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गेहूं उगने के बाद जिले में पहुंची एनपीके पहुंची
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:55 AM IST
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रुद्रपुर। गेहूं की बुवाई के करीब एक माह बाद अब समितियों में एनपीके और डीएपी उर्वरक पहुंचने लगे हैं, लेकिन पहले की अपेक्षा अब एनपीके की मांग कम होने से खरीद केंद्रों ने उर्वरक वापस लौटाने शुरू कर दिए हैं।
जिले में इस वर्ष करीब 96 हजार हेक्टेयर भूमि में रबी की फसल उगाई जानी है। रबी की फसल की बुवाई के समय एनपीके और डीएपी उर्वरकों की काफी जरूरत पड़ती है। समय पर न मिलने की वजह से कई किसान पर्याप्त मात्रा में इन उर्वरकों को खेतों में नहीं डाल सके। कुछ किसानों ने मजबूरी में यूरिया के साथ एनपीके या डीएपी को मिलाकर भी डाला था, लेकिन अब करीब 20-30 दिन बाद जिले में एनपीके व डीएपी की रैक पहुंची है, जबकि अधिकांश किसानों की गेहूं की पौध बड़ी हो चुकी है।
एनपीके की डिमांड कम होने से खाद बेचने वाली समितियों ने एनपीके व डीपीए के कट्टों को वापस लौटाना शुरू कर दिया है। बगवाड़ा के किसान विक्रमजीत सिंह कहते हैं कि अधिकांश किसानों की गेहूं की पौध अब बड़ी हो चुकी है। अब एनपीके से अधिक डीएपी की आवश्यकता है। पूर्वी रुद्रपुर किसान सहकारी समिति की अध्यक्ष नवजौत कौर ने कहा कि समिति ने 35000 एनपीके के कट्टों की डिमांड की थी, लेकिन समय पर किसी भी किसान को एनपीके नहीं मिली। यूसीएफ ने विलंब से 1600 कट्टे एनपीके व 400 कट्टे डीएपी के केंद्र में भेजे। बिक्री कम होने से 800 कट्टे एनपीके व 400 कट्टे डीएपी के वापस करने पड़े हैं। उधर, तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजेंद्र सिंह विर्क ने बताया कि किसान हित में फैसले नहीं लि एजा रहे हैं। जरूरत के समय सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रहीं।
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जिले में इस वर्ष करीब 96 हजार हेक्टेयर भूमि में रबी की फसल उगाई जानी है। रबी की फसल की बुवाई के समय एनपीके और डीएपी उर्वरकों की काफी जरूरत पड़ती है। समय पर न मिलने की वजह से कई किसान पर्याप्त मात्रा में इन उर्वरकों को खेतों में नहीं डाल सके। कुछ किसानों ने मजबूरी में यूरिया के साथ एनपीके या डीएपी को मिलाकर भी डाला था, लेकिन अब करीब 20-30 दिन बाद जिले में एनपीके व डीएपी की रैक पहुंची है, जबकि अधिकांश किसानों की गेहूं की पौध बड़ी हो चुकी है।
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एनपीके की डिमांड कम होने से खाद बेचने वाली समितियों ने एनपीके व डीपीए के कट्टों को वापस लौटाना शुरू कर दिया है। बगवाड़ा के किसान विक्रमजीत सिंह कहते हैं कि अधिकांश किसानों की गेहूं की पौध अब बड़ी हो चुकी है। अब एनपीके से अधिक डीएपी की आवश्यकता है। पूर्वी रुद्रपुर किसान सहकारी समिति की अध्यक्ष नवजौत कौर ने कहा कि समिति ने 35000 एनपीके के कट्टों की डिमांड की थी, लेकिन समय पर किसी भी किसान को एनपीके नहीं मिली। यूसीएफ ने विलंब से 1600 कट्टे एनपीके व 400 कट्टे डीएपी के केंद्र में भेजे। बिक्री कम होने से 800 कट्टे एनपीके व 400 कट्टे डीएपी के वापस करने पड़े हैं। उधर, तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजेंद्र सिंह विर्क ने बताया कि किसान हित में फैसले नहीं लि एजा रहे हैं। जरूरत के समय सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रहीं।
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