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इस चॉकलेट में चीनी नहीं, गुड़ है
चंदन बंगारी रुद्रपुर।
Updated Sat, 06 Oct 2018 12:19 AM IST
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पंतनगर के किसान मेले में गुड़ से चॉकलेट बनाने वाली मशीन
- फोटो : amar ujala
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पंत नगर विश्वविद्यालय के प्रोसेसिंग एंड फूड इंजीनियरिंग विभाग ने गुड़ से चॉकलेट बनाने की तरीका ईजाद किया है। इस चॉकलेट को बच्चों और बड़ों के साथ ही मधुमेह के रोगी भी खा सकते हैं। चॉकलेट बनाने की इस तकनीक का विश्वविद्यालय पेटेंट भी करा रहा है।
फूड इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिक डॉ. पीए ओमरे ने बताया कि सामान्य रूप से चॉकलेट में चीनी का इस्तेमाल होता है। पंतनगर की ओर से तैयार की गई चाकलेट में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कोको पाउडर, मिल्क पाउडर, मक्खन और कॉफी का इस्तेमाल किया जाता है। इस चाकलेट को तैयार करने में अन्य चाकलेट की तरह ही कांचिंग ( ग्रिंडर के बाद की प्रक्रिया)
प्रोसेस का उपयोग किया जाता है। गुड़ होने की वजह से इस चाकलेट में आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस एवं अन्य महत्वपूर्ण तत्व मिलते हैं। खास बात यह है कि गुड़ की चॉकलेट का स्वाद चीनी वाली चॉकलेट जैसा ही है।
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चॉकलेट तैयार करने का तरीका भी बेहद आसान है। कंपनियों की जो 50 ग्राम चॉकलेट बाजार में 40 रुपयों में मिलती है, वह 10 रुपये में तैयार की जा सकती है।
पांच लाख रुपये तक में छोटा प्लांट लग सकता है। बताया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने भी इसे व्यावसायिक तकनीक के रूप में स्वीकार किया है। चॉकलेट बनाने में किसी प्रकार के कलर का इस्तेमाल नहीं होता है। इससे गन्ने के साथ ही गुड़ उत्पादकों को भी फायदा पहुंचेगा।
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फूड इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिक डॉ. पीए ओमरे ने बताया कि सामान्य रूप से चॉकलेट में चीनी का इस्तेमाल होता है। पंतनगर की ओर से तैयार की गई चाकलेट में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कोको पाउडर, मिल्क पाउडर, मक्खन और कॉफी का इस्तेमाल किया जाता है। इस चाकलेट को तैयार करने में अन्य चाकलेट की तरह ही कांचिंग ( ग्रिंडर के बाद की प्रक्रिया)
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प्रोसेस का उपयोग किया जाता है। गुड़ होने की वजह से इस चाकलेट में आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस एवं अन्य महत्वपूर्ण तत्व मिलते हैं। खास बात यह है कि गुड़ की चॉकलेट का स्वाद चीनी वाली चॉकलेट जैसा ही है।
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चॉकलेट तैयार करने का तरीका भी बेहद आसान है। कंपनियों की जो 50 ग्राम चॉकलेट बाजार में 40 रुपयों में मिलती है, वह 10 रुपये में तैयार की जा सकती है।
पांच लाख रुपये तक में छोटा प्लांट लग सकता है। बताया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने भी इसे व्यावसायिक तकनीक के रूप में स्वीकार किया है। चॉकलेट बनाने में किसी प्रकार के कलर का इस्तेमाल नहीं होता है। इससे गन्ने के साथ ही गुड़ उत्पादकों को भी फायदा पहुंचेगा।