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जुगाड़ के पुल के सहारे जिंदगी जीने की बेबसी
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रुद्रपुर के रविंद्रनगर स्थित कल्याणी नदी में बनाया गया बांस का अस्थायी पुल।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। शहर को संवारने के दावे तो हजार होते रहे हैं मगर हकीकत जानने के बावजूद उसमें सुधार की सुध लेने की कोई जरूरत नहीं समझी गई। औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध अपने खूबसूरत शहर की जो तस्वीर अभी है उसे ठीक करने के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही से हर कोई बचता दिख रहा है।
आज हम आपको रविंद्रनगर के हाल से रूबरू करा रहे हैं। छह महीने पहले आई आपदा में कल्याणी नदी उफान पर आई तो रविंद्रनगर का पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। नगर निगम, जिला प्रशासन की ओर से पुल बनाने के कई सर्वे किए गए। छह महीने गुजर गए मगर यहां 60 परिवारों को पुल नसीब नहीं हुआ। थक हारकर लोगों ने खुद ही चंदा कर बांस का अस्थायी पुल बना डाला है। अस्थायी पुल के बहाने का भी खतरा मंडराने लगा है।
आवाजाही के लिए वहां रह रहे परिवार के लोग बांस के पुल के ही सहारे हैं। पुल बनाने के लिए सरकारी महकमों की ओर से एक दूसरे को सिर्फ पत्राचार किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से लोनिवि को पुल बनाने के लिए पत्र भेजा गया था। इस पर लोनिवि के इंजीनियरों ने स्टाफ का रोना बताकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा है। जिला प्रशासन की ओर से भी पुल बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यह तय है कि बरसात आने के बाद कल्याणी नदी का जलस्तर बढ़ेगा तो आसपास के लोगों को फिर दिक्कतें आएंगी। संवाद
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तब छह फुट तक भर गया था घरों में पानी
रुद्रपुर। कल्याणी नदी के पास रह रहे रविंद्रनगर के लोगों ने बताया कि कल्याणी के उफान से उनके घरों में छह फुट तक पानी भर गया था। लोगों की गाय-भैंस, ई-रिक्शा सब पानी में बह गए थे। अपनी जान बचाने के लिए लोगों ने छतों पर या जिला प्रशासन की मदद का सहारा लिया। उनका कहना है कि कल्याणी में पटी गंदगी से लोगों का जीना दूभर हो गया है। संवाद
लोगों की पीड़ा
अक्तूबर में आई आपदा से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। सरकारी महकमों की ढीली कार्य प्रणाली के चलते अभी तक पुल नहीं बना है। लोगों ने चंदा कर खुद से बांस के पुल का निर्माण किया। अस्थायी पुल होने से नदी में गिरने का भी डर सताया रहता है। -संतोष कुमार।
कल्याणी नदी के ऊपर पुल बनाने के लिए कई बार सर्वे किया गया है। बरसात आने के बाद दोबारा लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। कल्याणी के उफान से भी तब काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। -सीता राम।
बरसात के मौसम में अस्थायी पुल से गुजरने में दिक्कतें होंगी। आसपास के लोगों को अब बरसात आने पर ही डर सताने लग जाता है। आपदा के समय यहां लोगों के घरों में छह फुट तक पानी भर गया है। -जयदेव बाला।
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अस्थायी पुल होने से दो पहिया वाहन भी नहीं निकल पा रहे हैं। बरसात आने के बाद फिर दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जिला प्रशासन या नेताओं की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही है। -तुषार विश्वास।
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आज हम आपको रविंद्रनगर के हाल से रूबरू करा रहे हैं। छह महीने पहले आई आपदा में कल्याणी नदी उफान पर आई तो रविंद्रनगर का पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। नगर निगम, जिला प्रशासन की ओर से पुल बनाने के कई सर्वे किए गए। छह महीने गुजर गए मगर यहां 60 परिवारों को पुल नसीब नहीं हुआ। थक हारकर लोगों ने खुद ही चंदा कर बांस का अस्थायी पुल बना डाला है। अस्थायी पुल के बहाने का भी खतरा मंडराने लगा है।
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आवाजाही के लिए वहां रह रहे परिवार के लोग बांस के पुल के ही सहारे हैं। पुल बनाने के लिए सरकारी महकमों की ओर से एक दूसरे को सिर्फ पत्राचार किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से लोनिवि को पुल बनाने के लिए पत्र भेजा गया था। इस पर लोनिवि के इंजीनियरों ने स्टाफ का रोना बताकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा है। जिला प्रशासन की ओर से भी पुल बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यह तय है कि बरसात आने के बाद कल्याणी नदी का जलस्तर बढ़ेगा तो आसपास के लोगों को फिर दिक्कतें आएंगी। संवाद
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तब छह फुट तक भर गया था घरों में पानी
रुद्रपुर। कल्याणी नदी के पास रह रहे रविंद्रनगर के लोगों ने बताया कि कल्याणी के उफान से उनके घरों में छह फुट तक पानी भर गया था। लोगों की गाय-भैंस, ई-रिक्शा सब पानी में बह गए थे। अपनी जान बचाने के लिए लोगों ने छतों पर या जिला प्रशासन की मदद का सहारा लिया। उनका कहना है कि कल्याणी में पटी गंदगी से लोगों का जीना दूभर हो गया है। संवाद
लोगों की पीड़ा
अक्तूबर में आई आपदा से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। सरकारी महकमों की ढीली कार्य प्रणाली के चलते अभी तक पुल नहीं बना है। लोगों ने चंदा कर खुद से बांस के पुल का निर्माण किया। अस्थायी पुल होने से नदी में गिरने का भी डर सताया रहता है। -संतोष कुमार।
कल्याणी नदी के ऊपर पुल बनाने के लिए कई बार सर्वे किया गया है। बरसात आने के बाद दोबारा लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। कल्याणी के उफान से भी तब काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। -सीता राम।
बरसात के मौसम में अस्थायी पुल से गुजरने में दिक्कतें होंगी। आसपास के लोगों को अब बरसात आने पर ही डर सताने लग जाता है। आपदा के समय यहां लोगों के घरों में छह फुट तक पानी भर गया है। -जयदेव बाला।
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अस्थायी पुल होने से दो पहिया वाहन भी नहीं निकल पा रहे हैं। बरसात आने के बाद फिर दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जिला प्रशासन या नेताओं की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही है। -तुषार विश्वास।