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Udham Singh Nagar News: वर्षों से बाल रोग विशेषज्ञ विहीन बाजपुर अस्पताल
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बाजपुर। सरकार ने एक साल पहले बाजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ाकर इसे उप-जिला चिकित्सालय तो बना दिया लेकिन सुविधाएं आज भी ढाक के तीन पात हैं। अस्पताल में पिछले आठ वर्षों से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण क्षेत्र के मासूमों का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है। सबसे ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को हो रही है।
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2016-17 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके तिलारा के सेवानिवृत्त होने के बाद से किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शासन-प्रशासन ने केवल अस्पताल का बोर्ड बदलकर इतिश्री कर ली जबकि मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बाल रोग विशेषज्ञ न होने से अभिभावकों नगर के इक्का-दुक्का निजी अस्पतालों में भारी भरकम फीस चुकानी पड़ती है। इसके अलावा उन्हें गंभीर स्थिति में बच्चों को काशीपुर, रुद्रपुर या हल्द्वानी अस्पताल ले जाना पड़ता है जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अस्पताल में जल्द बाल रोग विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग की है।
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वर्जन
विभागीय बैठकों में अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ सहित अन्य रिक्त पदों और समस्याओं से उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। नियुक्ति कब तक होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। - डॉ. पीडी. गुप्ता, सीएमएस
खबर के मुख्य बिंदु:
उच्चीकरण का दावा फेल: दर्जा ''''उप-जिला चिकित्सालय'''' का, पर सुविधाएं प्राथमिक केंद्र जैसी भी नहीं।
लंबा इंतजार: 8 साल से विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती का इंतजार कर रही जनता।
आर्थिक बोझ: सरकारी डॉक्टर न होने से गरीबों की जेब पर पड़ रहा है भारी असर।
-- -- -- --
- आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के सामने खड़ी हुई समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बाजपुर। उप जिला चिकित्सालय में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से बच्चों का इलाज कराने के लिए लोगों को इधर उधर भटकना पड़ रहा है। लगभग आठ साल से सरकारी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को एक साल पहले उप जिला चिकित्सालय का दर्जा दे दिया गया था। बावजूद इसके सुविधाएं नहीं बढ़ीं। वर्ष 2016-17 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके तिलारा के सेवानिवृत्त होने के बाद बाल रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। नागरिक अपने मासूम बच्चों को निजी अस्पताल में मंहगा इलाज कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं। या फिर काशीपुर, रुद्रपुर और हल्द्वानी का रूख करना पड़ता है। ऐसे में नागरिकों को आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि शासन प्रशासन को अस्पताल के उच्चीकरण के साथ चिकित्सा सुविधाएं भी बढ़ानी चाहिए थी। मात्र पदनाम बढ़ाकर इतिश्री कर दी गई और मूलभूत सुविधाओं के अभाव है। इससे आमजन को लाभ नहीं मिल पा रहा है। नगर क्षेत्र में बच्चों के इलाज के लिए मात्र एक-दो निजी अस्पताल ही हैं। नागरिकों ने प्रदेश के सीएम पुष्कर सिंह धामी से अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती करने की पुरजोर मांग की है।
इनसेट कोट....
विभागीय बैठकों में अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर सहित अन्य समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। कब तक तैनाती होगी इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
डॉ. पीडी गुप्ता, सीएमएस
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अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2016-17 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके तिलारा के सेवानिवृत्त होने के बाद से किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शासन-प्रशासन ने केवल अस्पताल का बोर्ड बदलकर इतिश्री कर ली जबकि मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया।
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क्षेत्रवासियों का कहना है कि बाल रोग विशेषज्ञ न होने से अभिभावकों नगर के इक्का-दुक्का निजी अस्पतालों में भारी भरकम फीस चुकानी पड़ती है। इसके अलावा उन्हें गंभीर स्थिति में बच्चों को काशीपुर, रुद्रपुर या हल्द्वानी अस्पताल ले जाना पड़ता है जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अस्पताल में जल्द बाल रोग विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग की है।
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विभागीय बैठकों में अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ सहित अन्य रिक्त पदों और समस्याओं से उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। नियुक्ति कब तक होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। - डॉ. पीडी. गुप्ता, सीएमएस
खबर के मुख्य बिंदु:
उच्चीकरण का दावा फेल: दर्जा ''''उप-जिला चिकित्सालय'''' का, पर सुविधाएं प्राथमिक केंद्र जैसी भी नहीं।
लंबा इंतजार: 8 साल से विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती का इंतजार कर रही जनता।
आर्थिक बोझ: सरकारी डॉक्टर न होने से गरीबों की जेब पर पड़ रहा है भारी असर।
- आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के सामने खड़ी हुई समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बाजपुर। उप जिला चिकित्सालय में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से बच्चों का इलाज कराने के लिए लोगों को इधर उधर भटकना पड़ रहा है। लगभग आठ साल से सरकारी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को एक साल पहले उप जिला चिकित्सालय का दर्जा दे दिया गया था। बावजूद इसके सुविधाएं नहीं बढ़ीं। वर्ष 2016-17 में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके तिलारा के सेवानिवृत्त होने के बाद बाल रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। नागरिक अपने मासूम बच्चों को निजी अस्पताल में मंहगा इलाज कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं। या फिर काशीपुर, रुद्रपुर और हल्द्वानी का रूख करना पड़ता है। ऐसे में नागरिकों को आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि शासन प्रशासन को अस्पताल के उच्चीकरण के साथ चिकित्सा सुविधाएं भी बढ़ानी चाहिए थी। मात्र पदनाम बढ़ाकर इतिश्री कर दी गई और मूलभूत सुविधाओं के अभाव है। इससे आमजन को लाभ नहीं मिल पा रहा है। नगर क्षेत्र में बच्चों के इलाज के लिए मात्र एक-दो निजी अस्पताल ही हैं। नागरिकों ने प्रदेश के सीएम पुष्कर सिंह धामी से अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती करने की पुरजोर मांग की है।
इनसेट कोट....
विभागीय बैठकों में अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर सहित अन्य समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। कब तक तैनाती होगी इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
डॉ. पीडी गुप्ता, सीएमएस