किच्छा मंडी में किसानों का गुस्सा फूटा: धान खरीद शुरू न होने पर फिर शुरू हुआ धरना, देर शाम तक बैठे रहे किसान
किच्छा में तौल को लेकर हुए हंगामे के बाद धान खरीद शुरू नहीं हो सकी। इससे नाराज किसानों ने शुक्रवार को फिर धरना शुरू कर दिया और देर शाम तक बैठे रहे। शनिवार सुबह फिर धरने पर बैठने का ऐलान कर किसान घरों को लौट गए।
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किच्छा में सरकारी धान खरीद केंद्र पर बृहस्पतिवार को तौल को लेकर हुए हंगामे में संभागीय विपणन अधिकारी लता मिश्रा के हस्तक्षेप के बावजूद धान खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इससे किसानों का गुस्सा शुक्रवार को फिर फूट पड़ा और मंडी में किसानों का धरना फिर से प्रारंभ हो गया। किसान देर शाम तक धरने पर बैठे रहे, उसके बाद शनिवार सुबह फिर से धरने पर बैठने का ऐलान करते हुए वह अपने घरों को चले गए।
मंडी में शुक्रवार को ग्रामीण क्षेत्रों से धान लेकर आने वाले किसानों के चेहरे बुझे और थके दिखे। किसान नेता संतोख सिंह ने बताया कि अधिकारियों के साथ किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल रुद्रपुर में एडीएम पंकज उपाध्याय से मिला। उन्होंने देर रात कई दौर की वार्ताओं के बाद आश्वस्त किया कि शुक्रवार सुबह चावल मिल मालिक धान खरीद लेंगे। इसके बावजूद शुक्रवार को किसान चावल मिलों से अपनी फसल वापस ले आए क्योंकि मिल मालिकों का कहना है कि वह साफ सुथरी धान लेंगे।
किसान तुषार लूथरा ने बिलखते हुए बताया कि वह 250 क्विंटल धान एक चावल मिल मालिक के पास ले गए थे। मिल मालिक ने 250 क्विंटल में से 20 क्विंटल कटौती कर ली। उन्होंने कहा कि किसानों को लूटा जा रहा है। जो काम सरकार आज कर रही है वह कार्रवाई सरकार को पहले दिन से ही कर लेनी चाहिए थी। संतोख सिंह ने बताया कि धान बेचने चावल मिलों में गईं सब ट्रालियां वापस आ गई हैं। बताया कि इस सरकार में किसी की कोई सुनवाई नहीं हो रही। वहां त्रिलोक सिंह, गुरप्रीत सिंह, परमजीत सिंह, गेंदन लाल, राम स्वरुप, तुषार लूथरा, गुरनाम सिंह, भजन सिंह, अंग्रेज सिंह, याकूब अली आदि रहे।
15 दिन बाद भी धान तौल शुरू न होने से किसान नाराज, दिया सांकेतिक धरना
सितारगंज में सरकारी धान खरीद शुरू होने के 15 दिन बाद भी सितारगंज में यूसीएफ और कच्चे आढ़तियों के कांटों पर तौल शुरू न होने से किसानों में आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कच्चे आढ़ती मंडी में एमएसपी पर धान खरीदने में आनाकानी करते है जबकि, उसी फसल को वह मंडी से बाहर 1700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदने को तैयार हैं।
शुक्रवार को किसानों ने यूसीएफ और कच्चे आढ़ती के कांटों पर धान तौल शुरू कराने की मांग को लेकर नई मंडी समिति में सांकेतिक धरना दिया। किसान नेता गुरसेवक सिंह ने कहा कि प्रदेश में एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू होनी थी लेकिन सितारगंज की अब तक धान तौल शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि केवल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कांटों पर ही धान तौल हो रही है जबकि यूसीएफ और कच्चे आढ़तियों ने खरीद शुरू नहीं की है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्हें बारिश से धान खराब होने की चिंता भी सता रही है। उन्होंने कहा कि डिप्टी आरएमओ ने उन्हें 15 अक्तूबर से धान तौल शुरू कराने का आश्वासन दिया था लेकिन तय तारीख बीतने के बाद भी व्यवस्था शुरू नहीं हुई जबकि, खटीमा, नानकमत्ता और किच्छा में धान तौल शुरू हो चुकी है।
मंत्री बहुगुणा ने सुलझाया मामला, शुरू हुई धान खरीद
सितारगंज में नई मंडी समिति के सरकारी कांटों पर धान तौल शुरू न होने की शिकायत पर शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मंडी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां सांकेतिक धरने पर बैठे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर मामले को सुलझा दिया। कहा कि आरएफसी और कच्चे आढ़तियों के बीच सहमति बन गई है। शनिवार से मंडी के सभी सरकारी क्रय केंद्रों पर धान तौल शुरू की जाएगी।
गदरपुर में कच्चे आढ़तियों ने शुरू की धान खरीद
उत्तराखंड मंडी परिषद के अध्यक्ष अनिल कपूर डब्बू से हुई वार्ता के बाद गदरपुर में कच्चे आढ़तियों ने धान की खरीद शुरू कर दी है। शुक्रवार को भाकियू अराजनैतिक के प्रदेश अध्यक्ष सलविंदर सिंह कलसी के नेतृत्व में अनाज मंडी पहुंचे किसानों ने धान खरीद का कार्य शुरू होने का स्वागत किया। बता दें कि कच्चे आढ़तियों की ओर से धान की खरीद नहीं की जा रही थी जिससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही थी। जिला मुख्यालय में हुई वार्ता के बाद किसान नेताओं ने परिषद के अध्यक्ष अनिल कपूर डब्बू और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर अमन बाठला, सुखविंदर सिंह, सुरजीत सिंह, विपिन कुमार, अक्षत मुंजाल, हुकम सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
ओलावृष्टि से फसल नुकसान पर दोगुना हुआ मुआवजा
गूलरभोज में ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने मुआवजा राशि बढ़ा दी है। अब किसानों को प्रति हेक्टेयर 17 हजार के बजाय 34 हजार रुपये मिलेंगे। यह जानकारी विधायक अरविंद पांडेय ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के बाद दी।
विधायक पांडेय ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को कुछ दिन पहले हुई ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान के बारे में बताया। पांडेय ने कहा कि गदरपुर और बाजपुर विधानसभा क्षेत्र ओलावृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों में किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा मुआवजा राशि 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर काफी कम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल इस पर निर्णय लिया। उन्होंने छमाही फसल का मुआवजा 34 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की घोषणा की। बारहमासी फसल की क्षतिपूर्ति धनराशि भी 45 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।