पाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित भीड़ का शांत किया। माहौल गर्माने पर फैक्ट्री प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को पांच लाख का मुआवजा देने की घोषणा की जिस पर गुस्साये चालक शांत हुए और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान
हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री की पार्किंग में क्लीनर की मौत से फैक्ट्री प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगे हैं। दरअसल फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा के लिए जो सिक्योरिटी गार्ड लगाए हैं उनका ध्यान सिर्फ फैक्ट्री के भीतर की सुरक्षा पर ही रहता है। फैक्ट्री के बाहर पार्किंग में कौन लोग आ-जा रहे हैं इस पर सिक्योरिटी गार्ड कोई ध्यान नहीं देते। फैक्ट्री के सुरक्षा कर्मियों की नजर बुधवार को पार्किंग में ट्रक के नीचे सो रहे क्लीनर पर होती तो क्लीनर की जान बच सकती थी। हालांकि प्रबंधन इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। लंबी दूरी तय करके थक हारकर फैक्ट्री में पहुंचने वाले ट्रक चालक और क्लीनरों के विश्राम के लिए फैक्ट्री प्रबंधन ने कोई इंतजाम नहीं किये हैं, जिसके चलते ट्रक चालकों को कभी ट्रक के नीचे आराम करना पड़ता है तो कभी सड़क किनारे खुले में।
फैक्ट्री के नियम भी कम जिम्मेदार नहीं
सिडकुल स्थित हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री में ट्रक क्लीनर कान्हा की मौत के लिए फैक्ट्री के बेतुके नियम कम जिम्मेदार नहीं है। फैक्ट्री के नियमानुसार जब कोई भी ट्रक माल लेकर फैक्ट्री में पहुंचता है तो सिर्फ फैक्ट्री ट्रक के चालक को ही ट्रक के साथ फैक्ट्री में प्रवेश दिया जाता है और ट्रक क्लीनर बाहर ही रहता है। कई बार ट्रकों को अनलोड होने में तीन से चार दिन का समय लगता है और इस पूरे समय में क्लीनर बाहर ही रहते हैं। बाहर भी उनके रहने खाने की कोई व्यवस्था नहीं होती। फैक्ट्री के टांडा जंगल से लगे होने के कारण इसके आसपास कोई ढाबा भी नहंीं है कि जहां क्लीनर जाकर खाना खा सके। अगर फैक्ट्री में इस तरह के नियम नहीं होते तो कान्हा की मौत इस तरह नहीं होती।
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थाना रुपनगर अजमेर राजस्थान निवासी कान्हा राम तीन दिन पूर्व अपने साथी के साथ अजमेर से कच्चा माल लेकर सिडकुल स्थित हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री में पहुंचा था।
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बताया जा रहा है कि फैक्ट्री पहुंचने के बाद ट्रक चालक ट्रक को अनलोड करने के लिए फैक्ट्री के अंदर चला गया। फैक्ट्री के नियमानुसार ट्रक क्लीनर को फैक्ट्री के अंदर जाने की इजाजत नहीं होती जिसके चलते कान्हा राम को फैक्ट्री के बाहर ही रुकना पड़ा। देर शाम तक भी ट्रक चालक ट्रक लोड कर फैक्ट्री के बाहर नहीं लौटा तो कान्हा राम फैक्ट्री के बाहर खड़े एक ट्रक के नीचे सो गया। दूसरे दिन भी ट्रक चालक बाहर नहीं आया और कान्हा राम ने फिर से ट्रक के नीचे रात गुजारी।
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बुधवार देर शाम तक भी जब ट्रक चालक फैक्ट्री के बाहर नहीं आया तो दो दिन से भूखा प्यासा कान्हा राम थकान से चूर होकर फैक्ट्री के बाहर खड़े एक ट्रक के नीचे आराम करने लगा। कान्हा की आंख लगी ही थी कि उक्त ट्रक का चालक आ गया और उसे पता नहीं चला कि उसके ट्रक के नीचे कोई लेटा है और उसने ट्रक को चालू कर दिया जिससे ट्रक के नीचे दबने से कान्हा की मौत हो गई।
अन्य ट्रक चालकों को जब मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन को घटना की जानकारी दी लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने उनकी बात को गंभीरता से ना लेते हुए उन्हें फैक्ट्री से बाहर खदेड़ दिया। जिस पर आक्रोशित चालकों ने कान्हा के शव को फैक्ट्री परिसर में रखकर हंगामा शुरू कर दिया।
सूचना पर सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार, सिडकुल चौकी प्रभारी नरेश पाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित भीड़ का शांत किया। माहौल गर्माने पर फैक्ट्री प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को पांच लाख का मुआवजा देने की घोषणा की जिस पर गुस्साये चालक शांत हुए और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान
हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री की पार्किंग में क्लीनर की मौत से फैक्ट्री प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगे हैं। दरअसल फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा के लिए जो सिक्योरिटी गार्ड लगाए हैं उनका ध्यान सिर्फ फैक्ट्री के भीतर की सुरक्षा पर ही रहता है। फैक्ट्री के बाहर पार्किंग में कौन लोग आ-जा रहे हैं इस पर सिक्योरिटी गार्ड कोई ध्यान नहीं देते। फैक्ट्री के सुरक्षा कर्मियों की नजर बुधवार को पार्किंग में ट्रक के नीचे सो रहे क्लीनर पर होती तो क्लीनर की जान बच सकती थी। हालांकि प्रबंधन इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। लंबी दूरी तय करके थक हारकर फैक्ट्री में पहुंचने वाले ट्रक चालक और क्लीनरों के विश्राम के लिए फैक्ट्री प्रबंधन ने कोई इंतजाम नहीं किये हैं, जिसके चलते ट्रक चालकों को कभी ट्रक के नीचे आराम करना पड़ता है तो कभी सड़क किनारे खुले में।
फैक्ट्री के नियम भी कम जिम्मेदार नहीं
सिडकुल स्थित हिंदुस्तान जिंक फैक्ट्री में ट्रक क्लीनर कान्हा की मौत के लिए फैक्ट्री के बेतुके नियम कम जिम्मेदार नहीं है। फैक्ट्री के नियमानुसार जब कोई भी ट्रक माल लेकर फैक्ट्री में पहुंचता है तो सिर्फ फैक्ट्री ट्रक के चालक को ही ट्रक के साथ फैक्ट्री में प्रवेश दिया जाता है और ट्रक क्लीनर बाहर ही रहता है। कई बार ट्रकों को अनलोड होने में तीन से चार दिन का समय लगता है और इस पूरे समय में क्लीनर बाहर ही रहते हैं। बाहर भी उनके रहने खाने की कोई व्यवस्था नहीं होती। फैक्ट्री के टांडा जंगल से लगे होने के कारण इसके आसपास कोई ढाबा भी नहंीं है कि जहां क्लीनर जाकर खाना खा सके। अगर फैक्ट्री में इस तरह के नियम नहीं होते तो कान्हा की मौत इस तरह नहीं होती।