रुद्रपुर: 65 फीट ऊंचे रावण और 55-55 फीट के कुंभकर्ण-मेघनाद पुतलों का दहन, जय श्रीराम से गूंजा परिसर
रुद्रपुर में दशहरा उल्लास के साथ मनाया गया। प्राचीन मुख्य बस स्टैंड की रामलीला में राम-रावण युद्ध का मंचन हुआ, जिसके बाद 65 फीट ऊंचे रावण और कुंभकर्ण व मेघनाद के 55-55 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया गया।
विस्तार
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व मंगलवार को रुद्रपुर में उल्लास के साथ मनाया गया। प्राचीन मुख्य बस स्टैंड की रामलीला में भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध के प्रभावशाली मंचन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके बाद 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। साथ ही कुंभकरण और मेघनाद के 55-55 फीट ऊंचे पुतलों को भी जलाया गया। पुतलों से उठती आग की लपटों के बीच पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
रामलीला के प्रसंगों में भगवान श्रीराम की मर्यादा, साहस और धर्म की विजय का संदेश प्रमुख रहा। रावण के अहंकार और उसके अंत के दृश्य ने दर्शकों को बुराई के विनाश का संदेश दिया। आयोजन में राम, लक्ष्मण, हनुमान और रावण की भूमिकाओं ने कथा को जीवंत बनाया। राम की भूमिका में मनोज अरोरा, हनुमान के रूप में सुशील गाबा, लक्ष्मण की भूमिका में गौरव जग्गा और रावण के रूप में विशाल भुड्डी ने अभिनय किया।
पिता बने हनुमान, बेटा वानर के रूप में आया नजर
रावण दहन से पहले मैदान में पिता-पुत्र की जोड़ी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। समाजसेवी सुशील गाबा हनुमान के स्वरूप में नजर आए, वहीं उनके बेटे आयुष्मान ने वानर का रूप धारण किया। हनुमान के वेश में सुशील गाबा ने अपने अंदाज और प्रस्तुति से दर्शकों को आकर्षित किया। पिता को बजरंगबली के रूप में देखकर लोग उत्साहित नजर आए, वहीं आयुष्मान का वानर रूप भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।
जगह कम पड़ी, रेलिंग पर चढ़कर देखा दहन
रावण दहन देखने के लिए लोगों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि आयोजन स्थल पर जगह कम पड़ गई। पीछे खड़े दर्शकों को पुतलों का दहन देखने में परेशानी हुई। ऐसे में कई लोग रेलिंग पर खड़े हो गए। बच्चों और परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने भीड़ के बीच जगह तलाशकर दहन देखने की कोशिश की। मैदान में देर शाम तक लोगों की आवाजाही बनी रही। भीड़ के दबाव से आयोजन स्थल पर व्यवस्था संभालना चुनौतीपूर्ण रहा।
मंच पर चढ़ने की होड़, 50 की जगह 150 से ज्यादा लोग
दशहरा आयोजन के दौरान मंच पर पहुंचने के लिए लोगों में होड़ लगी रही। करीब 50 लोगों की क्षमता वाले मंच पर 150 से अधिक लोग पहुंच गए। क्षमता से कई गुना अधिक भीड़ जुटने के कारण मंच पर अव्यवस्था नजर आई। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के चढ़ने से वहां खड़े होने तक की जगह कम पड़ गई। आयोजन देखने पहुंचे लोगों के बीच मंच पर मौजूद रहने को लेकर उत्सुकता बनी रही।
रावण के पुतलों की लकड़ियां लेने दौड़ी भीड़, पुलिस ने फटकारीं लाठियां
रावण का पुतला जलते ही उसके अवशेष लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। पुतले की लकड़ियां और बांस पाने के लिए कई लोग मैदान की ओर दौड़ पड़े। भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। स्थिति संभालने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजकर लोगों को पीछे हटाया। अचानक बढ़ी भीड़ से कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। इसके बावजूद लोग पुतले के अवशेष लेने के लिए जुटे रहे।
खटीमा में धू-धूकर जला अहंकारी रावण का 45 फीट ऊंचा पुतला
विजयदशमी पर मंगलवार शाम खटीमा के राणा प्रताप इंटर कॉलेज के मैदान में अहंकारी रावण के 45 फीट और कुंभकरण के 40 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया गया। पुतला दहन देखने के लिए क्षेत्र के हजारों लोग रामलील मैदान में एकत्र हुए। रावण के पुतला दहन होते ही पूरा पंडाल व रामलीला मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दशहरे मेले में मौजूद लोगों को स्क्रीन के माध्यम से लाइव संबोधित कर विजयदशमी पर्व की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने रामलीला मैदान में विशाल टिनशेड निर्माण व रामलीला मंचन के लिए स्थान चिह्नित करने के लिए डीएम को निर्देश दिए।
इससे पूर्व सनातन श्री रामलीला पात्र परिषद की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में विजयदशमी के दिन श्रीराम, सीता और मां दुर्गा की पूजा के साथ रामलीला मंचन शुरू हुआ। रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला मंचन में कुंभकरण वध, मेघनाथ वध, अहिरावण वध और अंत में दशानन वध का मंचन किया गया। इसके बाद रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके साथ ही खटीमा की ऐतिहासिक रामलीला में दशहरे मेले का आयोजन भी किया गया।
वहां विधायक भुवन कापड़ी, नगरपालिका अध्यक्ष रमेश जोशी, रामलीला कमेटी अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, इंद्रेश गुंबर, मनोज श्रीवास्तव, विशाल अग्रवाल, मनोज वाधवा, जतिन कक्कड़, राजीव अग्रवाल, रमेश सिंघल, सतीश गोयल, विनोद भारती, अनिल बत्रा, राजेश गुप्ता, रंजन अग्रवाल रमेश ढींगरा, अजय अग्रवाल, अमन अरोरा आदि थे।