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अब तराई में उगेगा मखाना: चयनित किसानों से शुरू होगा ट्रायल, आय बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की नई पहल

Fri, 11 Sep 2026 12:44 AM IST
Heera जीवन कुमार
जीवन कुमार Published by: Heera Updated Fri, 11 Sep 2026 12:44 AM IST
सार

बिहार और पूर्वी भारत में प्रमुखता से की जाने वाली मखाने की खेती अब तराई क्षेत्र में भी शुरू होने जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर की पहल पर क्षेत्र में पहली बार मखाने की खेती का ट्रायल कराया जाएगा।

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Now Makhana will grow in the Terai region
मखाना

विस्तार

 

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बिहार और पूर्वी भारत में प्रमुखता से की जाने वाली मखाने की खेती अब तराई क्षेत्र में भी शुरू होने जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), काशीपुर की पहल पर क्षेत्र में पहली बार मखाने की खेती का ट्रायल कराया जाएगा।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तराई की जलवायु और यहां मौजूद तालाब एवं जलभराव वाले क्षेत्रों को मखाने की खेती के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है। वर्तमान में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पानी की अधिकता के कारण पारंपरिक फसलों की खेती चुनौतीपूर्ण रहती है। ऐसे में मखाने की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकती है। केवीके इसके लिए कुछ किसानों का चयन कर रहा है। चयनित किसानों के खेतों में जल्द ही ट्रायल शुरू कराया जाएगा। ट्रायल के दौरान फसल की बढ़वार, उत्पादन, पानी की आवश्यकता और स्थानीय परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।

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बीज से लेकर उत्पादन तक प्रशिक्षण

कृषि वैज्ञानिक डॉ. निर्मला भट्ट ने बताया कि किसानों को बीज की गुणवत्ता और चयन, खेत अथवा तालाब की तैयारी, रोपण, पौधों की देखभाल, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा सही समय पर कटाई की पूरी जानकारी दी जाएगी। प्रयास रहेगा कि किसान ट्रायल के बाद इसे व्यावसायिक स्तर पर भी अपना सकें।

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आय बढ़ाने का बन सकता है नया जरिया

कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल चंद्रा ने बताया कि ट्रायल सफल रहा तो तराई में मखाने की खेती किसानों के लिए आय का नया जरिया बन सकती है। जिन किसानों के पास जलभराव वाले खेत या तालाब हैं, वे इसका लाभ उठा सकते हैं। ट्रायल के परिणामों के आधार पर ही इसे बड़े स्तर पर बढ़ावा देने पर निर्णय लिया जाएगा।

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